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यूपी के निर्यातकों का सबसे बड़े मेला, निर्यात में भारत क्यों बहुत मजबूत, जानिए

आगरा में उत्तर प्रदेश एमएसएमई निर्यात सम्मेलन का शुभांरभ, 300 निर्यातकों ने रखे लक्ष्य और उपलब्धियां.

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यूपी के निर्यातकों का सबसे बड़े मेला. (Uttar Pradesh MSME Export Conference Media Cell)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : January 10, 2026 at 7:40 AM IST

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Updated : January 10, 2026 at 7:58 AM IST

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आगरा: आगरा में आयोजित दो दिवसीय उत्तर प्रदेश एमएसएमई निर्यात सम्मेलन 2026 में शुक्रवार को पहले दिन एक्सपोर्ट पर मंथन किया गया. इसमें वक्ताओं ने कहा कि जब उद्योगों को नीति का मार्गदर्शन, तकनीक का साथ और उद्यमिता का आत्मविश्वास मिलता है, तब निर्यात राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बनता है. यही सोच उत्तर प्रदेश एमएसएमई निर्यात सम्मेलन 2026 की है. जिसमें वैश्विक बाजारों की ओर बढ़ते भारत की नई तस्वीर प्रस्तुत की.


300 निर्यातक हुए शामिल: इस सम्मेलन ने उत्तर प्रदेश के उद्यमियों को वैश्विक मंच के लिए तैयार करने का स्पष्ट रोडमैप रखा. पहले दिन सम्मेलन में आगरा, हाथरस, अलीगढ़, फिरोजाबाद, मैनपुरी समेत सात जिलों के 300 से अधिक निर्यात उद्यमियों की सक्रिय सहभागिता रही. जिससे आगरा एक बार फिर वैश्विक निर्यात संवाद के केंद्र के रूप में उभरा.

सम्मेलन की क्या थीम थी: बता दें कि आगरा में दो दिवसीय उत्तर प्रदेश (एमएसएमई) निर्यात सम्मेलन 2026 का शुभारंभ उप्र लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष एवं आयोजन समिति के संरक्षक राकेश गर्ग, चमड़ा एवं फुटवियर उद्योग परिषद के अध्यक्ष एवं आयोजन समिति के चेयरमैन पूरन डावर, मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह, संयुक्त आयुक्त उद्योग अनुज कुमार ने किया. सम्मेलन की थीम “वैश्विक भविष्य के लिए भारत व उत्तर प्रदेश के निर्यात को सशक्त बनाना” है.


कृषि से खुशहाली तो उद्योगों से समृद्धि: उप्र लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष एवं आयोजन समिति के संरक्षक राकेश गर्ग ने कहा कि भारत यूं ही सदियों तक सोने की चिड़िया नहीं बना रहा, बल्कि यहां से विश्वभर में निर्यात होता रहा है. ब्रिटिश काल के कारण बीच में देश कमजोर अवश्य हुआ, परंतु आज भारत फिर से वैश्विक मंच पर सशक्त रूप में उभर रहा है. कृषि से खुशहाली आती है, लेकिन समृद्धि उद्योगों से आती है.


भारत बड़ा निर्यातक: उन्होंने कहा कि आज भारत 145 करोड़ की आबादी वाला विशाल बाजार है. विश्व में 200 से अधिक देश ऐसे हैं, जहां भारतीय समुदाय मौजूद है. जहां-जहां भारतीय हैं. वहां भारतीय उत्पादों और उद्योगों की असीम संभावनाएं हैं. अमेरिका जैसे अन्य देशों में टैरिफ की चुनौतियां भले सामने हों, परंतु हमें भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है. केंद्र एवं प्रदेश सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लगातार योजनाएं बना रही हैं. जिसमें उद्योग विभाग की ओर से इंडस्ट्रीज फैसिलिटी सेंटर की स्थापना हो रही है. उद्यमियों को सिंगल विंडो पर सभी सुविधाएं उपलब्ध हो सकें. भारत के डीएनए में ही उद्यमिता और जोखिम लेने का साहस है. आवश्यकता है कि हम इसी गुण को निर्यात के क्षेत्र में और अधिक आगे बढ़ाएं.




निर्यात बढ़ाना आज की आवश्यकता: आगरा मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है. जिससे हमारा भविष्य और भी उज्ज्वल है. कुछ देशों की दादागिरी के कारण हमें भयभीत होने की जरूरत नहीं है. यदि निर्यात नहीं बढ़ेगा तो रुपये की स्थिरता बनाए रखना कठिन हो जाएगा. भारत एक युवा देश है और युवा उद्यमियों को सही मार्गदर्शन देने के लिए ऐसे आयोजन मील का पत्थर साबित होंगे. केंद्र और राज्य सरकार मिलकर लगातार प्रदेश में एक्सप्रेस-वे नेटवर्क का विस्तार, उद्योगों के लिए भूमि आवंटन की सरल प्रक्रिया और सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से अनुमतियां उपलब्ध कराई जा रही हैं.



निर्यात अर्थव्यवस्था की रीढ़: उप्र उद्योग विभाग के संयुक्त आयुक्त उद्योग अनुज कुमार ने कहा कि निर्यात किसी भी देश या प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. प्रदेश सरकार की ओर से एमएसएमई एक्सपोर्ट प्रमोशन विभाग का गठन किया है, ताकि उद्यमियों को अधिकतम लाभ मिल सके. यूपी सरकार ने 2025–30 निर्यात नीति जारी की है. जिसमें कई नई योजनाएं शामिल की हैं. फ्रेट सब्सिडी दोगुनी की है. छोटे उद्यमियों के लिए प्रति इकाई 30 लाख रुपये तक सब्सिडी का प्रावधान है. निर्यातकों को विदेशी प्रदर्शनियों एवं मेलों में भाग लेने के लिए सब्सिडी दी जा रही है. जिसका लाभ एक वर्ष में अधिकतम तीन बार लिया जा सकता है. कोरियर भेजने, ईसीजीसी प्रीमियम तथा निर्यात इंसेंटिव पर भी पहली बार सब्सिडी दी जा रही है. ओडीओपी योजना के तहत प्रदेश सरकार ने योजनाओं का पूरा पैकेज उद्यमियों को उपलब्ध कराया है.

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यूपी के निर्यातकों के सम्मेलन का उद्घाटन. (Uttar Pradesh MSME Export Conference Media Cell)



क्या है लक्ष्य: पूर्व प्रोग्राम कन्वीनर मनीष अग्रवाल रावी ने बताया कि कहा कि सम्मेलन का लक्ष्य उद्यमियों को वैश्विक बाजारों से जोड़ना, उनकी सोच को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक विस्तारित करना और उत्तर प्रदेश को निर्यात के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है. पूरन डावर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जहां जापान और जर्मनी जैसे देशों की ग्रोथ रेट धीमी हुई है, वहीं भारत लगातार आगे बढ़ रहा है. विश्व में सर्वाधिक स्टार्टअप भारत में हैं और घरेलू उपयोग के अधिकांश उत्पादों में निर्यात की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं. डायरेक्टर एमएसएमई-डीएफओ आगरा वीके वर्मा ने एमएसएमई से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी.




कई उद्योगों से आए सुझाव: सम्मेलन में फिरोजाबाद से आए ग्लास उद्योगपति राजेंद्र गुप्ता ने ग्लास निर्यात 600–650 करोड़ रुपये का है, परंतु टेस्टिंग लैब और हैंडीक्राफ्ट वर्कर ट्रेनिंग सेंटर की भारी कमी है. सरकार सुविधाएं प्रदान करे तो यह उद्योग तेज गति से आगे बढ़ेगा. सर्राफा कारोबारी नितेश अग्रवाल ने कहा कि आगरा से चांदी की देशभर में सर्वाधिक आपूर्ति होती है. इस सेक्टर में निर्यात की अपार संभावनाएं हैं. आने वाले 4–5 वर्षों में चांदी कारोबार निर्यात में बड़ी छलांग लगाएगा. लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय सचिव दीपक अग्रवाल ने कहा कि आगरा से फुटवियर के साथ-साथ लेदर पर्स, बैग, जैकेट, मसाले आदि उत्पादों के निर्यात की बड़ी संभावनाएं हैं. यूरोप और मिडिल ईस्ट में इनकी भारी मांग है.



इन्हें किया सम्मानित: सम्मेलन में एमएसएमई ग्रोथ कैटेलिस्ट अवॉर्ड 2026 के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण, मशीनरी, सराफा, पैकेजिंग सहित विभिन्न उद्योगों से जुड़े उत्कृष्ट उद्यमियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विष्णु कुमार, नितिन गोयल, मनीष मित्तल, रोहित बंसल, अशोक कुमार, मयंक जैन, अंकुर गोयल, विकास आनंद एवं शुभम अग्रवाल को यह सम्मान प्रदान किया गया.




एमएसएमई निर्यात के लिए AI टूल्स बने गेम चेंजर: सम्मेलन में सीएम रूपल गर्ग ने कहा कि वैश्विक मंच पर पारंपरिक तरीकों से ग्राहक ढूंढना आज भी सही है, किंतु वर्तमान समय में वह उतना प्रभावी नहीं रह गया है. बदलते दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक पर्सनल असिस्टेंट की तरह कार्य करके निर्यातकों की बड़ी सहायता कर रहा है. चैट जीपीटी, ग्रो एवं पर्पलेक्सिटी जैसे एआई टूल्स अत्यंत प्रभावी हैं, लेकिन इनका वास्तविक लाभ तभी प्राप्त किया जा सकता है जब इनसे स्पष्ट, सटीक और उद्देश्यपूर्ण प्रश्न पूछे जाएं. एआई टूल्स की सहायता से किसी भी विदेशी या घरेलू कंपनी की क्रेडिट वैल्यू, व्यापारिक साख एवं पृष्ठभूमि की जानकारी प्राप्त की जा सकती है, जिससे निर्यात में जोखिम को कम हो जाएगा.

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Last Updated : January 10, 2026 at 7:58 AM IST