ETV Bharat / state

हसदेव अरण्य और रामगढ़ पर्वत के लिए एक परिवार का अनोखा प्रदर्शन

अंबिकापुर के घड़ी चौक में 2 साल का बच्चा भी प्रदर्शन में परिवार के साथ शामिल हो रहा.

HASDEO ARANYA FOREST
परिवार का अनोखा प्रदर्शन (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : January 7, 2026 at 2:50 PM IST

5 Min Read
Choose ETV Bharat

सरगुजा: हसदेव जंगल को मध्य भारत का फेफड़ा यूं ही नहीं कहा जाता. हसदेव के जंगल से होकर आने वाली ताजी और शुद्ध हवा लोगों को बीमार होने से बचाती है, प्रदूषण को नियंत्रित करती है. हसदेव जंगल अपनी जैव विविधता के लिए भी जाना जाता है. यहां कई दुर्लभ किस्म के पशु पक्षियों का प्राकृतिक रहवास है. हसदेव नदी के पानी से साल भर लोग खेती बाड़ी करते हैं. ठीक उसी तरह सरगुजा संभाग में रामगढ़ पर्वत है, जो अपनी जैव विविधता और हरियाली के लिए जाना जाता है. रामगढ़ पर्वत का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व भी है. लेकिन जब से हसदेव और रामगढ़ पर्वत के अस्तित्व को खतरा खनन से हुआ है, तब से लोग एकजुट होकर इसके खिलाफ खड़े होने लगे हैं. लोग चाहते हैं कि यहां पर खनन का काम नहीं किया जाए. खनन से जल, जंगल और जमीन तीनों खतरे में पड़ जाएंगे.

पर्वत को बचाने के लिए परिवार का प्रदर्शन

सरगुजा संभाग में भी खनन को लेकर लगातार प्रदर्शन होते रहे हैं. कभी सामाजिक संगठनों के द्वारा तो कभी राजनीतिक दलों के द्वारा विरोध जताया जाता रहा है. पर पहली बार ऐसा हो रहा है कि एक परिवार सिर्फ खनन के खिलाफ बीते एक हफ्ते से धरना प्रदर्शन पर बैठा है. प्रदर्शन में शामिल कुल तीन लोग हैं. पति पत्नी और उनका छोटा बच्चा. गोद में बच्चे को लेकर ये परिवार हर दिन घड़ी चौक पर प्रदर्शन के लिए पहुंच जाता है. प्रदर्शन कर रहे परिवार का कहना है कि जब भी उनको मौका मिलता है, वो प्रदर्शन के लिए तख्ती लेकर यहां आ जाते हैं.

परिवार का अनोखा प्रदर्शन (ETV Bharat)

मासूम बच्चे के साथ प्रदर्शन पर बैठा परिवार

प्रदर्शन कर रही महिला गीता का कहना है कि जल, जंगल और जमीन हमारी प्राकृतिक धरोहर हैं. इसे बचाने के लिए अगर ठिठुरती सर्दी में भी हमें बैठना पड़े तो कोई दिक्कत की बात नहीं है. गीता कहती हैं कि अगर आज हम आगे नहीं आए तो कल के लिए कुछ भी नहीं बचेगा. गीता बताती हैं कि वो 1 जनवरी से हर दिन यहां आकर प्रदर्शन करती हैं. पति शिफ्ट में काम करते हैं, लिहाजा पति को जब काम से ब्रेक मिलता है वो लोग यहां प्रदर्शन के लिए बैठ जाते हैं.

HASDEO ARANYA FOREST
परिवार का अनोखा प्रदर्शन (ETV Bharat)

हमारे जंगल कट रहे हैं, हसदेव का जंगल, रामगढ़ का पहाड़, मैनपाट अब सब कुछ खतरे में है. ये जंगल और पहाड़ पर्वत हमारी धरोहर हैं, इसको बचाने के लिए हम सड़क पर बैठे हैं. हम अकेले हसदेव नहीं बचा पाएंगे, लेकिन जब सरगुजा और छत्तीसगढ़ के सभी लोग हमसे जुड़ेंगे तो जरूर हमारी धरोहर बच सकेगी. मेरे पति होटल में काम करते हैं. वो भी रोजाना मेरे साथ समय निकालकर घड़ी चौक में दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक पोस्टर लेकर खड़े रहते हैं. शाम को भी धरने में शामिल होते हैं: गीता, प्रदर्शनकारी महिला

सरकार से जल, जंगल जमीन बचाने की मांग

सरगुजा संभाग में इन दिनों हाड़ कंपा देने वाली सर्दी पड़ रही है. इस कड़कड़ाती सर्दी में भी ये परिवार अपने दुधमुंहे बच्चे के साथ प्रदर्शन के लिए बैठे हैं. लोगों का कहना है कि परिवार को 2 साल की बच्ची की फिक्र करनी चाहिए. इस तरह से बच्ची को प्रदर्शन में लेकर आना भी ठीक नहीं है. बच्ची की तबीयत बिगड़ सकती है. वहीं प्रदर्शन कर रहे परिवार का कहना है कि सरकार हमारी मांगे सुन लेती है तो फिर हम अपना प्रदर्शन बंद कर देंगे.

HASDEO ARANYA FOREST
परिवार का अनोखा प्रदर्शन (ETV Bharat)

हसदेव और रामगढ़ पर्वत को बचाने के लिए आंदोलन

प्रदर्शन कर रहे पति पत्नी दोनों अंबिकापुर के रहने वाले हैं. पति का नाम उमाशंकर है और पत्नी का नाम गीता. दोनों का कहना है कि उनकी मांग जायज है. शासन को चाहिए कि वो हसदेव और रामगढ़ पर्वत को संरक्षित करने का काम करे. गीता कहती हैं कि वो किसी संगठन या संस्था से जुड़ी नहीं हैं. उनके मन में जब जंगल बचाने का विचार आया तब उन्होने प्रदर्शन करने का फैसला किया.

कुछ लोगों का समर्थन हमें जरूर मिला है, लोग आकर साथ में बैठने लगे है, यहां से निकलने वाले लोग पूछते हैं, चर्चा करते हैं. ठंड का असर मेरे बच्चे पर भी दिखने लगा है, आज वो बहुत शांत है. उसे ठंड लगी है: गीता, प्रदर्शनकारी महिला

विरासत को बचाने के लिए एकजुट होने की कही बात

गीता और उनके पति उमाशंकर जिस हसदेव और रामगढ़ पर्वत को बचाने के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, वो पर्वत और जंगल छत्तीसगढ़ की साझी विरासत है. इस ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक विरासत को बचाने के लिए लगातार लोग एकजुट हो रहे हैं.

ऐतिहासिक धरोहर रामगढ़ पर्वत में दरारें, लैंडस्लाइडिंग, अस्तित्व बचाने शुरू हुआ संघर्ष

बिलद्वार गुफा की त्रासदी के 12 साल बाद अब रामगढ़ के संकट की चिंता

हसदेव अरण्य में खनन के लिए 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन को मंजूरी देने की सिफारिश

हसदेव अरण्य में केते कोल कोल एक्सटेंशन को मिली पर्यावरण स्वीकृति, उठे सियासी सवाल