अनूठी पारंपरिक देव होली, मां अंगारमोती में जमकर थिरके भक्त
पहले माता को रंग गुलाल और पूजा अर्चना के साथ देव होली मनाने की परंपरा है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : March 3, 2026 at 8:43 PM IST
धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के गंगरेल स्थित मां अंगारमोती में इस साल पारंपरिक और अनूठे स्वरूप में देव होली का आयोजन हुआ. आदिवासी आस्था और लोकसंस्कृति की सजीव छटा के बीच माता और देव स्वरूपों ने रंगों का उत्सव मनाया.
होली उत्सव की शुरुआत सोमवार दोपहर विधिवत पारंपरिक पूजा-अर्चना से हुई. प्रकृति, अन्न और पूर्वजों के प्रति आस्था रखते हुए पेन पुरखा को फागुन जोहार अर्पित किया गया. पूजा के बाद माता को गेहूं की बाली चढ़ाई गई और श्रद्धापूर्वक हरवा माला भी अर्पित की गई.
पारंपरिक गाजा बाजा के साथ होली
माता पुजारी ईश्वर नेताम, भक्ति भाव में लीन दिखाई दिए और देव स्वरूपों के साथ रंग-गुलाल की होली खेली. मान्यता अनुसार मतवार डोकरा, लिंगो पेन और डांग देव भी होली उत्सव में सहभागी बने. पारंपरिक बाजा-गाजा की गूंज से पूरा परिसर रंगों और उल्लास से सराबोर हो उठा.

युवाओं में दिखा उत्साह
उत्सव के दौरान युवाओं ने पारंपरिक रेला-पाटा की धुन पर नृत्य किया. साथ ही डीजे की ताल पर भी उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए एक-दूसरे को गुलाल लगाकर फागुन की शुभकामनाएं दीं.

आदिवासी समाज की परंपरा
मां अंगार मोती मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष जीवराखनलाल मरई ने बताया कि प्रतिवर्ष जिस दिन होलिका दहन होता है, उसके पहले मां को रंग गुलाल लगाया जाता है. देव बाजा के साथ आदिवासी समाज की लगातार चली आ रही परंपरा का निर्वहन करते हुए जैता पुजारी रंग गुलाल का कार्यक्रम करते हैं. सब समाज को संदेश देना चाहते हैं.
ट्रस्ट के अध्यक्ष ने बताया कि सभी के सहयोग से देव होली संपन्न हुई . ट्रस्ट ने दूसरे जिले से आए श्रद्धालुओं को भी देव होली में शामिल होने के लिए धन्यवाद दिया.
भक्ति और शक्ति का संगम है मां अंगारमोती का दरबार, यहां पूरी होती है भक्तों की हर मुराद
आदिवासी संस्कृति और परंपरा को बढ़ाने के लिए धमतरी के बच्चे कर रहे हैं मेहनत
''पानी करता है पवनपुत्र को प्रणाम'': बाढ़ में भी नहीं डूबते यहां हनुमान

