बिजली लोड बढ़ाने पर उत्तर प्रदेश बिजली विभाग की सफाई, कहा- जिनकी डिमांड ज्यादा उनका बढ़ाया गया भार
ऊर्जा विभाग और जनता दोनों के हित में है लोड बढ़ाना- UPPCL

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : July 8, 2026 at 8:12 AM IST
लखनऊ: उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने प्रदेश भर के 47 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं का भार बढ़ा दिया है. विभाग ने विद्युत भार (Sanctioned Load) से अधिक बिजली का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं का स्वतः (Auto Regularisation) बढ़ा दिया है.
उत्तर प्रदेश बिजली विभाग की सफाई: UPPCL ने इस फैसले को लेकर सफाई दी है. विभाग की ओर से कहा गया है कि, ये फैसला उपभोक्ता और ऊर्जा विभाग दोनों के ही हित में है. भार बढ़ने से उपभोक्ता को अधिक मांग प्रभार से राहत मिलेगी, साथ ही ऊर्जा विभाग को भी यह पता चल सकेगा कि असल डिमांड कितनी है. कितनी कैपेसिटी के उपकरण इंस्टॉल करने हैं. तर्क दिया है कि जिन उपभोक्ताओं का बिजली भार बढ़ाया गया है, उनकी डिमांड ज्यादा थी.

उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड सभी उपभोक्ताओं से अनुरोध करता है कि, वे अपने बिजली उपयोग के अनुसार स्वीकृत भार का उपयोग करें. बिजली संबंधी जानकारी के लिए विभाग की तरफ से भेजे जाने वाले एसएमएस पर ध्यान दें.- डॉ. आशीष गोयल, चेयरमैन, उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन
क्यों बढ़ाया गया लोड?: उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के वित्तीय वर्ष 2025-26 के टैरिफ आदेश के अनुसार, जिन उपभोक्ताओं ने एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच तीन बार अपने स्वीकृत विद्युत भार (Sanctioned Load) से अधिक बिजली का उपयोग किया है, उनका स्वीकृत भार, न्यूनतम भार उल्लंघन की रीडिंग के बराबर स्वतः (Auto Regularisation) बढ़ा दिया गया है. यह व्यवस्था स्मार्ट मीटर और इलेक्ट्रॉनिक (नॉन-स्मार्ट) मीटर वाले सभी उपभोक्ताओं पर समान रूप से लागू है.
उपभोक्ता को क्या फायदा होगा?: कोई उपभोक्ता अपने स्वीकृत भार से अधिक बिजली का उपयोग करता है, तो उस पर अतिरिक्त प्रभार लगता है. स्वीकृत भार बढ़ जाने के बाद भविष्य में अनावश्यक अधिक मांग प्रभार (Demand Penalty) से राहत मिलेगी और उपभोक्ता अतिरिक्त आर्थिक बोझ से बच सकेंगे. इसके अलावा उपभोक्ताओं के वास्तविक बिजली उपयोग के अनुसार स्वीकृत भार होने से बिजली विभाग को लाइन और ट्रांसफार्मर की क्षमता सही ढंग से बढ़ाने में सुविधा मिलेगी. इससे ओवरलोडिंग कम होगी. ट्रांसफार्मर खराब होने की घटनाएं घटेंगी और उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराई जा सकेगी.
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