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यूपी का 845 साल पुराना कजली मेला कहां लगता है, आल्हा-ऊदल से क्या है खास कनेक्शन? जानिए

आल्हा-ऊदल की वीरगाथा से जुड़ा है मेला, सात दिन होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम.

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यूपी का 845 साल पुराना कजली मेला कहां लगता है. (etv bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 30, 2026 at 10:39 AM IST

6 Min Read
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महोबा: वीरभूमि महोबा में ऐतिहासिक कजली मेले के 845वें आयोजन का शनिवार को शुभारंभ हुआ. इस बेहद पुराने मेला का आल्हा ऊदल से खास जुड़ाव है. चलिए आगे जानते हैं इस बारे में.

कब हुआ शुभारंभ: प्रभारी मंत्री मनोहर लाल उर्फ मन्नू कोरी, सदर विधायक राकेश गोस्वामी और एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर ने शनिवार को फीता काटकर मेले का उद्घाटन किया. मेले के शुभारंभ के साथ शहर में निकली शोभायात्रा में ऐतिहासिक और धार्मिक प्रसंगों पर आधारित झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं. आल्हा-ऊदल समेत विभिन्न ऐतिहासिक पात्रों की झांकियों के साथ हाथी, घोड़े और ऊंट भी शोभायात्रा में शामिल रहे. शोभायात्रा देखने के लिए शहर में जगह-जगह लोगों की भीड़ जुटी. कीरत सागर में झांकी वाली नाव भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही।

आल्हा-ऊदल की वीरगाथा से जुड़ा है मेला

कजली मेला महोबा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा आयोजन है. स्थानीय मान्यता के अनुसार वर्ष 1182 में महोबा के कीरत सागर क्षेत्र में चंदेल और पृथ्वीराज चौहान की सेनाओं के बीच युद्ध हुआ था. इसमें आल्हा-ऊदल की विजय की स्मृति में कजली पर्व मनाने की परंपरा शुरू हुई। इसी ऐतिहासिक परंपरा को महोबा में आज भी उत्साह के साथ निभाया जाता है.

सदर विधायक राकेश गोस्वामी ने कहा कि कजली मेला महोबा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत है. उन्होंने कहा कि महोबा की पृथ्वीराज चौहान पर विजय और आल्हा-ऊदल के समय से यह परंपरा चली आ रही है. हर साल मेले को नई भव्यता देने का प्रयास किया जा रहा है.

राजकीय मेले का दर्जा दिलाने की मांग

विधायक राकेश गोस्वामी ने बताया कि कजली मेले को राजकीय मेले का दर्जा दिलाने के लिए वह विधानसभा में प्रश्न लगा चुके हैं. मुख्यमंत्री से भी इस संबंध में मांग की गई है. उनके मुताबिक मुख्यमंत्री ने इस पर विचार करने का आश्वासन दिया है। विधायक ने उम्मीद जताई कि जल्द ही कजली मेले को राजकीय मेले का दर्जा मिलेगा.

वहीं प्रभारी मंत्री मनोहर लाल उर्फ मन्नू कोरी ने कजली मेले को महोबा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान बताया. उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर कजली मेले को राष्ट्रीय मेले का दर्जा दिलाने के लिए प्रयास करेंगे.

सात दिन होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम

डीएम गजल भारद्वाज ने कहा कि कजली मेले की तैयारियां व्यापक स्तर पर की गई हैं. मेले में भारी पुलिस बल और मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं. सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है. सांस्कृतिक मंच को व्यवस्थित कराया गया है और दूर-दराज से कलाकारों को बुलाया गया है.

उन्होंने बताया कि ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में लोग मेला देखने पहुंचते हैं. इसे देखते हुए झूलों समेत मेला क्षेत्र की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित कराया गया है. मेले में सात दिनों तक विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें स्थानीय और बाहर से आए कलाकार प्रस्तुतियां देंगे.

बारिश को देखते हुए जल सुरक्षा पर जोर

डीएम ने बताया कि लगातार हो रही बारिश को देखते हुए अग्नि सुरक्षा के साथ जल सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. कीरत सागर में नाव और सुरक्षा संबंधी इंतजाम किए गए हैं. प्रशासन की कोशिश है कि करीब 15 दिन तक चलने वाले इस पर्व में आने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो. डीएम ने कहा कि कजली मेले में स्थानीय कलाकारों, दुकानदारों और व्यापारियों की बड़ी भागीदारी की उम्मीद है। मेले के माध्यम से उन्हें आय का अच्छा अवसर मिलेगा.

सुरक्षा के लिए पुलिस का व्यापक इंतजाम
एसपी शशांक सिंह ने बताया कि कजली मेले और शोभायात्रा को लेकर पुलिस प्रशासन कई दिनों से तैयारी कर रहा था. मेला क्षेत्र और जुलूस मार्ग का लगातार सर्वे और निरीक्षण किया गया. पुराने आयोजनों के अनुभवों को देखते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था में जरूरी बदलाव किए गए हैं.

एसपी के मुताबिक करीब छह से सात डिप्टी एसपी स्तर के अधिकारी, लगभग 100 सब इंस्पेक्टर और 250 से 300 कांस्टेबल की तैनाती की गई है. इसके अलावा पीएसी और फ्लड पीएसी की व्यवस्था की गई है। कीरत सागर के पास स्थानीय गोताखोर और नाव की व्यवस्था भी रखी गई है.

जुलूस मार्ग की ड्रोन से निगरानी
एसपी ने बताया कि जुलूस मार्ग की ड्रोन के माध्यम से निगरानी की जा रही है. मेला क्षेत्र और जुलूस मार्ग में सुरक्षा व्यवस्था के साथ विभिन्न स्थानों और स्ट्रक्चर का भी निरीक्षण किया गया है. जिला प्रशासन के साथ समन्वय कर सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है.
पुलिस सोशल मीडिया पर भी लगातार नजर रख रही है, ताकि किसी तरह की अफवाह या शरारत से मेले की व्यवस्था प्रभावित न हो. जुलूस के आगे और पीछे सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

शोभायात्रा में दिखी ऐतिहासिक विरासत की झलक
मेले के शुभारंभ पर निकली शोभायात्रा में आल्हा-ऊदल और अन्य ऐतिहासिक पात्रों की झांकियां शामिल रहीं. ऐतिहासिक व धार्मिक प्रसंगों को झांकियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। हाथी, घोड़े और ऊंट के साथ निकली शोभायात्रा देखने के लिए शहर में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. कीरत सागर में ऐतिहासिक पात्रों की झांकी वाली नाव भी आकर्षण का केंद्र रही. मेला क्षेत्र में झूले, दुकानें और सांस्कृतिक मंच लोगों को आकर्षित कर रहे हैं.

इस दौरान जिलाधिकारी गजल भारद्वाज, पुलिस अधीक्षक शशांक सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहे।