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Yearender 2025: इस साल रखी गई 2027 विधानसभा चुनाव की नींव, बीजेपी-कांग्रेस ने संगठन में किए कई बदलाव

साल 2025 कांग्रेस और बीजेपी के लिए कई मायनों में अहम रहा. दोनों ही पार्टियों ने उत्तराखंड में कई बड़े बदलाव किए.

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राजनीतिक सफरनामा साल 2025 (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : December 31, 2025 at 7:25 AM IST

8 Min Read
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रोहित सोनी

देहरादून: साल 2025 खत्म होने की ओर है. आज साल का आखिरी दिन है. सभी साल 2026 की तैयारियों में जुटे हुए हैं. साल 2025 की बात करें तो उत्तराखंड की राजनीति में कई बदलाव हुए हैं. ये भी कहा जा सकता है कि कांग्रेस और बीजेपी ने इन बदलाव के जरिए साल 2025 में ही साल 2027 के विधानसभा चुनाव की नींव रखी दी है. आइए जानते हैं कि साल 2025 में कांग्रेस और बीजेपी ने अपने संगठन में जो बदलाव किए हैं, उनका साल 2026 और साल 2027 के चुनाव पर क्या फर्क पड़ेगा. किस तरह से पार्टियों के समीकरण बदलेंगे.

2025 से ही 2027 के चुनाव की तैयारी: किसी भी विधानसभा चुनाव से करीब डेढ़ से 2 साल पहले ही राजनीतिक पार्टियां पूरी तरह सक्रिय हो जाती हैं. चुनाव से करीब एक साल पहले राजनीतिक पार्टियां चुनावी मूड में आ जाती हैं, ताकि चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच सके. यही वजह है कि साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रदेश की दोनों मुख्य पार्टियां कांग्रेस और बीजेपी ने चुनावी नींव रख दी है, जिसके तहत प्रदेश संगठन स्तर पर बड़ा बदलाव करते हुए नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई हैं.

साल 2025 में रखी गई 2027 विधानसभा चुनाव की नींव, (ETV Bharat)

कांग्रेस और बीजेपी में संगठन स्तर पर बदलाव: वैसे बीजेपी में भले ही प्रदेश अध्यक्ष रिपीट किए गए हों, लेकिन संगठन के पदाधिकारियों से लेकर मंडल स्तर तक बड़ा बदलाव किया गया है. इसी तरह कांग्रेस पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष से लेकर जिला और मंडल स्तर तक बड़ा बदलाव किया गया है. साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की दोनों मुख्य पार्टियों बीजेपी और कांग्रेस में हुए संगठनात्मक बदलाव काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.

चुनावी मैदान में उतरी कांग्रेस: खास बात यह है कि कांग्रेस ने न सिर्फ संगठन में बदलाव किया बल्कि आगामी चुनाव के मद्देनजर समितियां भी गठित कर दी हैं. मुख्य रूप से जब राजनीतिक पार्टियां चुनावी मूड में आ जाती हैं, तब चुनाव के लिए चुनाव अभियान समिति और चुनाव प्रबंधन समिति का गठन किया जाता है. लेकिन उससे पहले ही कांग्रेस ने अभी से ही चुनाव अभियान समिति और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्षों को नियुक्त कर दिया है, जिसे राजनीतिक जानकार इस बात से जोड़कर चल रहे हैं कि कांग्रेस आगामी चुनाव के मद्देनजर पूरी तरह से सक्रिय हो गई है.

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उत्तराखंड बीजेपी प्रदेश मुख्यालय (ETV Bharat)

कांग्रेस और बीजेपी की चुनौती: साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की नींव साल 2025 में रखे जाने के पीछे प्रदेश की दोनों पार्टियों की चुनौतियों से जोड़कर देखा जा रहा है. मुख्य रूप से बीजेपी के लिए साल 2027 इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वो लगातार दो टर्म से सत्ता पर काबिज है और तीसरी बार सत्ता पर काबिज आसान नहीं होगा.

साल 2017 में विधानसभा चुनाव में बीजेपी सत्ता पर काबिज हुई. इसके बाद 2022 में भी बीजेपी ने मिथक तोड़ते हुए अपनी जीत दर्ज कराई. उत्तराखंड के राजनीति इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ था, जब कोई पार्टी लगातार दो बार सत्ता पर काबिज हुई हो. 2022 से पहले तक एक बार बीजेपी और एक बार कांग्रेस ही जीतती आई है.

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उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय देहरादून. (ETV Bharat)

कांग्रेस के लिए नाक का चुनाव: राजनीति जानकार साल 2027 में बीजेपी की हैट्रिक लगाना एक चुनौती को तौर पर देख रहे हैं, जिसे बीजेपी भी भलीभांति जानती है. इसीलिए बीजेपी अभी से चुनावी मोड में नजर आ रही है. वहीं लगातार दो टर्म से सत्ता से दूर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के लिए भी 2027 का चुनाव नाक और साख का सवाल बन गया है. यही वजह है कि कांग्रेस ने भी आगामी चुनाव की नींव 2025 में रख दी है.

वही, ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए राजनीतिक जानकार जय सिंह रावत ने कहा कि

साल 2027 में विधानसभा का चुनाव होना है. एक साल पहले यानी 2026 को चुनावी वर्ष माना जाता है. लेकिन इस बार कांग्रेस और बीजेपी साल 2025 में ही चुनावी मोड में आ चुकी हैं. 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए ही कांग्रेस और बीजेपी ने साल 2025 में अपने संगठनों में बड़ा बदलाव किया है.

वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत का कहना है कि बीजेपी ने भले ही अपना प्रदेश अध्यक्ष न बदला हो, लेकिन राज्य और जिला स्तर पर संगठन में कई बदलाव किए. बता दें कि बीजेपी ने महेंद्र भट्ट को दोबारा से उत्तराखंड बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है.

इसी तरह के वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत के नजरिये से उत्तराखंड की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस की स्थिति को समझाने का प्रयास किया.

उत्तराखंड में कांग्रेस ने संगठन में बड़े पैमाने पर बदलाव किये हैं, जिसमें मुख्य रूप से न सिर्फ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बदले गए, बल्कि चुनाव अभियान समिति और चुनाव प्रबंधन समिति का अध्यक्ष भी नामित की गई. इसे स्पष्ट है कि कांग्रेस साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को बहुत ही गंभीरता से ले रही है. दो टर्म से लगातार सत्ता के बाहर बैठी कांग्रेस इस बार सत्ता में वापसी की कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है. यही वजह है कि कांग्रेस चुनाव को लेकर गंभीर नजर आ रही है. जिसके चलते कांग्रेस पार्टी के जिम्मेदार नेता धरातल पर सक्रिय दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में साल 2025 राजनीतिक बदलाव की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण रहा है.
-जय सिंह रावत, राजनीतिक जानकार-

वहीं, ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विधायक विनोद चमोली ने कहा कि साल 2025 में बीजेपी ने काफी काम किया है. वर्तमान समय में संगठनात्मक लिहाज से बीजेपी बहुत आगे है. ऐसे में इस साल बीजेपी ने प्रदेश संगठन को काफी अधिक मजबूत किया है. जिसमें बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष तय करने के साथ ही पूरी टीम को तय किया गया है. इसके अलावा प्रदेश से लेकर पन्ना प्रमुखों तक में बदलाव किए गए हैं.

अभी भी बीजेपी में तमाम कम बचे हुए हैं, जिनको धीरे-धीरे आगे बढ़ाया जा रहा है. जबकि विपक्षी पार्टी कांग्रेस बीजेपी से बहुत पीछे है, क्योंकि उनके अध्यक्ष का निर्धारण हाल ही में हुआ है. ऐसे में वो भी कोशिश कर रहे हैं कि उनकी टीम भी बन जाए. तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो कांग्रेस, बीजेपी के करीब भी नहीं है, बल्कि बहुत पीछे है. कांग्रेस को बीजेपी तक पहुंचने में न सिर्फ साल 2026 निकल जाएगा. चुनाव निकलने के बाद भी कांग्रेस, बीजेपी को छू नहीं पाएगी.

-विनोद चमोली, बीजेपी विधायक-

विनोद चमोली ने कहा कि बीजेपी तीसरी बार भी सरकार बनाने की ओर आगे बढ़ रही है, जबकि कांग्रेस की परिस्थितियों काफी अधिक बदली हैं.

पिछले चुनाव में भी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल थे और वर्तमान में भी गणेश गोदियाल को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है. पिछले चुनाव में प्रीतम सिंह भी काफी आगे थे और इस बार भी उन्हें चुनाव अभियान समिति की जिम्मेदारी सौंपी गई है. हालांकि इस बार हरक सिंह रावत की नई एंट्री हुई है. पिछले चुनाव में हरीश रावत जो लीडिंग रोल में थे, वो इस बार पीछे हो गए हैं.
-विनोद चमोली, बीजेपी विधायक-

बीजेपी विधायक विनोद चमोली का कहना है कि समय से पहले समितियां का गठन करना कांग्रेस के लिए नुकसानदायक साबित होगा. क्योंकि कांग्रेस ने प्रोएक्टिव होकर दो रास्ते और खोल दिए हैं. ऐसे में अकेले गणेश गोदियाल ही नहीं हैं, बल्कि प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत भी चेहरे बन गए हैं, जबकि हरीश रावत पहले से ही नजर गड़ाए बैठे हैं. लिहाजा इन चारों चेहरों में संघर्ष चल रहा है.

2025 में कांग्रेस के अंदर हुए बदलाव पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि परिवर्तन संसार का नियम है. परिवर्तन होते रहते हैं और बेहतरीन की कोशिशें भी होती रहती हैं. साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की दृष्टिगत कांग्रेस पूरे मनोयोग से लगी हुई. अगर ये सरकार (बीजेपी) रही तो प्रदेश बर्बादी के कगार पर है. प्रदेश को अगर बचाना है, तो जनता को समझाना होगा.

कांग्रेस का मकसद बीजेपी सरकार को सत्ता से हटाना है, ताकि प्रदेश में पड़ी भ्रष्टाचार की नींव परंपरा ना बन जाए. इस काम में कांग्रेस जुटी हुई है.

-गणेश गोदियाल, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस-

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