ETV Bharat / state

बारिश के लिए बस्तर की अनोखी परंपरा: इंद्रदेव को प्रसन्न करने 84 गांव के लोगों ने निकाली भीमसेन जात्रा

मान्यता अनुसार पूजा-पाठ से इंद्रदेव प्रसन्न होकर अच्छी बारिश करते हैं, जिससे खुशहाली आती है. मुकेश श्रीवास की रिपोर्ट.

UNIQUE TRADITION IN DANTEWADA
इंद्रदेव को प्रसन्न करने की अनूठी परंपरा (ETV Bharat Chhattisgarh)
author img

By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : July 8, 2026 at 1:05 PM IST

5 Min Read
Choose ETV Bharat

दंतेवाड़ा: एल नीनो की वजह से इस बार मानसून पूरी तरह से सक्रिय नहीं हुआ है. मानसून के कमजोर पड़ने से किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं. रुठे मानसून और बारिश के देवता इंद्रदेव (स्थानीय भाषा में जिसे आदिवासी लोग भीमसेन देव कहते हैं) को मनाने के लिए दंतेवाड़ा में अनोखी पूजा परंपरा निभाई गई. इस अनोखी पूजा परंपरा में 84 गांवों के लोग शामिल हुए.

बारिश के भीमसेन देव की पूजा

मान्यता है कि इस अनोखी पूजा परंपरा को निभाने से बारिश के देव इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और जमकर बारिश होती है. बारिश की वजह से अच्छी फसल होती है और किसानों के घर सुख और समृद्धि का वास होता है. इस अनोखी पूजा परंपरा में शामिल होने पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि पूर्वजों के समय से ये परंपरा निभाई जाती रही है, जिसका पालन वो भी करते आ रहे हैं.

दंतेवाड़ा में बारिश के लिए पूजा (ETV Bharat Chhattisgarh)

पूर्वजों से चली आ रही मान्यता

गांव के लोग बताते हैं कि यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण बस्तर के आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति के प्रति उनके गहरे विश्वास का प्रतीक भी है. पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही इस परंपरा को आज भी ग्रामीण पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभा रहे हैं. परंपरा मुताबिक मंगलवार को सुबह सबसे पहले दंतेवाड़ा के प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की गई.

मां दंतेश्वरी मंदिर के मुख्य पुजारी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई. इसके बाद पारंपरिक वाद्य यंत्रों और ढोल-नगाड़ों के साथ धार्मिक जयघोष किया गया. इसके बाद भक्तों की टोली उदेला पहाड़ स्थित भीमसेन देव स्थल के लिए रवाना हुई.

84 गांव के लोग यहां जमा होते हैं. मैं भी आमावाड़ा से यहां आया हूं. इस पूजा परंपरा से बारिश के देव प्रसन्न होते हैं और अच्छी बारिश से अच्छी फसल होती है, किसानों के घर में सुख-समृद्धि आती है: मंगल भास्कर, ग्रामीण, आमावाड़ा

हमारे पूर्वजों के समय से ये परंपरा चली आ रही है. इस परंपरा का पालन हम आज भी करते आ रहे हैं. अपनी श्रद्धा अनुसार लोग यहां पूजा पाठ कर भगवान को चीजें अर्पण करते हैं: स्थानीय ग्रामीण

उदेला पहाड़ी पर स्थित हैं भीमसेन देव

उदेला पहाड़ी पर स्थित भीमसेन देव स्थल पहुंचकर ग्रामीणों ने विधि-विधान से पूजा अर्चना की. ऐसी मान्यता है कि यहां स्थित भीमसेन देव के पवित्र पत्थर को श्रद्धापूर्वक स्पर्श कर हिलाने तथा पूजा-अर्चना करने से भगवान इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है. इसी विश्वास के साथ ग्रामीण हर साल यहां आकर अपने गांव, खेत-खलिहानों और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं.

अनूठी परंपरा को निभाने पहुंचे 84 गांव के लोग

इस अनूठी परंपरा की सबसे खास बात यह है, कि 84 गांवों के लोग अपने-अपने गांव का जल हांडी में भरकर भीमसेन देव स्थल तक लेकर आते हैं. सभी गांवों का जल एक स्थान पर जमा कर विशेष पूजा की जाती है. यह परंपरा पूरे क्षेत्र की एकता, सामाजिक समरसता और सामूहिक आस्था का प्रतीक मानी जाती है. ग्रामीणों का कहना है कि इस वर्ष बारिश तो हुई है, लेकिन खेती के लिए अभी भी पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है.

इसी कारण वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए सभी गांवों के लोग एकजुट होकर भीमसेन देव की शरण में पहुंचे हैं. उनका विश्वास है कि सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थना अवश्य स्वीकार होगी और आने वाले दिनों में अच्छी वर्षा होगी, जिससे धान सहित अन्य फसलों का उत्पादन बेहतर होगा.

भगवान को अर्पित करते हैं ये चीजें

पूजा-पाठ के दौरान ग्रामीण अपनी-अपनी मनोकामनाओं के अनुसार मुर्गा, मुर्गी, कबूतर, नारियल, अंडा तथा अन्य पारंपरिक भेंट भीमसेन देव को अर्पित करते हैं. इसके साथ ही गांवों में सुख-शांति, समृद्धि, रोग-मुक्ति और प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा की भी कामना की जाती है. ग्रामीणों का विश्वास है कि भीमसेन देव की कृपा से गांवों में किसी प्रकार की विपत्ति नहीं आती और किसानों की मेहनत सफल होती है.

भीमसेन जात्रा एक अनोखी परंपरा

दक्षिण बस्तर में भीमसेन जात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति और कृषि संस्कृति से जुड़ी एक जीवंत विरासत है। आधुनिक दौर में भी यह परंपरा लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रही है। बदलते समय के बावजूद इस आयोजन में युवाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नई पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजोने के लिए संकल्पित हैं.

हर साल की तरह इस साल भी 84 गांवों के ग्रामीणों की सामूहिक उपस्थिति और पूजा-पाठ ने यह संदेश दिया कि आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता की यह मिसाल आज भी दक्षिण बस्तर की पहचान बनी हुई है. ग्रामीणों ने भीमसेन देव से प्रार्थना की कि क्षेत्र में समय पर अच्छी बारिश हो, किसानों की फसल लहलहाए, गांवों में खुशहाली बनी रहे और पूरे अंचल पर किसी प्रकार का संकट न आए.

सांप के काटने पर क्या करें और क्या नहीं करें: कोरिया जिला अस्पताल के सीएमएचओ से जानिए एक्सपर्ट राय

बैलाडीला डिपॉजिट 4: खनन को लेकर आप ने सरकार से पूछे तीखे सवाल

प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना : दंतेवाड़ा में जैविक खेती को मिली नई उड़ान, श्री विधि से किसानों की आय और उत्पादन में बढ़ोतरी का लक्ष्य

संजीवनी एंबुलेंस में हुई डिलिवरी, मेडिकल स्टाफ ने बचाई जच्चा बच्चा की जान