जानिये कौन हैं यूपी कैडर की IPS अपर्णा कुमार? माउंट एवरेस्ट पर लहराया तिरंगा, नई पीढ़ी को दी खास एडवाइस
वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अपर्णा कुमार को लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में मिली है बड़ी जिम्मेदारी.


By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : March 3, 2026 at 9:17 PM IST
|Updated : March 3, 2026 at 11:11 PM IST
रिपोर्ट : आलोक त्रिपाठी
लखनऊ : वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अपर्णा कुमार उत्तर प्रदेश की पहली महिला पुलिस अधिकारी हैं, जिन्होंने अत्यंत कठिन पर्वतारोहण अभियानों में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. 2002 बैच की आईपीएस अफसर अपर्णा कुमार दृढ़ इच्छाशक्ति और साहस की मिसाल हैं. उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर फतह हासिल की है. यही नहीं उन्होंने सात महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा लहराया है. वह नार्थपोल की यात्रा भी कर चुकी हैं. उनकी ख्याति पर्वतारोहण के साथ ही एक सफल पुलिस प्रशासनिक अफसर के रूप में भी रही है. अपर्णा कुमार का व्यक्तित्व प्रशासनिक दृढ़ता, साहस और प्रेरणा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए वह युवाओं और खासकर महिलाओं के लिए रोल मॉडल भी हैं. वर्तमान में वह संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) का कार्यभार देख रही हैं. हमने उनसे खास बातचीत की. महिला दिवस (8 मार्च) पर ईटीवी भारत एक खास सीरीज शुरू कर रहा है, यह साक्षात्कार उसी की कड़ी है. पेश हैं साक्षात्कार के प्रमुख अंश...
प्रश्न : आईपीएस अधिकारी बनने और पर्वतारोहण जैसे कठिन क्षेत्र में आने की प्रेरणा आपको कहां से मिली?
उत्तर : जब मेरा चयन आईपीएस में हुआ और उत्तर प्रदेश कैडर मिला, उसके बाद ही काम के दौरान मुझे पर्वतारोहण का शौक शुरू हुआ. मैं कमांडेंट थी, 9वीं बटालियन पीएसी मुरादाबाद में, पहले इसे स्पेशल पुलिस फोर्सेज के नाम से जाना जाता था, उसी समय से मेरी यह यात्रा शुरू हुई.

प्रश्न : पुलिस सेवा की व्यस्तता के बीच पर्वतारोहण जैसे चुनौतीपूर्ण शौक को कैसे संतुलित करती हैं?
उत्तर : उत्तराखंड में भारत-तिब्बत-चीन सीमा क्षेत्र में तैनाती के दौरान बटालियन के टेंट्स, उपकरण और गियर आदि देखकर मेरा शौक जागा. वह दुर्गम क्षेत्र था. वहां तैनात मेरे सहयोगी और स्टॉफ पुराने समय की काफी कहानियां बताते थे कि पहले लोग कैसे चलते थे, कितना कठिन था यहां का जीवन. इसके बाद 2013-14 में कमांडेंट रहते हुए मैंने मनाली में अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मांउंटेनरिंग एंड स्कींग से एक महीने का पर्वतारोहण का बेसिक कोर्स किया. 2014 में मैंने एडवांस मांटेनरिंग कोर्स भी किया. उसी से मेरी यह यात्रा बढ़ी. यूपी पुलिस और शासन ने भी मेरा भरपूर साथ ही नहीं, प्रोत्साहन भी दिया और मैं यह कर सकी.

प्रश्न : माउंट एवरेस्ट अभियान का आपका सबसे कठिन और यादगार अनुभव क्या रहा?
उत्तर : सबसे रोचक, डरावना और सीख भरा मेरा अनुभव 2014-15 का है, जब मैं एवरेस्ट पर चढ़ने गई थी और एक बड़ा हिमस्खलन हो गया था नेपाल की ओर, जिसमें 17 लोग मर गए थे. 2015 में जब मैं तिब्बत की ओर से अवरेस्ट पर पर्वतारोहण के लिए गई थी, तब भूकंप आया था. यह दोनों ही घटनाएं डरावनी थीं. जब भूकंप आया, तब मैं 19000 फीट से भी अधिक ऊंचाई पर थी. यह यात्रा बहुत चुनौतीपूर्ण और यादगार थी. हम लोगों को रातोंरात नीचे उतारा गया. हम लोग दो-तीन सप्ताह बेस कैंप में इंतजार करते रहे कि मौसम ठीक हो जाए, लेकिन उस साल भी यात्रा कैंसिल करनी पड़ी.

प्रश्न : पर्वतारोहण ने आपके व्यक्तित्व और नेतृत्व शैली को किस तरह बदला?
उत्तर : मुझे बहुत बड़ी सीख मिली. इसे मैंने अपने काम में उतारा है और हमें हमेशा लोगों का सहयोग मिलता रहा है.

प्रश्न : आज की युवा लड़कियों के लिए आपका संदेश क्या है, जो पारंपरिक सीमाओं से बाहर जाकर कुछ करना चाहती हैं?
उत्तर : मेरा मानना है कि माता-पिता बहुत मेहनत करते हैं. बच्चों को पढ़ाते और सिखाते हैं. अब तकनीक का समय है. इसलिए मैं लड़कियों और उन महिलाओं के लिए भी कहना चाहती हूं, जिन्हें लगता है कि उनके लिए समय निकल चुका है, जब मैंने पर्वतारोहण शुरू किया था, तब मेरे दो बच्चे थे. हां, पति और परिवार का बहुत सहयोग रहा. मैं सभी से यह कहना चाहती हूं कि कुछ हासिल करने का कोई खास समय नहीं होता, उम्र भी बाधा नहीं होती, बस दृढ़ निश्चय होना चाहिए.

प्रश्न : क्या आपको अपने करियर में कभी महिला होने के कारण अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
उत्तर : शुरुआत में जरूर थोड़ा-बहुत रहता है, लेकिन बाद में लोगों को पता चल जाता है कि यह तो बहुत ज्यादा मेहनती और क्षमतावान हैं. मुझे उत्तर प्रदेश में आज तक ऐसा महसूस नहीं हुआ.
प्रश्न : पुलिस सेवा और पर्वतारोहण, इन दोनों क्षेत्रों में मानसिक दृढ़ता कितनी महत्वपूर्ण है?
उत्तर : आप सौ प्रतिशत सही कह रहे हैं. मानसिक रूप से दृढ़ होना बहुत ही जरूरी है. कभी-कभी हम लोग भावनाओं में आ जाते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि मानसिक दृढ़ता शारीरिक मजबूती से अधिक महत्वपूर्ण होती है. मैंने जितना भी पर्वतारोहण किया है और अंटार्टिका में भी गई हूं, मेरा अनुभव है कि मानसिक दृढ़ता ही काम आती है.
प्रश्न : हमारी बेटियों को आत्मनिर्भर और साहसी बनाने के लिए क्या कदम जरूरी हैं?
उत्तर : जो भी हम करते हैं, उसके लिए गंभीर और समर्पित होना जरूरी है. जो भी हम ठान लें, उसके पीछे पड़ जाना है. यह अनुशासन से ही आता है. माता-पिता और बड़ों का सम्मान करना व उनकी बातों को आचरण में उतारना भी जरूरी है. मैं अपने अनुभव के आधार पर नई पीढ़ी से कहना चाहती हूं कि आपके परिवार और मित्रों से बढ़कर कोई नहीं होता. उनकी बातों को गंभीरता से लेना चाहिए.
प्रश्न : आपके जीवन का ऐसा कोई क्षण, जिसने आपको भीतर से बदल दिया हो?
उत्तर : हां, ऐसे कई अवसर आए हैं. मैं जब 11-12 साल की थी, तब मेरे पिता जी का निधन हो गया था. वह क्षण मेरे जीवन को बदल देने वाला था. उसी समय से मेरे जीवन में जिम्मेदारी आ गई. मेरी माता जी काम करती थीं. उसी समय मैंने निश्चिय किया कि जीवन में कुछ करना है.
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