UP के इस जेल के कैदियों की बनाई अनोखी पेंटिग्स, कला को मिल रही पहचान
जिला कारागार गाजियाबाद में जेल प्रशासन द्वारा बंदियों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने का सफल प्रयास,कैदियों के जीवन में आ रहे कई तरह के सुधार

Published : March 3, 2026 at 8:26 PM IST
नई दिल्ली/गाजियाबाद : उत्तर प्रदेश की एक ऐसी जेल जहां कैदी सिर्फ होली के त्योहार पर ही नहीं बल्कि साल भर रंगों से खेलते हैं. यहां रंग सिर्फ उत्सव तक सीमित नहीं है बल्कि सुधार और नई शुरुआत का जरिया बन चुके हैं. जेल की ऊंची दीवारों के भीतर बंद कैदी ब्रश, रंग और कैनवास के सहारे अपने जीवन को उम्मीद के नए रंगों से भर रहे हैं.
एक्टिविटी सेंटर में कैदियों को पेंटिंग का प्रशिक्षण
हम बात कर रहे हैं जिला कारागार गाजियाबाद की, यहां पर जेल प्रशासन द्वारा बंदियों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहे हैं. जेल परिसर में बने एक्टिविटी सेंटर में कैदियों को पेंटिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है. कैदी प्राकृतिक दृश्य, धार्मिक चित्र और सामाजिक संदेशों पर आधारित आकर्षक और उच्च स्तरीय पेंटिंग तैयार करते हैं.
हजार से ₹1500 तक में कैदियों द्वारा तैयार की गई पेंटिंग उपलब्ध
कैदियों द्वारा तैयार की गई पेंटिंग्स की खास बात यह है कि जहां बाजार में अच्छी पेंटिंग्स हजारों रुपए में बिकती हैं, वहीं हजार से ₹1500 तक में कैदियों द्वारा तैयार की गई पेंटिंग उपलब्ध हो जाती हैं. इतना ही नहीं इच्छुक लोग ऑर्डर देकर कैदियों से अपनी पसंद की पेंटिंग्स बनवा सकते हैं.

जेल परिसर के बाहर बने आउटलेट से पेंटिंग्स खरीदने की सुविधा
यदि किसी को कैदियों द्वारा तैयार की गई पेंटिंग्स को देखना है या फिर खरीदना है तो वह जेल परिसर के बाहर बने आउटलेट से पेंटिंग्स देख और खरीद सकते हैं. खास बात यह है की पेंटिंग्स की बिक्री से होने वाली रकम सीधे संबंधित कैदी के खाते में जमा हो जाती है. जिससे कैदियों को आर्थिक संबल मिलता है और यह रकम रिहाई के बाद आत्मनिर्भर बनने की राह में अहम भूमिका निभाती है.
कैदियों को आत्मनिर्भर बनाना इस मुहिम का है लक्ष्य
देखा गया है कि कई बार कैदी अपने व्यक्तिगत अनुभवों और भावनाओं को भी रगों के माध्यम से कैनवास पर उतार देते हैं. कभी कभी इनके द्वारा तैयार की गई पेंटिंग्स की क्वालिटी इतनी बेहतर होती है की पहली नजर में विश्वास करना मुश्किल हो जाता है कि यह पेंटिंग्स जेल के भीतर तैयार की गई है. जेल प्रशासन का मानना है कि इस पहल का मकसद सिर्फ कैदियों को एंगेज करना नहीं बल्कि कैदियों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके भीतर छिपी प्रतिभा को बाहर लेकर आना है.

पेंटिंग्स को विभिन्न प्रदर्शनियों में किया जाता है प्रदर्शित
जिला कारागार गाजियाबाद द्वारा कैदियों द्वारा तैयार की गई विभिन्न पेंटिंग्स को विभिन्न प्रदर्शनियों और कार्यक्रमों में प्रदर्शित किया जाता है. ऐसा करने की पीछे मकसद कैदियों की कला को व्यापक पहचान दिलाना है. कला प्रेमियों ने भी कैदियों द्वारा तैयार की गई पेंटिंग्स की सराहना की है और इसे सुधारात्मक प्रयासों का सकारात्मक उदाहरण बताया है.

कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव
जेल प्रशासन के मुताबिक, रचनात्मक गतिविधियां कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालने में अहम साबित होती हैं. कल के माध्यम से एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ता है साथ ही कैदियों में तनाव भी काम होता है. जेल में मौजूद कई बंधिया द्वारा स्वीकार किया गया है कि कल ने उन्हें आत्म मंथन का अवसर उपलब्ध कराया है.

जेल परिसर में विभिन्न वर्कशॉप्स का आयोजन
कैदियों की कला को बेहतर करने के लिए जेल प्रशासन द्वारा जेल परिसर में विभिन्न वर्कशॉप्स का आयोजन किया जाता है. वर्कशॉप्स में पेशेवर आर्टिस्ट द्वारा कैदियों को प्रशिक्षण दिया जाता है साथ ही उनके द्वारा तैयार की गई पेंटिंग्स को एग्जामिन भी किया जाता है. जेल परिसर के भीतर कैदियों ने ही दीवारों पर पेंटिंग्स बनाकर परिसर को सजाया है.

कैदियों की व्यवहार और सोच दोनों में सकारात्मक परिवर्तन
जिला कारागार गाजियाबाद में कई ऐसे कैदी भी थे जिन्हें पहले कभी ब्रश पकड़ने का अनुभव नहीं था लेकिन प्रशिक्षण और निरंतर प्रेक्टिस से उनके भीतर छिपी प्रतिभा बाहर निकाल कर आई है. जब कैदियों की बनाई पेंटिंग्स बाजार में बिकती हैं और लोग पेंटिंग्स की सराहना करते हैं तो कैदियों का आत्मविश्वास बढ़ता है. कैदियों को एहसास होता है क्योंकि मेहनत की कदर हो रही है जिससे उनके व्यवहार और सोच दोनों में सकारात्मक परिवर्तन आता है.
मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता
यह पहला एक मजबूत संदेश दे रही है कि सुधार की संभावना हर व्यक्ति में होती है बस केवल सही मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता होती है. जिला कारागार गाजियाबाद अब सिर्फ सजा काटने का स्थान नहीं बल्कि एक सुधार ग्रह के रूप में तब्दील हो रहा है. यहां कैदी सचमुच साल भर रंगों से खेलते हैं और उन्हें रंगो से अपने भविष्य की नई तस्वीर गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं.
जेल परिसर में मौजूद बंदियों को विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण
जिला कारागार गाजियाबाद के के मुताबिक, "जेल परिसर में मौजूद बंदियों को विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण उपलब्ध कराए जाते हैं. जिसमें पेटिंग बनाना भी शामिल है. शुरुआत में बाहर से ट्रेनर बुलाकर बंदियों को प्रशिक्षण दिलाया जाता है. 20-20 बंदियों के बैच बनाए गए है. साल भर का प्रशिक्षण कार्यक्रम होता है."
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