यूपी परिवहन विभाग में भर्ती घोटाले पर सीएम योगी सख्त, कंपनियों के खिलाफ जांच और ब्लैकलिस्ट की तैयारी
यूपी परिवहन विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाली कंपनियों के भ्रष्टाचार के खिलाफ सीएम योगी आदित्यनाथ ने जांच का आदेश जारी किया है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : July 6, 2026 at 7:22 PM IST
लखनऊ: पिछले चार माह से परिवहन विभाग की नौकरी से निकाले गए पीड़ित विभाग के चक्कर काट रहे हैं. न्याय मांग रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है. परिवहन विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाली कंपनियों की अंधेरगर्दी की दर्जनों शिकायतें भी परिवहन विभाग के अधिकारियों से लेकर परिवहन मंत्री तक की गई, लेकिन इन शिकायतों का समाधान करने के बजाय ठंडे बस्ते में डाल दिया गया.
जब कहीं से पीड़ितों को न्याय की उम्मीद नजर नहीं आई तो वे सोमवार को सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार में अपनी फरियाद लेकर पहुंचे.
मुख्यमंत्री की सख्ती से हड़कंप: यहां पर मुख्यमंत्री ने उनकी समस्या सुनी और तत्काल अधिकारियों को जांच करने के लिए निर्देशित किया. इसके बाद परिवहन विभाग के अधिकारी जो पीड़ितों की शिकायत सुनने तक को तैयार नहीं थे उनके फोन खुद ही पीड़ितों के पास आने लगे. अब उन्हीं अधिकारियों ने पीड़ितों की शिकायत सुनने के लिए याद किया है. मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद अब पीड़ित बेरोजगारों को न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार में फरियादी तब शिकायत लेकर पहुंचते हैं जब उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं होती है. दौड़ते-दौड़ते थक जाते हैं.
नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी: मुख्यमंत्री के पास पहुंचने के बाद ही उनमें न्याय की उम्मीद जागती है. ऐसा ही परिवहन विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए नौकरी पर रखे गए कर्मचारियों के साथ हुआ. परिवहन विभाग ने ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए जिन तीन कंपनियों सिल्वर टच, फोकॉम डॉट नेट और रोजमार्टा को ठेका दिया, उन कंपनियों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेन्स पॉलिसी लागू करने वाली सरकार में भ्रष्टाचार की इंतिहा कर डाली. प्रदेश भर में तमाम कर्मचारियों को पहले नौकरी के नाम पर पैसा लेकर रखा और इसके बाद मनमानी ढंग से किसी को एक माह तो किसी को दो माह नौकरी करने के बाद बाहर का रास्ता दिखा दिया.

कंपनियों के प्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप: 50 कर्मचारियों को बिना कोई कारण बताए ही नौकरी से हटा दिया गया. कर्मचारी बेरोजगार हुए तो उन्होंने कंपनियों के भ्रष्टाचार की कलई खोल दी. पीड़ितों का आरोप है कि नौकरी पर रखने के नाम पर कंपनियों ने तीन-तीन लाख रुपये वसूले. कार्यालय में लगने वाले उपकरण भी कर्मचारियों से ही खरीदवाए और एक झटके में ही नौकरी से बाहर भी कर दिया, पैसे भी वापस नहीं किए. उल्टा नौकरी के दौरान जो 11,506 रुपये सैलरी दे रहे थे, वह भी महीने में कंपनियों के प्रतिनिधि वापस ले रहे थे.
मुख्यमंत्री योगी ने दिया जांच का आदेश: नौकरी से निकल गए पीड़ित जब कंपनियों के भ्रष्टाचार की शिकायत लेकर परिवहन विभाग पहुंचते हैं तो यहां उन्हें टाल दिया जाता है. सीनियर अधिकारी जूनियर अधिकारियों के पास भेज देते हैं और जूनियर अधिकारी आश्वासन की घुट्टी पिलाकर पीड़ितों को वापस घर भेज देते हैं. यह सिलसिला पिछले कई माह से चल रहा है. जब पीड़ितों को महसूस हुआ कि अब उनकी सुनवाई परिवहन विभाग में नहीं होगी तो वह सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार में पहुंचे. यहां पर पीड़ितों ने अपनी आपबीती मुख्यमंत्री को सुनाई जिसके बाद सख्त लहजे में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए और दोषी कंपनियों पर कार्रवाई हो तथा पीड़ितों को न्याय दिया जाए.

जांच शुरू होने से जगी आस: इसके बाद विभाग में खलबली मच गई, आनन-फानन में वही अधिकारी जो पीड़ितों से मिलने तक से कतरा रहे थे, वही वापस फोन कर दफ्तर में मिलने के लिए बुलाने लगे. अब पीड़ितों की सुनवाई शुरू हुई है और मामले की जांच भी गंभीरता से शुरू करने की बात कही गई है. नौकरी से निकाले गए पीड़ितों ने अपना दर्द बयां किया. रायबरेली में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद से हटाए गए पीड़ित अखिलेश का कहना है कि समस्या के समाधान के लिए लगातार परिवहन विभाग के अधिकारियों के कई माह से चक्कर काटते रहे, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई. झूठी दिलासा अधिकारी देते रहे. थक हारकर जब मुख्यमंत्री के जनता दरबार में पहुंचे तो वहां पर अब आस जागी है कि न्याय मिलेगा.
लाखों की घूस और उपकरण खरीद के बिल: भ्रष्टाचार फैला रही कंपनियां ब्लैकलिस्ट होंगी और हमें हमारी नौकरी वापस मिलेगी. रायबरेली में ही डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर नौकरी करने वाले अनुज को बिना बताए ही नौकरी से हटा दिया गया. पीड़ित अनुज ने जनता दरबार में मुख्यमंत्री को अपनी व्यथा सुनाई तो मुख्यमंत्री ने भी उन्हें भरोसा दिया कि जो भी कंपनियां गलत कर रही हैं, उनकी जांच कराई जाएगी और न्याय मिलेगा. अनुज का कहना है कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद हमें उम्मीद है कि अब हम लोगों को नौकरी वापस मिलेगी और कंपनी ब्लैकलिस्ट होगी. उनका कहना है कि कंपनियां मानकों का उल्लंघन कर रही हैं, तय संख्या से ज्यादा भर्तियां की गईं, जिससे कमाई की जा सके. सभी से तीन लाख से लेकर पांच लाख रुपये लिए गए हैं, अभी रोजमार्टा कंपनी ने 15 नई भर्ती की हैं. यह सब कंपनियां बहुत गलत कर रही हैं, अब जांच में सब सामने आ जाएगा.

परिवहन मंत्री ने दिया कार्रवाई का आश्वासन: पीड़ित नीरज यादव का कहना है कि मुझे कंपनी ने कानपुर में नौकरी पर रखा था. ढाई लाख रुपये भर्ती के नाम पर लिए गए और वहां पर कंप्यूटर से लेकर सीपीयू और अन्य उपकरण खरीद कर लगाने के लिए कहा गया जिसका मेरे पास बिल भी है. सारे बिल और दस्तावेज जनता दरबार में मुख्यमंत्री को सौंप दिए हैं. इन कंपनियों ने परिवहन विभाग में बहुत भ्रष्टाचार फैलाया है, अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्ती दिखाई है तो अब गंभीरता से जांच होगी तो हमें जरूर न्याय मिलेगा. उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दया शंकर सिंह से जब सवाल किया गया कि आखिर कंपनियों ने इतना भ्रष्टाचार फैलाया तो फिर गंभीरता से जांच क्यों नहीं की जा रही है? इस पर परिवहन मंत्री ने कहा कि निश्चित तौर पर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएंगे, जो भी रिपोर्ट आएगी, कार्रवाई होगी. अगर कंपनियां जिम्मेदार होंगी तो ब्लैकलिस्ट करेंगे और नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों को नौकरी पर वापस लिया जाएगा.
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