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बरसाना में टेसू के फूलों से बने रंग-गुलाल, सांस्कृतिक कार्यक्रमों से ब्रज हो रहा गुलज़ार

मध्य प्रदेश से आए टेसू के 10 क्विंटल फूलों से होली खेलने के लिए मथुरा नगरी में रंग तैयार किए गए हैं.

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बरसाना में सांस्कृतिक कार्यक्रम टेसू के रंग गुलाल (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : February 25, 2026 at 1:40 PM IST

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Updated : February 25, 2026 at 10:50 PM IST

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मथुरा: श्री कृष्ण की नगरी मथुरा में रंग गुलाल, पकवान, गीत संगीत के साथ होली का हुड़दंग श्रद्धालुओं पर सर चढ़कर बोल रहा है. ढोल-नगाड़े, बैंड-बाजे की धुन पर श्रद्धालु नाच रहे हैं. होली का जश्न मना रहे हैं. बरसाना कस्बे में सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ पूरा परिसर रंग-बिरंगी स्पेशल सजावट से सजा हुआ है, तो वहीं कुंतलों की तादात में टेसू के फूलों से रंग बनाए गए हैं.

बरसाने की होली (Video Credit; ETV Bharat)

टेसू के फूलों से नेचुरल तरीके से बना रंग: राधा रानी की जन्मस्थली बरसाना में आज विश्व प्रसिद्ध होली खेलने को लेकर बृजवासी और देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु जश्न मना रहे हैं. मंदिर के प्रांगण में टेसू के फूलों से रंग बनकर तैयार हो चुके हैं, तो वहीं 10 जनों की संख्या में ड्रम में भरकर रंग रखा हुआ है. इन्हीं रंगों के साथ आज बरसाना में होली का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा. मध्य प्रदेश के शिवपुरी से टेसू के फूल लाए गए थे और मंदिर प्रांगण में 10 कुंतल से अधिक रंग तैयार किए गए हैं. रंग इतना मजबूत है कि शरीर पर लगने के बाद कपड़ा फट जाएगा लेकिन रंग नहीं छूटता.

दुल्हन सी सजी मथुरा नगरी: बरसाना में होली खेलने के लिए विशेष सजावट की गई है. पूरा मंदिर प्रांगण से लेकर रंगीली गलियां और कस्बे के सभी चौराहों पर रंग-बिरंगी लाइट और राधा कृष्ण के थीम पर पेंटिग दीवारों पर बनाई गई हैं. झांसी से आए कलाकार अपनी राधाकृष्ण की लीलाओं का मंचन कर रहे हैं.

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Photo Credit; ETV Bharat (Photo Credit; ETV Bharat)

सांस्कृतिक कार्यक्रम: उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और पर्यटन विभाग की ओर से दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहे हैं कस्बे के पीली पोखर के पास मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं जिसमें 300 से अधिक कलाकार अपनी प्रस्तुति और मंचन पेश कर रहे हैं राधा कृष्ण के रसिया गीत और लीलाओं का मंचन किया जा रहा है।

कलाकार पायल ने बताया कि हमलोग सांस्कृतिक कार्यक्रम बरसाना में पेश कर रहे हैं. पिछले 5 सालों से होली, जन्माष्टमी, राधाअष्टमी के मौके पर अपने कार्यक्रम पेश करते हैं. झांसी से 15 कलाकारों की टोली यहां आती है.

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दूसरे कलाकार बसंत सिंह ने बताया, हम लोग झांसी बुंदेलखंड से अपनी टोली के साथ यहां आए हैं. बरसाना में आना एक हर्ष की बात है. होली विश्व प्रसिद्ध खेली जाती है, पिछले कई वर्षों से सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करने के लिए हम लोग यहां आते हैं पर्यटन विभाग की तरफ से हमें यहां बुलाया जाता है.

जतिन श्रोत्री सेवायत ने जब जब होली का उत्सव आता है तब तब हम लोग नेचुरल कलर बनकर तैयार करते हैं यह वही रंग है जो टेशू के फूलों से तैयार किए गए हैं ब्रज में होली का उत्साह एक अलग ही आनंद देखने को मिलता है जब रंग और गुलाल तैयार किए जाते हैं तो नेचुरल तैयार होते हैं ताकि शरीर पर लगने के बाद कोई नुकसान न पहुंचे बड़े-बड़े ड्रम में टिशु के फूलों से रंग ओर केसर ढाल कर बने हैं आपको देखने में लाल रंग लगेगा लेकिन शरीर पर और कपड़े पर लगता है तो यह रंग पीला पड़ जाता है.

नंद गांव के हुरियारे बरसाना पहुंचे (Video credit: ETV Bharat)

नंद गांव के हुरियारे बरसाना पहुंचे : राधा रानी की जन्मस्थली बरसाना में बुधवार को विश्व प्रसिद्ध होली हर्षोल्लास प्रेम के साथ खेली गई. कस्बे की रंगीली गलियां चौक और मंदिर प्रांगण में होली का नजारा देखने को मिला. जिला प्रशासन की ओर से हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा कराई गई. वहीं, नंद गांव के हुरियारे बरसाना पहुंचे. कस्बे की पीली पोखर पर पारंपरिक पोशाक धारण की गई. धोती-कुर्ता बगलबंदी और सिर पर मुकुट धारण करे हुए राधा रानी मंदिर पहुंचे. दर्शन करने के बाद बरसाना के रंगीली गलियों से होकर गुजरे तो प्रेम भाव के साथ लाठियां बरसाई गईं.

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Last Updated : February 25, 2026 at 10:50 PM IST