WATCH; भक्त प्रह्लाद के गांव में होलिका की अग्निपरीक्षा, धधकते अंगारों के बीच से निकला पंडा
भक्त प्रह्लाद की नगरी से जाना जाता है यह गांव, पंडा परिवारों के एक सदस्य को धधकते अंगारों के बीच से निकलने की मान्यता.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : March 3, 2026 at 9:50 AM IST
|Updated : March 3, 2026 at 2:33 PM IST
मथुरा: जिले के मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर भक्त पहलाद जी की नगरी फालेन गांव में सदियों से एक परंपरा चली आ रही है. जिसको लोग आज तक फॉलो करते आ रहे हैं. आइए जानते हैं क्या है ये रिवाज और कैसे, क्यों किया जाता है निर्वहन?
अंगारों के बीच से निकला पंडा: मथुरा के छाता तहसील क्षेत्र के गांव फालेन जो कि भक्त प्रहलाद की नगरी के नाम से विख्यात है. इस गांव में एक अनोखी परंपरा सदियों से चली आ रही है. पंडा समाज के परिवार से एक सदस्य विशाल होलिका की धड़कती अंगारों के बीच से निकलता है, और उनके शरीर में एक खरोच तक नहीं आती है.
#WATCH | Mathura, UP: Following a very long tradition, a person portraying Prahlad walks through the Holika pyre at Phalen village.
— ANI (@ANI) March 3, 2026
Sanju Panda, who walked into the pyre, says, " ...the preparation for this starts from basant panchami to holika dahan... at that time, attachment… pic.twitter.com/nzBKyciEG5
बता दें, ये दहन सोमवार की देर रात फालेन गांव में किया गया. 20 फीट ऊंची, 30 फुट लंबी होलिका को गांव के लोग साथ मिलकर रखते हैं. सोमवार को शुभ मुहूर्त के बाद पंडा समाज के सदस्य संजू पंडा होलिका दहन अंगारों के बीच से निकले. इसे देखने के लिए हजारों की संख्या में आए श्रद्धालुओं ने भक्त प्रहलाद के जयकारे लगाए.
रास्ता दिखाने के लिए बहन करती है मदद: होलिका दहन के दिन भक्त प्रहलाद की कठोर तपस्या करने के बाद, प्राचीन भक्त प्रहलाद के कुंड में स्नान करने के बाद, होलिका के बीच से निकलने की तैयारी की जाती है. उससे पहले बहन दूध की धार देते हुए होलिका से निकलने का रास्ता देती हैं. उसके बाद होलिका के बीच अंगारों में से निकलकर आना पड़ता है, शरीर पर अग्नि देव कोई हानि नहीं पहुंचने देते हैं.
45 दिन की जाती है कठोर तपस्या: फालेन गांव में होलिका की परंपरा निभाने के लिए पंडा समाज के सदस्य संजू पिछले 2 बार से रिवाज को निभा रहे हैं. भक्त प्रहलाद के प्राचीन मंदिर में कठोर तपस्या 45 दिन की जाती है. तपस्या पर बैठने के लिए एक वक्त का भजन व फलाहार किया जाता है. इस दौरान किसी भी व्यक्ति से मिलना वर्जित होता है. मंदिर परिसर में ही तपस्या पर लीन होना रहता है.
हजारों की संख्या में पहुंचते हैं श्रद्धालु: फालेन गांव की होलिका देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी संख्या में भीड़ यहां पहुंचती है, क्योंकि होलिका के बीच से निकलने वाले पंडा को देखने के लिए, गांव में जिला प्रशासन की तरफ से व्यवस्थाएं की जाती हैं. होलिका दहन के पर्व को लेकर गांव में ढोल, नगाड़े, झांझ, मंजीरा के साथ नाचते हुए श्रद्धालु भी होली का आनंद लेते हैं.
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