जब बारिश बिगाड़े राह, तपस्या दिखाए नई राह; यूपी की 11वीं की छात्रा की ये छोटी सी तकनीक, बड़े हादसों का करेगी अंत
मेरठ की तपस्या का मॉडल राष्ट्रीय मंच पर होगा प्रदर्शित, इसके पहले भी प्रतियोगिता में आई थी प्रथम.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : November 10, 2025 at 5:10 PM IST
|Updated : November 10, 2025 at 5:32 PM IST
मेरठ: मेरठ के बुढ़ाना गेट स्थित सनातन धर्म स्कूल की छात्रा तपस्या जिन्होंने सच में अपनी लगन और तपस्या से एक ऐसी टेक्नोलॉजी बनाई है जिससे उन्हें अब नेशनल लेवल के आयोजन में बुलाया गया है.
बता दें तपस्या को आगामी दिनों में मध्य प्रदेश के भोपाल में होने वाली राष्ट्रीय बाल विज्ञान प्रतियोगिता में शामिल होने का न्योता मिला है. तपस्या कक्षा 11वीं की छात्रा है लेकिन इनका आई क्यू लेवल और सोचने समझने की शक्ति गजब की है.
राष्ट्रीय स्तर पर चयन: तपस्या को बीते साल ये जानकारी हुई कि अगर किसी स्टूडेंट के पास कुछ अलग और अनूठा करने का विचार है, तो राज्य स्तर पर अयोध्या में ऐसे स्टूडेंट अपना हुनर दिखा सकते हैं. जिसके बाद यूपी बोर्ड की इस होनहार छात्रा ने अंडर पास में बारिश के सीजन में जल भराव की वजह से होने वाली घटनाओं पर नकेल कैसे लगाई जाए. इस प्रोजेक्ट पर काम किया. उन्होंने खास मॉडल तैयार किया और उसके बाद उन्हें प्रदेश लेवल पर अयोध्या में बीते साल आयोजित हुई प्रतियोगिता में सराहना भी मिली उन्हें सम्मानित भी किया गया.
भोपाल में आयोजन: अब देश भर के ऐसे बच्चों के बनाए मॉडल जो कि अपने मौलिक और अनूठे प्रयास की वजह से चुने गए थे, उन्हें नेशनल स्तर के आयोजन से बुलावा आया है. जिसको लेकर भोपाल में 18 से 23 नवंबर तक राष्ट्रीय बाल विज्ञान, साइंस प्रदर्शनी में शामिल होने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने मेरठ की छात्रा तपस्या को न्योता भेजा है.

परिवार के लिए गर्व का पल: उनके पिता ऑटो चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं. मां हाउस वाइफ हैं. फिलहाल परिवार के लोग बेहद उत्साहित हैं कि उनकी बेटी को नेशनल लेवल पर एक समस्या का समाधान खोजने के लिए चुना गया है.
तपस्या ने ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान बताया कि अपने खास मॉडल को उन्होंने "अंडरपास वाटर लेवल इंडिकेटर" नाम दिया है. जिसमें एक महत्वपूर्ण समस्या का समाधान खोजकर उसका प्रोटोटाइप तैयार किया है. छात्रा का कहना है कि बीते साल हरियाणा के फरीदाबाद समेत और भी कई शहरों में अंडरपास में अचानक गाड़ी के डूबने से कई लोगों की जानें चली गई थी. इसी वजह से उन्होंने इस तरह की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से काम किया.

अंडरपास वाटर लेवल इंडिकेटर ऐसे करेगा काम: उन्होंने बताया, उनके मॉडल में तकनीकी का इस्तेमाल करके जिस तरह से सिग्नल के लिए लाल, हरा और पीले लाइट का इस्तेमाल किया जाता है, ठीक उसी तरह अलग-अलग लेवल पर अलग तरह के लाइट से ये संकेत मिल जाएगा, कि इसे अंडर पास में निकाला जा सकता है या नहीं. अगर पानी बेहद ही कम होगा जिसमें से निकल कर जाने में वाहन चालक को कोई समस्या नहीं होगी, तो ग्रीन लाईट का संकेत मिल जाएगा. अगर पानी कुछ ज्यादा है, जहां से दोपहिया वाहन चालक को दिक्कत हो सकती है, या कार चालक या बड़े वाहन निकल सकते हैं तो वहां पीली लाइट से पता चल जाएगा. इसी प्रकार अगर स्थिति खराब है, तो फिर वहां रेड सिग्नल से कोई भी ये समझ सकेगा कि अंडर पास में पानी ज्यादा है, ऐसे में वहां जाना जोखिम भरा होगा और कोई भी जागरूक व्यक्ति फिर उस अंडर पास में प्रवेश न करके अन्य मार्ग से जा सकता है.
वहीं स्कूल की साइंस टीचर शिल्पा ने बताया कि स्कूल के लिए ही नहीं जिले के लिए भी ये गर्व की बात है कि तपस्या के खास मॉडल से ऐसी दुर्घटनाओं पर नकेल कसी जा सकती है. वहीं स्कूल की प्रिंसिपल मन मोहिनी बताती हैं, मॉडल के लिए चुने गए होनहारों में यूपी से सिर्फ 12 स्टूडेंट ही भोपाल में नेशनल प्रदर्शनी में बुलाए गए हैं. पिछले साल जब राज्य स्तर पर विज्ञान प्रदर्शनी में छात्रों को अपने हुनर को प्रदर्शित करके कुछ नया करने का अवसर मिला था तो तपस्या वहां प्रथम आई थीं, जबकि हजारों की संख्या में वहां देश भर से होनहार छात्रों ने प्रतिभाग किया था और हर कोई अपने आइडिया के साथ वहां गया था.
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