सॉल्वर गैंग का नेटवर्क तोड़ेंगे DGP: UP बोर्ड परीक्षा में दूसरों की जगह बैठने वालों की अब ख़ैर नहीं
यूपी बोर्ड परीक्षा में 30 सॉल्वर पकड़े जा चुके हैं. बोर्ड ने DGP को पत्र लिखकर सॉल्वरों के खिलाफ ‘वॉटर-टाइट’ जांच का अनुरोध किया है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : February 28, 2026 at 3:57 PM IST
|Updated : February 28, 2026 at 6:42 PM IST
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) की परीक्षाओं में सॉल्वर गैंग और छद्म परीक्षार्थियों की समस्या जस की तस है. अब तक बोर्ड परीक्षा में कुल 30 कैंडीडेट ऐसे पकड़े जा चुके हैं, जाे दूसरों की जगह परीक्षा देने पकड़े गए हैं.
गौर करें तो साल 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में परिषद ने सख्त और निर्णायक कदम उठाए हैं. बावजूद इसके सॉल्वर पकड़े जा रहे हैं. इसकी जड़ें इतनी गहरी हैं कि बोर्ड वहां तक पहुंच नहीं पा रहा है. लिहाजा बोर्ड ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिरीक्षक (DGP) को पत्र लिखकर पकड़े गए सॉल्वरों की जड़ों तक पहुंचने और ‘वॉटर-टाइट’ जांच करने का अनुरोध किया है.

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) की परीक्षाओं में सामूहिक नकल पर तो काफी हद तक लगाम लग गई है, पर सॉल्वर गैंग और छद्म परीक्षार्थियों की समस्या जस की तस है. अब तक बोर्ड परीक्षा में कुल 30 कैंडीडेट ऐसे पकड़े जा चुके हैं जाे दूसरों की जगह परीक्षा देने पकड़े गए हैं.
सबूताें के अभाव में छूटने न पाएं सॉल्वर
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह की ओर से उत्तर प्रदेश के जिला विद्यालय निरीक्षकों को जारी ताजा आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यदि किसी परीक्षा केंद्र पर पंजीकृत परीक्षार्थी की जगह छद्म परीक्षार्थी पकड़ा जाता है, तो अब केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं चलेगी. जांच ऐसी होनी चाहिए, जो अदालत में टिक सके और सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड तक पहुंच सके. यानी पकड़ो और ठोस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी कोर्ट में पेश करो, ताकि सबूतों के अभाव में सॉल्वर छूटने न पाएं.

परिषद ने साफ किया है कि यदि जांच में परीक्षा केंद्र स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो संबंधित कक्ष निरीक्षक, केंद्र व्यवस्थापक और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.
2020 में कैसे खुला था सॉल्वर नेटवर्क
यूपी बोर्ड परीक्षा 2020 के दौरान उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और दस्तावेज सत्यापन में कई विसंगतियां सामने आई थीं. प्रवेश पत्र की फोटो, उपस्थिति पत्रक और उत्तर पुस्तिका की लिखावट में अंतर पाया गया. कुछ जिलों से यह भी रिपोर्ट आई कि वास्तविक छात्र परीक्षा केंद्र पर आया ही नहीं था, उसकी जगह किसी अन्य व्यक्ति ने परीक्षा दी.

बोर्ड स्तर की जांच में यह साफ हुआ कि यह केवल एक-दो केंद्रों तक सीमित मामला नहीं था. कई जिलों में दलालों, कोचिंग नेटवर्क और स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के संकेत मिले. इसके बाद कई संदिग्ध मामलों को पुलिस जांच के लिए भेजा गया और परिणाम निरस्त करने जैसी कार्रवाई भी हुई.
2026 में भी मंडरा रहा खतरा, और अधिक सख्ती के निर्देश
सचिव भगवती सिंह ने बताया कि 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाएं 18 फरवरी से चल रही हैं. इसी दौरान आगरा, एटा, मेरठ, हापुड़, बिजनौर, शाहजहांपुर, फतेहपुर, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, इटावा, कन्नौज, झांसी, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, गोंडा और गोरखपुर जैसे जिलों से परिषद को संकेत मिले कि कुछ स्थानों पर फिर से सॉल्वर बैठाने का प्रयास हो रहा है.

इसी पृष्ठभूमि में जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र भेजकर साफ कर दिया है कि अब हर सॉल्वर प्रकरण को क्रिमिनल केस की तरह ट्रीट किया जाएगा. यानी कोई ढिलाही नहीं की जाएगी और केस की ऐसी पैरवी की जाए जिससे सॉल्वर और उनके मददगारों को सख्त से सख्त सजा मिल सके और नकल पर नकेल कसी जा सके.

ग्राउंड लेवल पर क्या बदला
भगवती सिंह ने बताया कि इस बार जांच को केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा है. केंद्र व्यवस्थापकों और सेक्टर मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया गया है कि वे प्रवेश पत्र की फोटो में सुपर इम्पोजिशन या एडिटिंग के स्पष्ट प्रमाण तलाशें. परीक्षा केंद्र के गेट पर फोटो मिलान की जिम्मेदारी तय की जाए. बिना फोटो मिलाए कोई भी परीक्षा केंद्र में प्रवेश न कर पाए.

इसके अलावा पहले 15 मिनट में कक्ष निरीक्षक द्वारा फोटो और हस्ताक्षर मिलान की पुष्टि अनिवार्य कर दी गई है. कई केंद्रों पर अब निरीक्षक सिर्फ नाम पुकारने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पहचान को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है.
डिजिटल साक्ष्य पर पहली बार इतना जोर
2020 के मामलों में सबसे बड़ी कमी डिजिटल सबूतों की रही थी. इसे देखते हुए 2026 के निर्देशों में डिजिटल साक्ष्य को जांच का केंद्रीय आधार बनाया गया है. अब पोर्टल पर अपलोड फोटो और एडमिट कार्ड की फोटो का मेटाडाटा मिलान अनिवार्य कर दिया गया है. यह जांच कि फोटो AI टूल या किसी सॉफ्टवेयर से बदली गई है या नहीं.
सॉल्वर के केंद्र में प्रवेश और कक्ष में बैठने की CCTV फुटेज को सुरक्षित रखा जा रहा है, ताकि उसे कोर्ट में पैवरी के दौरान पेश किया जा सके. अधिकारियों का मानना है कि अदालत में पहचान साबित करने के लिए CCTV फुटेज सबसे मजबूत सबूत बनेगा.
पहली बार सॉल्वर गैंग तक पहुंचने की कोशिश
सचिव ने यह भी साफ किया है कि केवल सॉल्वर को पकड़ कर मामला खत्म नहीं माना जाएगा. मोबाइल और व्हाट्सएप डेटा की जांच होगी. यह देखा जाएगा कि सॉल्वर किसी संगठित गैंग से जुड़ा है या नहीं. मूल पंजीकृत छात्र और उसके अभिभावकों की भूमिका की भी जांच की जाएगी. 2020 की तरह इस बार भी संकेत हैं कि कई मामलों में अभिभावकों की सहमति या जानकारी के बिना यह खेल संभव नहीं है.
ऐसे में यदि जांच में यह सामने आता है कि कक्ष निरीक्षक, केंद्र व्यवस्थापक या अन्य कर्मचारी ने लापरवाही बरती या मिलीभगत की, तो उनके खिलाफ भी विभागीय और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी. यह निर्देश सीधे तौर पर केंद्र स्तर पर जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
संयुक्त शिक्षा निदेशक माध्यमिक, प्रयागराज आरएन विश्वकर्मा ने बताया कि बोर्ड की परीक्षा में त्रिस्तरीय निगरानी हो रही है. सामूहिक नकल पर पूरी तरह से नकेल कस दी गई है. अब नकल न के बराकर हो रही है. हालांकि अभी सॉल्वर बैठाने की कोशिश पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है, लेकिन इस बार डर ज्यादा है.
वीडियो बयान, सील किए गए मोबाइल, CCTV फुटेज और तत्काल FIR की प्रक्रिया ने सॉल्वर गैंग के लिए जोखिम बढ़ा दिया है. शासन की मंशा के अनुरूप 2026 में हर सॉल्वर केस को अंजाम तक पहुंचाया जाएगा. कोई बचेगा नहीं.
सॉल्वर पकड़े जाने पर क्या करना होगा?
परिषद ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी परीक्षा केंद्र पर सॉल्वर पकड़े जाने की स्थिति में केवल औपचारिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी. पुलिस विवेचना को मजबूत और अदालत में टिकाऊ बनाने के लिए भौतिक और डिजिटल दोनों तरह के साक्ष्य अनिवार्य रूप से जुटाने होंगे.
भौतिक साक्ष्य जुटाने के निर्देश
- प्रवेश-पत्र पर लगी फोटो की जांच की जाए कि वह सुपर इम्पोज या कंप्यूटर एडिटिंग से बदली गई है या नहीं.
- परीक्षा केंद्र के प्रवेश द्वार पर प्रवेश पत्र और परीक्षार्थी के फोटो का मिलान किया गया या नहीं, इसकी जिम्मेदारी तय की जाए.
- उपस्थिति पत्रक और प्रवेश पत्र पर किए गए हस्ताक्षरों का मिलान किया जाए. मिलान न होने की स्थिति में कक्ष निरीक्षक की भूमिका स्पष्ट की जाए.
डिजिटल साक्ष्य पर विशेष जोर
- पोर्टल पर अपलोड की गई मूल फोटो और प्रवेश पत्र पर चस्पा फोटो के मेटाडाटा की जांच की जाए.
- यह देखा जाए कि फोटो किसी एआई टूल या सॉफ्टवेयर से बदली गई है या नहीं.
- सॉल्वर के परीक्षा केंद्र में प्रवेश और कक्ष में बैठने से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखी जाए, जिसे न्यायालय में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके.
कक्ष निरीक्षक और सॉल्वर के बीच पूर्व मिलीभगत की संभावना की भी जांच की जाए.
अनिवार्य चेकलिस्ट लागू
- परिषद ने सभी केंद्रों के लिए एक अनिवार्य चेकलिस्ट भी जारी की है, जिसमें प्रवेश पत्र की जांच, उपस्थिति पत्रक, सीसीटीवी फुटेज, मेटाडाटा जांच, फर्जी पहचान पत्र, संस्थागत रिकॉर्ड, मोबाइल और व्हाट्सएप डेटा तथा मूल छात्र और अभिभावकों की भूमिका की जांच शामिल है.
- केंद्र व्यवस्थापक और सेक्टर मजिस्ट्रेट के लिए विशेष निर्देश
- पकड़े गए सॉल्वर का तत्काल वीडियो बयान दर्ज किया जाए.
- फर्जी आईडी, एडमिट कार्ड और मोबाइल को पुलिस की मौजूदगी में सील किया जाए.
- आरोपी को स्थानीय थाने के सुपुर्द कर एफआईआर दर्ज कराई जाए और उसकी प्रति 24 घंटे के भीतर परिषद को ईमेल किया जाए.
- साक्ष्यों की गोपनीयता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सॉल्वर गैंग के अन्य सदस्य सतर्क होकर फरार न हो सकें.
घटना से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखी जाए.
क्या है वॉटर-टाइट जांच’ का मतलब
वॉटर-टाइट जांच’ का मतलब एक ऐसी जांच से है, जो हर स्तर पर पूरी तरह पुख्ता, सुसंगत और कानूनी रूप से मजबूत हो, ताकि उसमें कोई छेद या कमजोरी न रह जाए. यानी मामला अदालत में जाए तो साक्ष्य इतने मजबूत हों कि आरोपी बच न सके. यह कोई कानूनी शब्द नहीं है, बल्कि प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली में इस्तेमाल होने वाला व्यावहारिक शब्द है.
ये भी पढ़ें -

