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यूपी की चंद्रकला के नखरे उठाएगा लंदन-अमेरिका, मिठास की रानी का कारवां अब दुनिया जीतने निकला

श्वेता मिश्रा के संपादन और संवाददाता अलीम शेख की इस खास रिपोर्ट में आइए जानते हैं, क्या है चंद्रकला की खासियत?

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चांद जैसी मिठाई 'चंद्रकला' का विदेश तक जाएगा स्वाद. (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : September 2, 2026 at 1:50 PM IST

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Updated : September 2, 2026 at 2:09 PM IST

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बाराबंकी: बाराबंकी का ये चांद जो आसमान में नहीं, हलवाई की कड़ाही में उतरता है, नाम है 'चंद्रकला'. यहां के लोगों के दिलों पर राज कर रही ये मिठाई बरसों तक मसौली और सफदरगंज की गलियों में त्योहारों, शादी-ब्याह, फंक्शनों में महकती रही लेकिन अब सात समंदर पार जाने को बेताब है.

बाराबंकी की 'चन्द्रकला' मिठाई. (Video Credit; ETV Bharat)

बता दें जिस तरह बाराबंकी जिला अपनी गंगा-जमुनी तहजीब, मशहूर शायर खुमार बाराबंकवी, हॉकी के मशहूर खिलाड़ी बाबू केडी सिंह और महान सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की सरजमीं के लिए जाना जाता है, वैसे ही पारंपरिक और मशहूर मिठाई चंद्रकला के लिए भी फेमस है. योगी सरकार ने अब इसे 'एक जनपद एक व्यंजन' One District, One Cuisine में शामिल किया है. अब ये मिठाई सिर्फ स्थानीय हलवाइयों की कड़ाही तक सीमित नहीं रहेगी. 11 नई मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों और अत्याधुनिक पैकेजिंग के दम पर चंद्रकला अब बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार और देश-विदेश के बाजारों के लिए एक नया ब्रांड बनने जा रही है.

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क्या है चन्द्रकला. (Photo Credit; ETV Bharat)

चन्द्रकला और लाल पेड़ा ODOC में शामिल: यूपी सरकार के 'एक जिला एक व्यंजन योजना' के तहत बाराबंकी के चन्द्रकला और लाल पेड़ा दो उत्पादों को चयनित किया गया है. प्रथम चरण में इस नए सत्र 2026-27 में चन्द्रकला निर्माण की 11 इकाइयां स्थापित की जाएंगी. सरकार इन इकाइयों को 25 फीसदी सब्सिडी देगी. इसके लिए 36 लाख रुपये का अनुदान भी स्वीकृत किया जा चुका है.

क्या है चन्द्रकला? गोल मटोल और खूबसूरत सी दिखने वाली ये मिठाई, पूर्णिमा के चांद जैसी गोल होने के चलते ही इसे चन्द्रकला कहा जाता है. बता दें, चन्द्रकला का निर्माण जिले के ज्यादातर मसौली और सफदरगंज क्षेत्रों में होता है, लेकिन अब इसका निर्माण शहर के कई मिष्ठान प्रतिष्ठानों में भी होने लगा है.

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बनाने में लगती ये सामग्री. (Photo Credit; ETV Bharat)

कब वजूद में आया चन्द्रकला: मसौली स्थित लक्ष्मी स्वीट के मालिक लक्ष्मीकांत गुप्ता बताते हैं कि तीन पीढ़ी पहले उनके बाबा ने चन्द्रकला बनाने की शुरुआत सफदरगंज कस्बे से की थी. उसके बाद उनका परिवार मसौली आ गया, तब से ये परंपरा चली आ रही है.

उन्होंने बताया कि पहले चन्द्रकला जैसी मिठाई और कहीं नहीं बनती थी. गुझिया बना करती थी लेकिन उनके पुरखों ने इसे नया रूप दिया. अब उनके चन्द्रकला की नकल करके तमाम दुकानें खुल गई हैं. इस समय खोया, शक्कर, घी, तेल और मेवे के महंगे हो जाने से इसकी कीमत भी बढ़ गई है. एक पीस की कीमत 35 रुपये है. 425 रुपये किलो में चन्द्रकला बिकता है.

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लोकल से ग्लोबल तक का प्लान. (Photo Credit; ETV Bharat)

हर खासोआम की पसन्द: चन्द्रकला अपने लजीज ज़ायके के चलते सभी की पसंद बन चुकी है. कहीं ले जाना हो तो लोग इस मिठाई को खरीदना नहीं भूलते. घर में कोई फंक्शन हो या आने वाले मेहमानों का स्वागत, लोगों की लिस्ट में ये मिठाई जरूर शामिल होती है. यही नहीं बाराबंकी से गुजरने वाले आसपास के क्षेत्रों के लोग यहां रुककर चन्द्रकला का स्वाद तो लेते ही हैं साथ ही पैक कराकर घर भी ले जाते हैं.

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चाशनी में डूबी चन्द्रकला. (Photo Credit; ETV Bharat)

कैसे बनती है चन्द्रकला?

  • पहले मैदे में पानी और घी मिलाकर उसे देर तक गूंथा जाता है.
  • फिर गुंथे हुए मैदे की हथेली के बराबर की टिकिया बनाई जाती है.
  • एक टिकिया में पहले से ही तैयार खोया, मेवा और इलायची के मिश्रण को भरते हैं.
  • ऊपर से दूसरी टिकिया रखकर इसको बन्द कर देते हैं.
  • किनारे-किनारे बड़े ही खास ढंग से गोठ कर डिजाइन देते हैं.
  • कच्चे चन्द्रकला को कढ़ाई में डालकर तेल या घी में फ्राई किया जाता है.
  • आंच तेज न हो इसका विशेष ख्याल रखा जाता है.
  • गोल्डेन होने तक इसको तला जाता है.
  • फिर इसको निकालकर पहले से तैयार शक्कर की गाढ़ी चाशनी में डुबोते हैं.
  • 10 से 15 मिनट बाद इसको चाशनी से निकाल लिया जाता है.
  • इस तरह चन्द्रकला बनकर तैयार हो गया.

चन्द्रकला निर्माण की यूनिट्स: इस उत्पाद को लोकल से ग्लोबल बनाने के लिए पहले चरण में जिले में 11 निर्माण इकाइयां स्थापित किये जाने का लक्ष्य रखा गया है. निर्माण इकाइयां लगाने के इच्छुक लोगों से जिले के उद्योग विभाग ने आवेदन मांगे हैं. चन्द्रकला या लाल पेड़ा निर्माण की इकाई लगाने के लिए 18 साल से ज्यादा का कोई भी इच्छुक व्यक्ति आवेदन कर सकता है या फिर पहले से ही जिन दुकानों में इसका निर्माण हो रहा है उसे विस्तार दे सकता है.

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धीमी आंच में मिठाई को पकाते कारीगर. (Photo Credit; ETV Bharat)

उपायुक्त उद्योग विभाग दिनेश चौरसिया ने बताया कि फिलहाल अभी इसका निर्माण पारम्परिक ढंग से किया जाएगा लेकिन जैसे-जैसे इसके निर्माण में कुछ और बदलाव होगा तो इसके लिए हाईटेक मशीनों का भी प्रयोग किया जाएगा. यही नहीं विभाग इन उद्यमियों को अपने उत्पाद को और बेहतर बनाने के इसके लिए 10 दिन की खास ट्रेनिंग भी करवाएगा.

स्पेशल ट्रेनिंग की भी व्यवस्था: चन्द्रकला को हाइजेनिक बनाने के साथ-साथ उसकी क्वालिटी और बेहतर कैसे बनाया जाए?, इसके लिए उद्योग विभाग चन्द्रकला निर्माण में दिलचस्पी रखने वालों को फ़ूड ऐंड सेफ्टी विभाग से स्पेशल ट्रेनिंग भी दिलाएगा.

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चन्द्रकला मिठाई को डिजाइन देते कारीगर. (Photo Credit; ETV Bharat)

उत्पाद की होगी ब्रांडिंग: विभाग का फोकस है कि चन्द्रकला मिठाई को देश-विदेश तक पहुंचाया जाए, इसके लिए इसकी ब्रांडिंग भी की जाएगी. साथ ही अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे ई-प्लेटफार्मों से भी इसको जोड़ा जाएगा. पारम्परिक मिठाइयों के साथ कम समय तक टिकाऊ होने की दिक्कत को ध्यान में रखते हुए इस मिठाई की पैकेजिंग के लिए पैकेजिंग प्रबन्धन संस्थान से उद्यमियों को खास ट्रेनिंग भी दिलाई जाएगी.

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मेवा से भरी होती मिठाई. (Photo Credit; ETV Bharat)

वहीं, चन्द्रकला निर्माण से जुड़े कारीगरों और दुकानदारों का कहना है कि इन निर्माण इकाइयों के स्थापित हो जाने से युवकों के लिए रोजगार के रास्ते खुलेंगे, लेकिन जैसे-जैसे ट्रेडिंग बढ़ेगी तो निर्माण इकाइयां भी बढ़ेंगी. निर्माण इकाइयों के बढ़ने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के ज्यादा अवसर बढ़ेंगे.

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चन्द्रकला मिठाई. (Photo Credit; ETV Bharat)

कारीगर संदीप ने बताया कि इस योजना से उनके सामने तमाम विकल्प खुलेंगे, उन्हें कहीं किसी भी प्रतिष्ठान में आसानी से काम मिल जाएगा. कारीगर राम सुरेश और अनिल ने बताया कि ज्यादा दुकानें खुलने से उनकी डिमांड तो बढ़ेगी ही बल्कि उन्हें आर्थिक लाभ भी होगा.

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Last Updated : September 2, 2026 at 2:09 PM IST