केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने बुलंद की आवाज, बोले: कृषि दर पर मत्स्य पालकों को मिले बिजली
एसपी सिंह बघेल ने नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड की स्थापना की मांग की. मंत्री संजय निषाद बोले- यूपी में अब कट्टेवालों नहीं, पट्टेवालों का युग.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : February 28, 2026 at 9:59 AM IST
|Updated : February 28, 2026 at 10:45 AM IST
लखनऊ: देश को आर्थिक रूप से सम्पन्न और समृद्ध बनाने के लिए किसानों की स्थिति में सुधार जरूरी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार कार्य कर रही है, जिसका लाभ किसानों को मिल रहा है.
किसानों की आय में वृद्धि, उन्नत पशुपालन और उन्नत मत्स्य पालन से ही सम्भव है. कृषि दर पर मत्स्य पालकों को बिजली की आपूर्ति और यूपी में नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड के सेन्टर खोलने की आवश्यकता है.

पशुपालन, डेयरी और मत्स्य योजनाओं के माध्यम से किसानों की आय निश्चित रूप से दोगुनी हो सकती है. उत्तर प्रदेश मत्स्य विभाग की तरफ से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में पहली बार आयोजित दो दिवसीय मीन महोत्सव (एक्वा एक्सपो) के शुभारम्भ अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने ये बातें कहीं.
उन्होंने इस आयोजन के लिए प्रदेश सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस एक्सपो से मत्स्य क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के प्रसार, उद्यमिता संवर्द्धन और मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि के लिए समन्वित मंच उपलब्ध हो रहा है. इससे जमीनी समस्याओं के समाधान वैज्ञानिक और नवीन तकनीकी नवाचारों को व्यवहारिक रूप से समझने, मत्स्य पालन को अधिक लाभकारी बनाने और एक्वा पर्यटन को बढ़ावा देने पर बल मिलेगा.

इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मत्स्य मंत्री डा. संजय कुमार निषाद ने कहा कि प्रदेश सरकार और राज्य के मत्स्य पालकों के प्रयासों से मत्स्य पालन में उत्तर प्रदेश भारत का तीसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक राज्य बन गया है.
उन्होंने बताया कि प्रदेश में मछली में विकास दर 115.5 प्रतिशत है. राज्य का वार्षिक मत्स्य उत्पादन पिछले छह वर्षों में दोगुना होकर 13.3 लाख मीट्रिक टन हुआ है.

अमृत सरोवरों को मछली पालन योग्य बनाने, तालाबों के पट्टे समय से दिलाने और मत्स्य पालन में विज्ञान और तकनीकी के उपयोग पर विशेष बल दिया जा रहा है.
अनुदान के साथ-साथ तकनीकी ज्ञान देकर मत्स्य पालकों के विकास एवं सशक्तीकरण और उत्तर प्रदेश में एनएफडीबी के सेन्टर खोलने की दिशा में कार्य करने के लिए कहा गया. सरकार के प्रयासों से विजन-2047 में उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय मत्स्य पालन में प्रथम राज्य बन जाएगा.

मुख्यमंत्री की तरफ से वर्ष 2026-27 के बजट में मत्स्य विभाग के लिए पहली बार बड़ा उपहार दिया गया है. मत्स्य पालन से जुड़े किसानों की आय वृद्धि के लिए कुल 114.20 करोड़ की राज्य सहायतित नई मांग के रूप में स्वीकृत की गई है.
प्रदेश में पहली बार मीन महोत्सव-2026 (एक्वा एक्सपो 2026) का आयोजन किया जा रहा है जिसमें उत्तर प्रदेश के बाहर से मत्स्य उद्यमी, निवेशक के साथ-साथ वैज्ञानिक, प्रोफेसर, विशेषज्ञ, राज्य एवं केन्द्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री, अधिकारीगण भी शामिल हुए हैं.

उन्होंने कहा कि यह महोत्सव राज्य में मत्स्य पालन को औद्योगिक स्तर पर विकसित करने में मदद करेगा और प्रदेश के मत्स्य किसानों व मत्स्य उद्यमियों के लिए एक सशक्त मंच सिद्ध होगा.
वैज्ञानिकों और उद्यमियों के साथ सीधा संवाद किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने के साथ-साथ उनकी आय वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
इससे प्रत्येक मत्स्य किसान एवं मत्स्य उद्यमी को तकनीकी ज्ञान, योजनाओं की जानकारी और बाजार से सीधा जुड़ाव होगा. प्रदेश की जनता को व्यापार, एक्वा पर्यटन, पोषण सुरक्षा एवं रोजगार का लाभ मिलेगा.
एसडीएम करते हैं मनमानी, उन पर रोक लगाना जरूरी
इस मौके पर मत्स्य विभाग मंत्री डॉ संजय निषाद ने कहा कि निषादों को पट्टा देने में एसडीएम बड़ी मनमानी करते हैं. एसडीएम से ये अधिकारी छीना जाना चाहिए.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इसकी शिकायत की जाएगी और एसडीएम का ये अधिकार खत्म कराया जाएगा, जिससे निषादों को मत्स्य पालन के लिए आराम से पट्टा मिल सके.
उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की सरकार है. अब कट्टा वालों को पट्टा नहीं मिलता. जिसे पट्टा चाहिए होगा उसी को पट्टा मिलेगा. कट्टा वालों का समय समाप्त हो गया है अब पट्टा वालों का समय है.
उत्तर प्रदेश मत्स्य विकास निगम के अध्यक्ष रमाकान्त निषाद ने कहा कि नदियों से ब्रूडर लाकर निगम की हैचरियों में ब्रीडिंग कराकर गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज उपलब्ध कराया जा रहा है.
सभापति मत्स्य जीवी सहकारी संघ वीरू साहनी ने कहा कि समितियों के सदस्यों को प्रशिक्षण देकर क्षमता विकास करने पर जोर दिया जा रहा है.
प्रदेश सरकार के मुख्य सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि प्रदेश में पहली बार मीन महोत्सव के इस आयोजन में काफी अधिक संख्या में मत्स्य पालक किसान और विशेषज्ञ सम्मिलित हुए हैं. अच्छा बीज, फीड, तकनीक और उत्पादक को मार्केट से सीधे जोड़कर अगले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में पश्चिम बंगाल को पीछे छोड़ सकता है.
सलाहकार केवी राजू ने कहा कि इस उत्सव से प्रदेश को मत्स्य पालन क्षेत्र में आधुनिक लाभकारी और आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी.
राज्य सरकार की तरफ से मत्स्य उत्पादन और मछुवारे के कल्याण के लिए लाभकारी योजनायें संचालित की जा रही हैं. मीन महोत्सव में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यमों से उद्यमी और मछुवा समुदाय के लोग विशेष रूप से लाभान्वित होंगे.
अपर मुख्य सचिव मत्स्य मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि प्रदेश में छह लाख से अधिक जलक्षेत्र उपलब्ध हैं. मत्स्य पालक, विशेषज्ञ, उद्यमी और निवेशक एक साथ चर्चा कर प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से मत्स्य उत्पादन, उत्पादकता और किसानों की आय में वृद्धि कर सकते हैं.
पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसन्धान संस्थान (दुवासु) मथुरा में मत्स्य विज्ञान पर शोध कार्य प्रारम्भ हो गया है.
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