नॉन फॉसिल एनर्जी से बिजली उत्पादन का शेयर 54 फीसदी पहुंचा, खट्टर बोले - ऊर्जा क्षेत्र में भारत बन रहा है आत्मनिर्भर
वर्तमान में परमाणु ऊर्जा से 9 गीगाबाइट बिजली उत्पादन हो रहा है. 8 गीगाबाइट पाइपलाइन में है. 2047 तक 100 गीगाबाइट का लक्ष्य है.

Published : June 27, 2026 at 6:22 PM IST
करनाल: केंद्रीय ऊर्जा, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल शनिवार को अपने संसदीय क्षेत्र करनाल पहुंचे, जहां उन्होंने आम नागरिकों की समस्याएं सुनीं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की. जन शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए. इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने देश के ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलावों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की.
जनता के बीच मंत्री, समस्याओं के समाधान का भरोसा: करनाल पहुंचते ही केंद्रीय मंत्री ने लोगों से सीधे संवाद किया और उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना. उन्होंने कहा कि "सरकार आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और प्रशासन को भी जवाबदेही के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं."
ऊर्जा क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग: मीडिया से बातचीत के दौरान मनोहर लाल ने कहा कि "भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. देश अब स्वच्छ एवं नॉन-फॉसिल ऊर्जा क्षमता के मामले में पारंपरिक फॉसिल ऊर्जा से आगे निकल चुका है." उन्होंने बताया कि "देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता में लगभग 54 प्रतिशत हिस्सेदारी अब स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की है. आने वाले वर्षों में बिजली की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए सौर और जल विद्युत परियोजनाओं का विस्तार और तेज किया जाएगा."

24 घंटे स्वच्छ बिजली के लिए स्टोरेज पर जोर: केंद्रीय मंत्री ने कहा कि "सौर ऊर्जा दिन के समय उपलब्ध होती है, इसलिए रात और पीक आवर्स की जरूरतों को पूरा करने के लिए ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करना बेहद जरूरी है. इसी दिशा में बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है ताकि देश को चौबीसों घंटे स्वच्छ और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराई जा सके."
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दिया संकेत: ईंधन कीमतों को लेकर पूछे गए सवाल पर मनोहर लाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियां लगातार बदलती रहती हैं. उन्होंने कहा कि "जब वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ी थीं, तब सरकार ने पूरा बोझ जनता पर नहीं डाला था. आने वाले समय में आय-व्यय के संतुलन और अंतरराष्ट्रीय हालात के आधार पर आगे के फैसले लिए जाएंगे." उन्होंने उम्मीद जताई कि "अगले कुछ महीनों में तस्वीर और स्पष्ट होगी."
AI और डेटा सेंटर बढ़ाएंगे बिजली की मांग: मनोहर लाल ने कहा कि "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटरों के तेजी से विस्तार के कारण देश को भविष्य में लगभग 30 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली की आवश्यकता होगी. इस चुनौती को अवसर में बदलने के लिए सरकार सभी उपलब्ध ऊर्जा स्रोतों के विकास पर एक साथ काम कर रही है."
न्यूक्लियर पावर को मिलेगा नया विस्तार: केंद्रीय मंत्री ने बताया कि "देश में पहले से कई परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं संचालित हैं और नई परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है. सरकार ने वर्ष 2047 तक 100 गीगाबाइट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है. नए प्रावधानों के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी भी बढ़ाई जाएगी, जिससे इस क्षेत्र को नई गति मिलेगी.
ग्रीन हाइड्रोजन बनेगा भविष्य का ईंधन: मनोहर लाल ने कहा कि "ग्रीन हाइड्रोजन स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल ईंधन है, जो प्रदूषण कम करने में अहम भूमिका निभाएगा." उन्होंने बताया कि "हाइड्रोजन आधारित बसों और ट्रेनों का संचालन शुरू हो चुका है और आने वाले वर्षों में इसका दायरा और बढ़ाया जाएगा. सरकार परिवहन क्षेत्र में इसे बड़े पैमाने पर इसे अपनाने की दिशा में कार्य कर रही है."
EV क्रांति को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन: इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार कई नई योजनाएं लागू कर रही है. मनोहर लाल ने बताया कि "नए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर पंजीकरण शुल्क में लगभग 10 प्रतिशत तक राहत दी जाएगी. वहीं पुराने वाहनों को बदलकर EV खरीदने वालों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा. कुल मिलाकर 25 से 30 प्रतिशत तक की आर्थिक राहत देने की व्यवस्था तैयार की जा रही है."
देशभर में तैयार होगा चार्जिंग नेटवर्क: उन्होंने कहा कि "इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए देशभर में चार्जिंग स्टेशनों का व्यापक नेटवर्क विकसित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य लोगों को सुविधाजनक और निर्बाध चार्जिंग सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि EV अपनाने में किसी प्रकार की परेशानी न हो."
ऊर्जा आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते कदम: मनोहर लाल ने कहा कि "स्वच्छ ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर भारत ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. आने वाले वर्षों में यही क्षेत्र देश की आर्थिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण का मजबूत आधार बनेगा."
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