यूपी बोर्ड के बच्चे NCERT और परिषद की किताबों से ही करेंगे पढ़ाई, नकली किताबें छापने वाले जाएंगे जेल
पाठ्यपुस्तकों के मुद्रण और वितरण के लिए परिषद ने तीन मुद्रकों को अधिकृत किया है. परिषद सचिव ने आदेश जारी किया है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 8, 2026 at 11:11 PM IST
प्रयागराज : माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए पाठ्यपुस्तकों को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं. परिषद ने साफ किया है कि प्रदेश के सभी राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्तविहीन मान्यता प्राप्त हाईस्कूल व इंटरमीडिएट कॉलेजों में केवल अधिकृत NCERT और परिषद द्वारा विकसित पुस्तकों को ही लागू किया जाएगा. इसके अलावा किसी भी अन्य किताब या गाइड को चलाने की अनुमति नहीं होगी.
माध्यमिक शिक्षा पदिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि कक्षा 9 और 10 के लिए अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और कक्षा 11-12 के लिए अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, व्यवसाय अध्ययन, लेखाशास्त्र, मनोविज्ञान और गृहविज्ञान सहित कुल 36 विषयों की 70 NCERT पाठ्यपुस्तकें सस्ते दर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं. इसके साथ ही कक्षा 9 से 12 तक हिंदी, संस्कृत और उर्दू की 12 पाठ्यपुस्तकें भी परिषद द्वारा विकसित की गई हैं.
अन्य पुस्तकें खरीदने का दबाव न बनाएं विद्यालय : यूपी बोर्ड ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी स्कूल में अधिक मूल्य वाली, अनधिकृत पाठ्यपुस्तकें या गाइड बुक्स चलाई जाती हैं, या छात्रों को जबरन खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है, तो संबंधित संस्था पर कार्रवाई होगी. इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के तहत ऐसे मामलों में पांच लाख रुपये तक जुर्माना, मान्यता का निलंबन या मान्यता समाप्त करने जैसी सख्त कार्रवाई की जा सकती है.
बोर्ड ने 3 प्रिंटर्स और पब्लिशर्स को अधिकृत किया : पाठ्यपुस्तकों के मुद्रण और वितरण के लिए परिषद ने तीन मुद्रकों को अधिकृत किया है. कक्षा 9 और 12 की किताबें मेसर्स पायनियर प्रिंटर्स एंड पब्लिशर्स आगरा, कक्षा 10 की किताबें मेसर्स पीताम्बरा बुक्स प्राइवेट लिमिटेड झांसी और कक्षा 11 की किताबें मेसर्स सिंघल एजेंसिज लखनऊ द्वारा मुद्रित की जाएंगी. ये किताबें प्रदेश के सभी जिलों में थोक और फुटकर विक्रेताओं के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी.
नकली पुस्तकें छापीं तो होगी एफआईआर : परिषद ने यह भी साफ किया है कि सभी अधिकृत पुस्तकों का कॉपीराइट माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश के पास रहेगा. किताबों की पाइरेसी या डुप्लीकेसी किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी. यदि कोई अनधिकृत मुद्रक या दुकानदार नकली या अधिक मूल्य पर किताबें बेचता पाया गया, तो पुलिस, प्रशासन, वाणिज्य कर और आयकर विभाग के साथ संयुक्त कार्रवाई की जाएगी.
कॉपीराइट का उल्लंघन पाए जाने पर प्रतिलिप्यधिकार अधिनियम 1957 के तहत छह महीने से तीन साल तक की सजा और 50 हजार से दो लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है.

