सर्वे से पहले सीएम ने फाइनल किया टिकट! इस सीट पर तय हुआ नाम, जानिए कैसे लगी मुहर
रक्षाबंधन कार्यक्रम में सीएम धामी ने गणेश जोशी के समर्थन में बात कही. इसके बाद पॉलिटिकल बयानबाजी शुरू हो गई है. नवीन उनियाल की रिपोर्ट

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 28, 2026 at 2:12 PM IST
|Updated : August 28, 2026 at 2:21 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 के लिए पहला टिकट फाइनल हो गया है. खास बात यह है कि भरे मंच से इस बात की पुष्टि खुद सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की है. इस दौरान उन्होंने इस सीट पर बाकी प्रत्याशियों पर भी कटाक्ष कसते हुए अपना पूरा समर्थन सर्वे में पूरे नंबर पाने वाले विधायक को दिया है. जानिए महीनों पहले किस सीट पर भाजपा ने तय किया प्रत्याशी
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 में अभी कई महीने का वक्त बाकी है. राजनीतिक दल भले ही धीरे-धीरे चुनावी मोड में पहुंचने लगे हों, लेकिन अधिकांश विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है. खासतौर पर सत्तारूढ़ भाजपा में टिकट के लिए सर्वे और संगठनात्मक स्तर पर मंथन का दौर चल रहा है. ऐसे में अगर किसी सीट पर चुनाव से काफी पहले ही किसी नाम को लेकर मुख्यमंत्री के मंच से लगभग खुला संकेत मिल जाए, तो उसका राजनीतिक महत्व अपने आप बढ़ जाता है.
मसूरी विधानसभा सीट पर फिलहाल कुछ ऐसा ही होता दिखाई दे रहा है. रक्षाबंधन के कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिस अंदाज में कैबिनेट मंत्री और मसूरी विधायक गणेश जोशी के समर्थन में बात कही, उसने प्रदेश की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है. मुख्यमंत्री ने मंच से महिलाओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी का जिक्र करते हुए कहा कि अब उन्हें किसी तरह का संदेह नहीं है और जिस तरह महिलाएं कार्यक्रम में पहुंची हैं, उससे लगता है कि आने वाले चुनाव में वे अपने भाई को बड़े अंतर से जिताने वाली हैं.
मुख्यमंत्री का यह बयान महज एक राजनीतिक कार्यक्रम में दिया गया सामान्य संबोधन नहीं माना जा रहा है. इसकी वजह मसूरी विधानसभा में टिकट को लेकर पहले से चल रही अंदरूनी हलचल है. भाजपा में अभी औपचारिक तौर पर टिकट की प्रक्रिया शुरू होने में वक्त है. पार्टी स्तर पर सर्वे भी चल रहे हैं. इसके बावजूद मुख्यमंत्री ने गणेश जोशी की जीत का जिक्र किया है. उनका यह बयान राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है.
मेरी बहनें मुझ पर बहुत भरोसा करती हैं और उनसे ज़्यादा भरोसा मैं उन पर करता हूँ। pic.twitter.com/syyRjL9mbK
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क्या मसूरी में पहले ही तय हो गया टिकट? उत्तराखंड की राजनीति में चुनाव से पहले टिकट को लेकर दावेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा आम बात है. मसूरी विधानसभा भी इससे अछूती नहीं है. यहां गणेश जोशी के अलावा भाजपा के कुछ अन्य नेता भी अपनी दावेदारी को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. इनमें पूर्व महापौर सुनील उनियाल गामा समेत कई नाम चर्चा में रहे हैं.
ऐसे में मुख्यमंत्री के मंच से गणेश जोशी की जीत को लेकर दिया गया बयान भाजपा के भीतर भी चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है. सवाल यह है कि क्या पार्टी ने मसूरी सीट को लेकर पहले ही अपना मन बना लिया है? या फिर मुख्यमंत्री का बयान महज कार्यक्रम के माहौल और वहां मौजूद महिलाओं की भीड़ के संदर्भ में था?
मेरी बहनें ज़िंदाबाद! pic.twitter.com/40PA1cqiEP
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मा. मुख्यमंत्री श्री @pushkardhami जी, आपकी गरिमामयी उपस्थिति, मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन भरे शब्दों के लिए आपका बहुत-बहुत आभार। https://t.co/SebBF6pFEK
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'सांप-बिच्छू और गिरगिट' वाला बयान क्यों चर्चा में?: मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन के दौरान उन लोगों पर भी निशाना साधा जो चुनाव नजदीक आते ही जनता से संपर्क करना शुरू कर देते हैं. उन्होंने सांप, बिच्छू और गिरगिट जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए राजनीतिक रूप से कटाक्ष किया. यही बयान अब मसूरी की स्थानीय राजनीति में अलग-अलग अर्थों में देखा जा रहा है, क्योंकि मसूरी से भाजपा के भीतर ही कई चेहरे अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, इसलिए सवाल उठ रहा है कि मुख्यमंत्री का निशाना आखिर किस पर था?
क्या यह विपक्षी कांग्रेस के संभावित दावेदारों के लिए राजनीतिक संदेश था या फिर भाजपा के भीतर टिकट की दौड़ में शामिल नेताओं के लिए चेतावनी? मुख्यमंत्री ने अपने बयान में इसे स्पष्ट नहीं किया. यही अस्पष्टता इस बयान को और ज्यादा राजनीतिक बना रही है
गणेश जोशी ने भी इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने सांप, बिच्छू और गिरगिट किस संदर्भ में कहा, वह नहीं बता सकते. हालांकि उन्होंने अपने अंदाज में यह जरूर कहा कि बरसात के दौरान उनके घर में भी केंचुए आ रहे हैं. साथ ही उन्होंने अपनी विधानसभा में जनता से जुड़े रहने और लोगों के काम कराने का दावा किया.
उनकी प्रतिक्रिया को भी राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अगर मुख्यमंत्री का बयान उनके समर्थन में संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, तो गणेश जोशी ने भी उसे खारिज करने के बजाय अपने क्षेत्र में किए जा रहे काम और जनता से जुड़ाव को अपनी सबसे बड़ी ताकत के रूप में सामने रखा.

गणेश जोशी के सामने असली चुनौती क्या? गणेश जोशी मसूरी से लंबे समय से सक्रिय राजनीति कर रहे हैं. वर्तमान में राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. ऐसे में भाजपा के लिए उनका राजनीतिक कद किसी सामान्य विधानसभा दावेदार से अलग है, लेकिन दूसरी तरफ पिछले कुछ समय में उनका नाम कई विवादों और विपक्षी हमलों के बीच भी रहा है.
विशेष तौर पर आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले को लेकर कांग्रेस लगातार उन्हें निशाने पर लेती रही है. यह मामला न्यायिक स्तर पर विचाराधीन है. शासन स्तर पर भी इससे जुड़े पत्राचार की चर्चा होती रही है. ऐसे मामलों ने गणेश जोशी के खिलाफ विपक्ष को लगातार राजनीतिक मुद्दा उपलब्ध कराया है. इसके अलावा उनके विभागों से जुड़े कथित अनियमितताओं और विभिन्न विवादों को लेकर भी विपक्ष ने कई बार सरकार को घेरने की कोशिश की है. इन आरोपों पर भाजपा और गणेश जोशी की ओर से अलग-अलग स्तर पर जवाब भी दिए जाते रहे हैं, लेकिन चुनावी राजनीति में विपक्ष के लिए ऐसे मुद्दे महत्वपूर्ण होते हैं.
यही वजह है कि पिछले कुछ समय से राजनीतिक गलियारों में कभी-कभी यह चर्चा भी उठती रही है कि क्या 2027 में गणेश जोशी को फिर से टिकट मिलेगा? मुख्यमंत्री के हालिया बयान ने इसी सवाल को एक नई दिशा दे दी है.
पुराने दिनों को याद कर भावुक हुये गणेश जोशी, रक्षाबंधन कार्यक्रम में छलके आंसू @ganeshjoshibjp@BJP4UK@pushkardhami@ukcmo
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कांग्रेस को मिला हमला करने का मौका: मुख्यमंत्री के बयान के बाद कांग्रेस को भाजपा पर हमला करने का मौका मिल गया. मसूरी से कांग्रेस नेता अनुज गुप्ता ने इसे भाजपा की प्राथमिकता से जोड़ते हुए तंज कसा. उनका कहना है कि अगर भाजपा ने सबसे पहले किसी नाम को लेकर संकेत दिया है तो इसमें उन्हें कोई आश्चर्य नहीं है.
कांग्रेस नेता ने भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों को लेकर गणेश जोशी पर निशाना साधा और दावा किया कि भाजपा ऐसे नेताओं को प्राथमिकता देती है. जाहिर है, कांग्रेस की रणनीति साफ है. गणेश जोशी को व्यक्तिगत रूप से घेरने के साथ-साथ उनके बहाने भाजपा सरकार की छवि पर भी हमला करना.
मसूरी जैसी महत्वपूर्ण सीट पर यह रणनीति कांग्रेस के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां मुकाबला केवल एक विधायक के खिलाफ नहीं बल्कि सरकार के एक मंत्री के खिलाफ भी होगा. ऐसे में गणेश जोशी पर लगे राजनीतिक आरोपों को कांग्रेस चुनावी मुद्दे में बदलने की कोशिश करेगी.
भाजपा ने संभाला मोर्चा: कांग्रेस के हमले के बाद भाजपा भी बचाव में सामने आई. भाजपा नेता मथुरा दत्त जोशी ने मुख्यमंत्री के बयान को सोच-समझकर दिया गया बयान बताया. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी में अभी सर्वे की प्रक्रिया चल रही है. बेहतर काम करने वाले नेताओं को ही टिकट देने पर फैसला होगा.
भाजपा का यह रुख बताता है कि पार्टी फिलहाल गणेश जोशी के नाम को लेकर किसी औपचारिक घोषणा से बचना चाहती है. संगठनात्मक प्रक्रिया पूरी होने से पहले टिकट की घोषणा करना भाजपा की सामान्य रणनीति नहीं है, लेकिन मुख्यमंत्री के बयान के बाद पार्टी को यह स्पष्ट करना जरूरी हो गया है कि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है.
यही वह बिंदु है जहां मसूरी की राजनीति दिलचस्प हो जाती है. एक तरफ मुख्यमंत्री का सार्वजनिक मंच से गणेश जोशी की जीत की बात करना, दूसरी तरफ पार्टी का कहना कि अभी सर्वे और प्रक्रिया जारी है. दोनों को साथ रखकर देखें तो संदेश यही निकलता है कि गणेश जोशी की दावेदारी फिलहाल मजबूत जरूर है, लेकिन औपचारिक मुहर बाकी है.
दावेदारों के लिए क्या है संदेश? मुख्यमंत्री के बयान का सबसे बड़ा असर भाजपा के भीतर टिकट की दावेदारी कर रहे नेताओं पर पड़ सकता है. चुनावी राजनीति में टिकट की दौड़ केवल पार्टी के औपचारिक फैसले तक सीमित नहीं होती. दावेदार महीनों पहले से क्षेत्र में सक्रिय होते हैं. संगठन के भीतर अपनी पकड़ मजबूत करते हैं. जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता दिखाने की कोशिश करते हैं.ऐसे में अगर मुख्यमंत्री सार्वजनिक तौर पर मौजूदा विधायक की जीत की बात कर दें, तो दूसरे दावेदारों के लिए यह संकेत माना जा सकता है कि पार्टी नेतृत्व मौजूदा विधायक के प्रदर्शन और जनाधार से संतुष्ट है.
हालांकि इसका दूसरा पहलू भी है. अगर पार्टी अभी सर्वे के आधार पर टिकट देने की बात कर रही है, तो दावेदारी करने वाले नेताओं के लिए दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं माना जा सकता. यही कारण है कि मसूरी में आने वाले दिनों में अंदरूनी राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है.
चुनाव से पहले ही शुरू हुआ टिकट का खेल: मसूरी का यह घटनाक्रम उत्तराखंड की चुनावी राजनीति में एक बड़े ट्रेंड की तरफ भी इशारा करता है. 2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक दल अब स्थानीय स्तर पर समीकरणों को समझने और संभावित प्रत्याशियों की जमीन मजबूत करने में जुटने लगे हैं.
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