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4 साल में 30 करोड़ श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में लगाई हाजिरी, 60000 करोड़ का आर्थिक विकास

युवाओं में बढ़ी आस्था, बाबा विश्वनाथ के दरबार में 40% भक्त युवा.

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देश-विदेश से श्रद्धालु-पर्यटकों का जमावड़ा, काशी का बढ़ा कारोबार. (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : June 1, 2026 at 3:50 PM IST

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वाराणसी: बाबा विश्वनाथ का दरबार जब भव्य नए कॉरिडोर के रूप में तैयार हुआ तो वाराणसी में देश दुनिया से बड़ी संख्या में पर्यटकों का आगमन हुआ. यहां आने वाले श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई और काशी का भ्रमण किया. इसका परिणाम यह रहा, काशी पर्यटन के एक बड़े केंद्र के रूप में विश्व पटल पर स्थापित हुई और यहां के लोगों के जीविकोपार्जन में बड़ा बदलाव आया. आंकड़े देखे तो बीते 4 साल में लगभग 30 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई है, जिसने काशी को 60000 करोड़ से ज्यादा का कारोबार दिया है. बड़ी बात ये है कि दरबार में आने वाले भक्तों में 40 फ़ीसदी युवाओं की संख्या है.

शंभू शरण, SDM विश्वनाथ मंदिर. (Video Credit; ETV Bharat)

गौरतलब हो, बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर जिसका लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. बता दें कि कोरोना के बाद काशी की पर्यटन व्यवस्था पूरी तरीके से धराशाही हो गई थी लेकिन, बाबा विश्वनाथ के दरबार में यहां पर रिलिजियस टूरिज्म का एक नया चैप्टर शुरू किया, इसके तहत बड़ी संख्या में लोग बनारस आने लगे. आंकड़े देखे तो हर दिन लगभग 1.5 लाख से ज्यादा श्रद्धालु काशी जाकर बाबा विश्वनाथ के दरबार में दर्शन करते हैं और वीकेंड में संख्या 2 से 3 लाख तक पहुंच जाती है. काशी आने वाले श्रद्धालु बाबा के दरबार से बनारस के घाटों का भ्रमण करते हैं. यहां के जायकों का स्वाद लेते हैं. यहां के हस्तशिल्प कला को देखते हैं जिसका परिणाम है कि काशी के लोगों को बड़ी संख्या में कारोबार भी मिल रहा है.

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बाबा विश्वनाथ का दरबार. (Photo Credit; ETV Bharat)

4 साल में 30 करोड़ भक्तों ने किया दर्शन: बाबा विश्वनाथ के दरबार ने किस तरीके से काशी की सोशियो इकोनामिक तस्वीर को बदला है. इसको लेकर के ईटीवी भारत ने काशी विश्वनाथ मंदिर के एसडीएम शंभू शरण से खास बातचीत की. SDM ने बताया, काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद बनारस की तस्वीर में बड़े बदलाव देखने को मिले. लगभग 4 साल में यहां के सामाजिक आर्थिक पहलू का एक पुनर्जागरण दिखाई दिया है.

यदि हम आंकड़े को देखें तो 4 साल में 30 करोड़ से ज्यादा पर्यटक बाबा विश्वनाथ के दरबार आए हैं, जिनके आने से काशी में पर्यटन का एक बड़ा केंद्र तैयार हुआ है. भारत सरकार के आंकड़े को देखें तो यहां आने वाला हर व्यक्ति रहने, खाने, घूमने में लगभग ₹5000 खर्च करता है. अगर इसे हम 2000 भी मानकर देखें तो 30 करोड़ लोगों ने लगभग 60000 करोड़ रुपए का कारोबार बनारस को दिया है.

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खास बात ये है कि, ये कारोबार किसी बड़े उद्योगपति को नहीं बल्कि बड़े से लेकर के मध्यमवर्गीय, निम्न वर्गीय हर प्रकार के व्यक्ति तक पहुंचा है, जिसमें बड़े होटल कारोबारी, साड़ी कारोबारी, माला फूल बेचने वाला, छोटी दुकानों वाले, गाड़ी-ऑटो रिक्शा चलाने वाले भी शामिल हैं. काशी में पर्यटकों के आगमन ने यहां के लोगों की आर्थिक स्थिति में एक बड़ा परिवर्तन किया है.

युवाओं की धर्म के प्रति बढ़ी है रुचि: काशी विश्वनाथ मंदिर के एसडीएम ने बताया, बड़ी बात यह है कि अब युवा भी आध्यात्म की ओर बढ़ रहे हैं, काशी के रिलिजियस टूरिज्म में युवाओं की भागीदारी भी बढ़-चढ़कर के देखने को मिली है. यदि हम दरबार में दर्शन करने आने वाले भक्तों के आंकड़े को देखें तो हर दिन लगभग डेढ़ लाख की संख्या में भक्त आते हैं. वीकेंड में यह संख्या 1.5 से 3 लाख और विशेष मौके पर 8 से 10 लाख तक पहुंचती है. इनमें से 40 फ़ीसदी युवा होते हैं. अलग-अलग विशेष मौकों पर भी युवाओं की बड़ी भीड़ दिखाई देती है जो इस बात को बताती है कि वर्तमान समय में युवा किस तरीके से सनातन संस्कृति की ओर बढ़ रहा है और एक धार्मिक बदलाव को भी परिलक्षित कर रहा है.

बाबा विश्वनाथ की 5 बार होती है आरती: SDM शंभू ने बताया कि भारत ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग बाबा के दरबार आते हैं. बीते साल 132 देश से अलग-अलग श्रद्धालुओं-पर्यटकों ने बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई थी. बाबा विश्वनाथ की प्रतिदिन 5 आरती होती है. सुबह मंगल आरती, दोपहर 11:20 बजे से बाबा की श्रृंगार भोग आरती, शाम 7:20 से बाबा की सप्त ऋषि आरती, रात में 8:00 से बाबा की रात्रि श्रृंगार भोग आरती और रात तकरीबन 10:30 बजे उनकी शयन आरती की जाती है. उन्होंने बताया, आरती के समय भी बाबा के दर्शन की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है.

9 करोड़ से ज्यादा लोगों ने नंदी से पूछा सवाल: शंभू ने कहा कि जिन दर्शनार्थियों के पास समय का अभाव है और वह लंबी कतारों से बचना चाहते हैं, उनके लिए टिकट के माध्यम से सुगम दर्शन की व्यवस्था की गई है. सुगम दर्शन टिकट की राशि अन्य मंदिरों की तुलना में बेहद कम है. 300 की राशि प्रदान करके कोई भी भक्त सुगम दर्शन टिकट ले सकता है और लंबी कारों से इतर एक अलग पंक्ति में रहकर के जल्दी बाबा का दर्शन प्राप्त कर सकता है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि स्पर्श दर्शन या वीआईपी मंगला आरती दर्शन करने की बात को लेकर के कई बार यात्रियों के साथ ठगी या फिर उन्हें भ्रमित करने जैसी सूचना आती है. तो ये सभी श्रद्धालुओं के लिए स्पष्ट है कि हमारे यहां स्पर्श दर्शन के लिए किसी भी प्रकार के टिकट की व्यवस्था नहीं है.

स्पर्श दर्शन के लिए नहीं होती टिकट की व्यवस्था: उन्होंने कहा, यदि कोई आप से मंगला आरती स्पर्श दर्शन के नाम पर टिकट की बात करता है या पैसे लेता है, तो तुरंत आपको यह समझने की जरूरत है कि वह ठगी किस्म का व्यक्ति है और आपको तुरंत उससे दूर जाना चाहिए, फिर भी यदि कोई दिक्कत होती है तो वह मंदिर के वेबसाइट, एप्लीकेशन पर जाकर के आस्क नंदी चैटवॉल पर अपने सवाल को पूछ सकता है. सभी श्रद्धालुओं को अनुसार उत्तर मिल जाते हैं. एक आंकड़े देखे तो अब तक साढ़े 9 करोड़ से ज्यादा प्रश्न नंदी चैट वॉल पर पूछे गए हैं और यहां लोग बिना किसी झिझक परेशानी के अपने सवालों का उत्तर भी प्राप्त कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि यदि किसी भक्त को किसी प्रकार की कोई दिक्कत होती है तो वह मंदिर के वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन टिकट भी बुक कर सकता है और अपनी समस्याओं को बता सकता है.

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