दुर्ग में ठगी का अनोखा खेल, 150 से ज्यादा पीड़ित पहुंचे अबतक थाने, दिव्यांग भी बने शिकार
दुर्ग एसएसपी ने कहा, हम जल्द आरोपियों तक पहुंचेंगे, शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई जारी है. दुर्ग से अतुल कुमार शर्मा की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : August 26, 2026 at 8:49 PM IST
दुर्ग: छत्तीसगढ़ पुलिस समय-समय पर लोगों को सायबर ठगी से बचाने के लिए जागरुकता अभियान चलाती रहती है. इन सबके बावजूद लोग ठगी के शिकार होने से खुद को नहीं बचा पा रहे हैं. ट्वीन सिटी भिलाई-दुर्ग से एक ऐसा ही मामला सामने आया है. यहां लोन दिलाने के नाम पर ठगी के बड़े खेल का खुलासा पुलिस ने किया है.
दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि अबतक 150 से ज्यादा लोग इस ठगी के शिकार हो चुके हैं. ठगी के शिकार अलग-अलग जिलों के हैं और अपनी शिकायत संबंधित थानों में दर्ज करा रहे हैं. पुलिस शिकायत के आधार पर आगे की जांच कर रही है.
दुर्ग में ठगी का अनोखा खेल
दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि पुलिस दर्ज शिकायतों के आधार पर आरोपियों की पतासाजी में जुटी है. पीड़ितों की शिकायत और जांच में ये बात सामने आई है कि ठगी करने वाले आरोपी लोगों को इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस कराने के नाम पर ठग रहे थे. पुलिस ने बताया कि ठगे गए ज्यादातर लोग दुर्ग, बालोद और पड़ोसी जिले बेमेतरा के रहने वाले हैं. पीड़ितों में कुछ दिव्यांग भी शामिल हैं.
ठगी में मुख्य वित्तीय लेनदेन दुर्ग जिले में होने के कारण मामला यहीं दर्ज किया गया है. अब पुलिस पूरे नेटवर्क, पैसों के लेनदेन और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है. जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में पीड़ितों और संदिग्धों की संख्या और बढ़ने की संभावना है. लोगों से मेरी अपील है कि वो सस्ती कीमत पर समाना खरीदने और जल्द अमीर बनने के चक्कर में इस तरह के लालच में नहीं पड़ें. अगर आप थोड़ी सी सावधानी रखेंगे तो ठगी के शिकार होने से बच जाएंगे: विजय अग्रवाल,एसएसपी
दिव्यांग भी बने ठगी के शिकार
दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि ठग लोगों को कम किस्तों में इलेक्ट्रॉनिक सामान उपलब्ध कराने और उसमें फायदा होने का लालच देते थे. इसके बाद पीड़ितों के नाम पर टीवी, फ्रिज, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस करवा दिया जाता. सामान असली लोगों की जगह आरोपियों या उनसे जुड़े लोगों के कब्जे में चला चला जाता और सामान को दोबारा बेच दिया जाता. इसका फायदा ठगों को होता जबकि उसकी ईएमआई और लोन चुकाने की जिम्मेदारी पीड़ितों के नाम पर होती. दुकान के मालिक या कंपनी लोन लेने वाले से फिर पैसे मांगती.
दुर्ग पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए बनाई टीमें
ठगी के इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग पुलिस ने जांच के लिए अलग-अलग टीमें बनाई हैं. पुलिस प्रार्थियों के बैंक खातों और ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है. इसके साथ ही आरोपियों और पीड़ितों के बीच हुई बातचीत का कॉल डिटेल भी खंगाल रही है.
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