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यूपी का सबसे महंगा मुर्गा कड़कनाथ, कीमत दोगुनी-खूबियां 4 गुनी; डिमांड आसमानी...

कई खूबियों के कारण देश के कई राज्यों में इस मुर्गे की बंपर डिमांड, आगरा समेत कई जिलों में पालन शुरू हुआ.

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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : November 6, 2025 at 12:50 PM IST

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Updated : November 6, 2025 at 1:01 PM IST

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कानपुर: देश भर के कई राज्यों में बंपर डिमांड वाले कड़कनाथ मुर्गे ने यूपी में भी तहलका मचाना शुरू कर दिया है. यूपी के कई जिलों में इस मुर्गे का पालन शुरू हो गया है. अपने सुर्ख काले रंग और खास नाम कड़कनाथ की वजह से नॉनवेज प्रेमियों में यह मुर्गा बेहद लोकप्रिय है. यही नहीं बाजार में इसके एक अंडे की कीमत भी सामान्य मुर्गे के अंडे से ज्यादा है. वहीं, कीमत के मामले में भी इस मुर्गे ने यूपी के सभी प्रजातियों के मुर्गों को पीछे छोड़ दिया है. इस मुर्गे का प्रदर्शन बुधवार को सीएसए विश्वविद्यालय में किया गया. चलिए जानते हैं इससे जुड़ी खास जानकारी के बारे में.


किस राज्य से मुर्गे का कनेक्शन: सीएसए विश्वविद्यालय में कड़कनाथ मुर्गे को प्रदर्शित करने वाले डॉ. ब्रजपाल सिंह ने बताया कि इस मुर्गे का संबंध मध्यप्रदेश के झाबुआ और धार जिले से है. पहली बार इस मुर्गे का पालन इन्हीं जिलों में शुरू हुआ था. अपने सुर्ख काले रंग के कारण यह मुर्गा बेहद चर्चा में रहा. यह मुर्गे की एक जंगली नस्ल है. इस मुर्गे का नाम कड़कनाथ पूरे देश में चर्चा का विषय है. हालांकि अभी तक यह सामने नहीं आया है कि आखिर इस मुर्गे का नाम कड़कनाथ कैसे पड़ा?


रंग रूप कैसा है: इस मुर्गे के सिर से लेकर पैर तक का हिस्सा पूरा काला है. इसके पर भी काले रंग के हैं. यह नहीं इसकी कलगी भी पूरी तरह से काली है. एक सामान्य मुर्गे से यह पूरी तरह से अलग रंग का दिखता है. इसके काले रंग की वजह इसमें आयरन की अधिकता बताई जाती है. यह मुर्गा तीन रंगों में पाया जाता है. इसमें जेट ब्लैक, गोल्डन, पेंसिल्ड (धारीदार) रंग शामिल हैं.

यह बोले सीएसएस के डॉक्टर. (etv bharat)


मुर्गे की खूबियां: पहली बार यह मुर्गा कोरोना काल में चर्चा में आया था. उस दौर में दावा किया गया था कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में यह मुर्गा बेहद मददगार है. हालांकि इस दावे की कोई प्रमाणिकता सामने नहीं आई थी. दावा किया गया था कि इसमें विटामिन बी1, बी2, बी6, बी12, ई, नियासिन, कैल्शियम मिलता है. इसके साथ ही यह हार्ट से संबंधित रोगों समेत कई रोगों के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है. हालांकि अभी तक किसी मेडिकल रिसर्च में इस दावे की पुष्टि नहीं की गई है. कोरोनाकाल से इस मुर्गे का नाम ऐसा चर्चा में आया कि यह देश के साथ ही दुनिया के आकर्षण का केंद्र बन गया.

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एक नजर. (etv bharat gfx)
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कीमतों पर एक नजर. (etv bharat gfx)
अंडे की कीमत: इसका अंडा सामान्य अंडे की तुलना में छोटा होता है. इसमें गहरे रंग की जर्दी होती है और यह उच्च प्रोटीन और कम वसा के लिए जाना जाता है. इसके अंडे हल्के भूरे, क्रीम रंग रंग के होते हैं. एक सामान्य मुर्गी के अंडे की कीमत 10-15 रुपए के आसपास होती है. इसके एक अंडे के वजन करीब 50 से 58 ग्राम होता है. वहीं, कड़कनाथ नस्ल की मुर्गी के अंडे की कीमत 15-20 या इससे अधिक भी बताई जाती है. दावा किया जाता है कि इसमें सामान्य मुर्गी के अंडे की तुलना में 25 फीसदी तक अधिक प्रोटीन पाया जाता है. इस वजह से इसका अंडा इतना महंगा बिकता है. हालांकि इस दावे की प्रमाणिकता अभी तक सामने नहीं आई है. इसके अंडों का ज्यादातर इस्तेमाल मुर्गी पालन के लिए होता है. अंडो से निकले इसके चूजों की बाजार में काफी डिमांड है.
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आखिर कड़कनाथ इतना महंगा क्यों? (etv bharat gfx)
मुर्गे की कीमत-वजन: इस मुर्गे की कीमत खुले बाजार में 800 से 1000 रुपए तक है. वहीं एक सामान्य मुर्गे की कीमत 400 से 500 रुपए तक होती है. बताया जाता है कि इसकी ऊंची कीमतों की वजह इसकी बाजार में उपलब्धता कम होना है. हालांकि यूपी में अब इसका पालन शुरू हो गया है. इस मुर्गे का वजन 2.50 से 3 किलो तक होता है. यह मुर्गा वजन के मामले में सामान्य मुर्गों जैसा ही होता है.
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सीएसए विश्वविद्यालय के किसान मेले में प्रदर्शित किया गया कड़कनाथ. (etv bharat)
कितने दिन में तैयार होता: सीएसए विश्वविद्यालय के डॉ. ब्रजपाल सिंह ने बताया कि यह मुर्गा 40 से 42 दिनों में तैयार होता है. इसकी कीमत बाजार में काफी अच्छी है. सीएसए विश्वविद्यालय में भी इसका पालन किया जा रहा है. किसान इस मुर्गे के पालन को लेकर बेहद उत्साहित हैं. उन्होंने बताया कि आगरा, लखनऊ, मेरठ में अभी इसका पालन शुरू हो गया है. किसान बड़ी संख्या में इस संबंध में जानकारी जुटा रहे हैं. सीएसए में किसान मेले के दौरान गिनी फाउल समेत अन्य पोल्ट्री का भी प्रदर्शन किया गया. इस दौरान मुख्य अतिथि उप्र कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के महानिदेशक डा. संजय सिंह, कुलपति के. विजयेंद्र पांडियन मौजूद रहे.

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Last Updated : November 6, 2025 at 1:01 PM IST