MMDR बिल पर केंद्रीय मंत्री संजय सेठ की पीसी, बोले- विधेयक को राजनीतिक चश्मे से ना देखें मुख्यमंत्री
MMDR संशोधन बिल को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा विरोध के बाद केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने नाराजगी जताई. भुवन किशोर झा की रिपोर्ट.

Published : August 21, 2026 at 5:44 PM IST
रांची: MMDR संशोधन बिल को लेकर उठे सियासी घमासान के बीच केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इसकी सराहना की है. उन्होंने कहा कि इससे झारखंड जैसे राज्य को फायदा होगा.
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री ने बिल का किया स्वागत
दरअसल, रांची स्थित बीजेपी कार्यालय में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए संजय सेठ ने एमएमडीआर (खान एवं खनिज विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का स्वागत करते हुए बताया कि यह कानून राज्यों की स्थिति और दिशा को सुधारेगा तथा खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लाकर भारत को 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर ले जाने में मददगार साबित होगा.
मुख्यमंत्री द्वारा बिल के विरोध पर जताई नाराजगी
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के द्वारा इस विधेयक का विरोध किए जाने पर नाराजगी जताई. उन्होंने बताया कि इसे राजनीतिक चश्मे से न देखकर. झारखंड की भलाई के लिए सोचना होगा. उन्होंने कहा कि इस बदलाव से झारखंड की तकदीर और तस्वीर बदल जाएगी.
बिल 'पॉलीटिकल एजेंडा' नहीं: संजय सेठ
केन्द्रीय रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि ये बिल पॉलीटिकल एजेंडा नहीं बल्कि देश का एजेंडा है. यदि ईश्वर ने मिनरल दिया है, तो इसका एक-एक ग्राम का इस्तेमाल होना चाहिए. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इसका स्वागत करना चाहिए था कि भारत सरकार ने एक दृढ़ इच्छाशक्ति से ऐसे विधेयक को लाकर राज्यों के विकास के बारे में सोचा है.
📍रांची, प्रेस कॉन्फ्रेंस
— Sanjay Seth (@SethSanjayMP) August 21, 2026
अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस,
खनिज राजस्व में होगी बढ़ोतरी।
MMDR विधेयक-2026 का सबसे बड़ा प्रभाव अवैध खनन और खनिज चोरी पर प्रभावी रोक के रूप में सामने आएगा।
जितना अधिक वैध खनन बढ़ेगा और जितना अधिक अवैध खनन रुकेगा, उतना ही अधिक राजस्व सरकार को मिलेगा और… pic.twitter.com/Q1ae3HIT6Z
अवैध माइनिंग पर लगनी चाहिए रोक: संजय सेठ
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने एमएमडीआर बिल का स्वागत करते हुए बताया कि बिल के माध्यम से अवैध माइनिंग पर रोक लगे और लीगल माइनिंग से आर्थिक संपन्नता हो, यही सोच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार को माइनिंग स्टेट पश्चिम बंगाल, ओडिशा जैसे राज्यों से प्रतियोगिता करना चाहिए कि किस तरह से वहां प्रोडक्शन होता है, कौन सबसे ज्यादा उत्पादन करता है और कौन सबसे सस्ता दे सकता है.
उन्होंने कहा कि सस्ते की बजाय एकरूपता के साथ यदि इसे दिया जाए, तो उसमें भी झारखंड को फायदा होगा. सभी राज्यों की लैंडिंग कास्ट 1221 के दर से एक समान है लेकिन ओडिशा 1708 में दे रहा है और हम 2460 में दे रहे हैं. इस अंतर को पाटना होगा, तभी राज्य की स्थिति और बेहतर होगी.
विधेयक को 'विकसित भारत' के चश्मे से देखने की जरूरत
उन्होंने आगे बताया कि इसे 'विकसित भारत' के चश्मे से देखना है. जाहिर तौर पर इसके माध्यम से माइनिंग क्षेत्र का विकास होगा अच्छे अस्पताल होंगे, अच्छे स्कूल होंगे. बच्चों की पढ़ाई लिखाई बेहतर होगी यह तमाम चीजों को सोचना होगा.
उन्होंने कहा कि यदि माइनिंग स्टेट को देखें तो झारखंड में पिछले वित्तीय साल में 11 कोल ब्लॉक का लीज हुआ लेकिन एक भी चालू नहीं हुआ. वहीं ओडिशा में 79 कॉल ब्लॉक में से इस कालखंड में 35 चालू हो गया.
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