वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का 'कानपुर रूट': GBC से आएगा ₹40,000 करोड़ का निवेश, क्या लौटेगा 'पूर्व का मैनचेस्टर' का पुराना गौरव?
पढ़ें संवाददाता समीर दीक्षित की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : September 2, 2026 at 7:05 AM IST
कानपुर : उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट को रफ्तार देने के लिए सूबे का औद्योगिक हब यानी कानपुर पूरी तरह तैयार है. आगामी नवंबर में प्रस्तावित ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) के लिए कानपुर में 40,000 करोड़ रुपये के निवेश का खाका खींचा जा चुका है.
उद्योग विभाग ने 527 औद्योगिक इकाइयों के प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली है. विभागीय अफसरों का ठोस दावा है इनमें से 181 इकाइयां उत्पादन शुरू करने की कगार पर हैं, जबकि 147 इकाईयां ऐसी हैं, जो मौजूदा समय में संचालित हैं. वहीं, इस निवेश को लेकर कानपुर के वरिष्ठ उद्यमियों का कहना है इससे कानपुर की औद्योगिक रफ्तार तेज होगी. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह भारी-भरकम निवेश कानपुर को उसका खोया हुआ 'पूर्व का मैनचेस्टर' का खिताब वापस दिला पाएगा? आइए समझते हैं इस मेगा प्लान की पूरी इनसाइड स्टोरी.
वरिष्ठ उद्यमियों का कहना है कि कहीं न कहीं उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और योगी सरकार में सूबे की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने के लिए कवायद जारी है, उसमें कानपुर की अब अहम भूमिका होगी.

"हजारों करोड़ रुपये का निवेश बेहद उत्साहजनक" : इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील वैश्य ने कहा कि किसी भी शहर के लिए हजारों करोड़ रुपये का बाहरी निवेश बेहद उत्साहजनक परिणाम जैसा है. निश्चित तौर पर इससे कानपुर का जो सालाना 10 हजार करोड़ रुपये का कारोबार है, वह बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि निचले स्तर पर जो काम करने वाले हैं उनकी मानसिकता को बदलना होगा. सरकार को इस दिशा में सोचना चाहिए.
वरिष्ठ उद्यमी सुनील वैश्य ने कहा कि कानपुर में इस दिशा में कवायद तो खूब की गई लेकिन, कोई ठोस काम नहीं हुआ. कानपुर की तमाम बंद पड़ी मिलों को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी निष्प्रयोज्य जमीनों के लिए सोचना चाहिए. यहां नई इकाईयां स्थापित हो सकती हैं.

फीटा के महासचिव और लोहा कारोबारी उमंग अग्रवाल ने कहा कि ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी से जो प्रस्ताव मिलेंगे उनसे शहर का विकास होगा. हालांकि, सरकार को उद्यमियों के लिए और अधिक सोचना होगा. तभी जो इस क्षेत्र की बदहाल तस्वीर है, वह बदल सकती है.
कुल एमओयू अब तक साइन हुए : 527
कुल निवेश अब तक हुआ : 40278.99 करोड़ रुपये
कुल रोजगार सृजन : 126277
कुल जीबीसी रेडी : 181
कुल निवेश आ चुका है : 11154.78
कुल रोजगार सृजित हो चुका : 19310
कुल औद्योगिक इकाईयां संचालित हैं : 147
इनमें कुल निवेश हुआ : 6175.09 करोड़ रुपये
कुल रोजगार मिल गया : 12350
कानपुर के उपायुक्त उद्योग अंजनीश प्रताप सिंह ने कहा कि सीएम योगी का जो वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का सपना है उसको देखते हुए कानपुर में अब तक 527 एमओयू साइन हो चुके हैं. इनमें से 181 जीबीसी रेडी हैं. जिनसे 11 हजार करोड़ रुपये का निवेश कानपुर में हो चुका है. लेदर, टेक्सटाइल और मशीनरी इंडस्ट्रीज संबंधी एमओयू सबसे अधिक हैं.

उन्होंने कहा कि इसके अलावा निवेश बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से दो स्थानों पर प्लेज पार्क बनाए जाएंगे. साथ ही घाटमपुर में 62 एकड़ जमीन पर औद्योगिक इकाईयों की स्थापना होगी. साथ ही नई इकाई बहुत जल्द संचालित होगी.
युवा उद्यमी पुनीत गुप्ता कहते हैं कि युवाओं के लिए इसे सकारात्मक नजरिए से देखें तो ये अच्छी बात है. निवेश होगा, तो शहर का विकास होगा. इंडस्ट्रीज लगेंगी और इस कानपुर को बहुत जरूरत भी है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार युवाओं के साथ खड़ी हो जाए तो शहर में उद्यमिता की रफ्तार को गति मिल सकती है.

उन्होंने कहा कि अभी भी युवा केवल इस बात से परेशान रहते हैं, कि संबंधित विभागों का उन्हें पूरा सपोर्ट नहीं मिलता. वह अपनी इंडस्ट्री लगा चुके हैं, पर औद्योगिक क्षेत्रों का बुरा हाल है. जिसका सीधा असर कारोबार पर पड़ता है.
औद्योगिक इकाईयों में पिछले पांच साल से काम कर रहे राजीव का कहना है कि उद्योगों की स्थापना से हमें भी रोजगार के नए अवसर मिलेंगे. अगर इंडस्ट्री होंगी, तो उनमें उत्पाद तैयार होंगे. इससे काम भी मिलेगा और उससे हम अपनी आजीविका भी चला सकेंगे.
उन्होंने कहा कि श्रमिकों के लिए औद्योगिक इकाईयों का संचालन बहुत जरूरी है. सरकार श्रमिकों के लिए कई योजनाएं जरूर संचालित कर रही है, मगर इंडस्ट्री नहीं चलेंगी तो श्रमिक कहां से रोजगार हासिल कर सकेंगे?
पनकी इंडस्ट्रियल एरिया में काम करने वाले प्रदीप तिवारी ने कहा कि कानपुर में और फैक्ट्रियां लगेंगी तो लोगों को रोजगार मिलेगा और बहुत से लोगों को अप्रत्यक्ष फायदा होगा. उन्होंने कहा कि अगर कहीं फैक्ट्री लगती है तो फैक्ट्री के अंदर 10-20 लोगों को रोजगार मिलता है. फैक्ट्री के बाहर 10-20 लोग दुकान खोल लेते हैं. खाने की, समान की तो प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष दोनों तरफ से रोजगार मिलेगा. उन्होंने कहा कि यह बहुत लाभदायक है.
(वेबसाइट के अंत में पोल (Poll): "क्या आपको लगता है कि ₹40,000 करोड़ के इस निवेश से कानपुर के युवाओं का बाहरी राज्यों में पलायन पूरी तरह रुक जाएगा?" (हाँ / नहीं / कह नहीं सकते)

