RDG पर गजेंद्र शेखावत का बड़ा बयान- 'अपनी गलतियों का ठीकरा दूसरों पर नहीं थोपें, वित्तीय अनुशासन लाने की जरूरत'
RDG पर शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि, राज्यों को वित्तीय अनुशासन पालन करने की जरूरत है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 8, 2026 at 6:58 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में RDG बंद होने के बाद राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर विमर्श शुरू हो गया है. प्रदेश में सियासी हलचल भी तेज हो गई है. रविवार (8 फरवरी) को हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इसी विषय पर कैबिनेट बैठक भी बुलाई. इसी बीच शिमला पहुंचे केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बड़ी बात कही है. गजेंद्र शेखावत ने कहा कि, "अपनी गलतियों का ठीकरा दूसरों पर नहीं थोपा जा सकता. राज्यों को वित्तीय अनुशासन का पालन करने की जरूरत है."
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि, "किसी परिवार, राज्य या देश के लिए वित्तीय अनुशासन का पालन करना आवश्यक है, क्योंकि आस-पास के देश वित्तीय अनुशासन न अपनाने के चलते कोलैप्स हुए हैं. देश में भी विभिन्न राज्यों के द्वारा वित्तीय अनुशासन न अपनाने से राज्यों पर बढ़ रहा कर्ज का बोझ है. फिस्कल डेफिसिट कम करने पर केंद्र सरकार का फोकस है."
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, "कोविड से पहले फिस्कल डेफिसिट 4 प्रतिशत के नीचे ले आए थे. अब सरकार फिर से फिस्कल डेफिसिट 4.3 फीसदी से नीचे लाने के लिए प्रयास कर रही है. राज्यों की खराब आर्थिक स्थिति और वित्तीय अनुशासन न होने के चलते 12वें वित्त आयोग की ओर से दी गई RDG आगामी वित्त आयोगों की ओर से भी अस्थाई रूप से RDG जारी रखी गई. 15वें वित्त आयोग ने अप्रत्याशित वृद्धि के साथ हिमाचल को आरडीजी प्रदान की, लेकिन राज्य वित्तीय अनुशासन नहीं ला पाए और चुनावी दृष्टिकोण से योजनाएं बनाई गई. अपनी गलतियों का ठीकरा दूसरों पर नहीं थोपा जा सकता. इसके बावजूद केंद्र अन्य योजनाओं से राज्यों को सहयोग कर रहा है."
विकसित भारत के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही केंद्र सरकार
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि, केंद्र सरकार विकसित भारत के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है. इस बार की केंद्रीय बजट में इसी लक्ष्य की झलक दिखाई है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विकसित भारत के लक्ष्य और सतत विकास का बजट पेश किया है, जिसमें देश के सभी क्षेत्रों और वर्गों का ध्यान रखा गया है. वहीं, हिमाचल के परिपेक्ष में बजटीय प्रावधानों का जिक्र करते हुए शेखावत ने कहा कि केंद्र हिमाचल को सशक्त और विकसित बनने के लिए पूरा सहयोग कर रहा है.
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार तय लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रही है. सरकार ने देश को फ्रैजाइल 5 देशों की सूची से निकालकर दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बनाया है और तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि, केवल राजनीतिक लाभ से ऊपर उठकर विकास के लिए काम कर रहे हैं. केंद्रीय बजट सभी वर्गों के सतत विकास के विकास का बजट है, जिसमें देश में सभी वर्गों के सतत विकास और नागरिकों क्षमता विकास को सरकार ने कर्तव्य के रूप में स्वीकारा है. ग्लोबल परिस्थितियों को देखते हुए मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को विकसित करने पर फ़ोकस किया गया है.
'हिमाचल को सशक्त और विकसित बनने के लिए सहयोग कर रहा केंद्र'
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच से देश के हेरिटेज के संरक्षण को केंद्र में रखा गया है. MSME को मजबूत करने पर फोकस किया गया है और देश में तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर जोर दिया गया है. इस बजट में सतत विकास को बनाए रखने पर जोर दिया गया है. उन्होंने कहा कि, युवाओं की आकांक्षाओं के मुताबिक बजट बनाने के लिए 50 हजार युवाओं ने दिए सुझाव दिए थे, जिसके आधार पर बजट में शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता पर फोकस किया गया है. 12 लाख 50 हजार करोड़ इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर खर्च होंगे.
'हिमाचल और पर्वतीय राज्यों को केंद्र सरकार ने दी प्राथमिकता'
गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि, हिमाचल और पर्वतीय राज्यों को केंद्र की भाजपा सरकार ने प्राथमिकता दी है. भाजपा सरकार ने हिमाचल का स्पेशल स्टेटस फिर से बहाल किया है. राज्यों के विकास के लिए स्वायत्तता मिलनी चाहिए. राज्यों को करों में हिस्सेदारी में 31 फीसदी हिस्सेदारी मिलती है, जिसे 15वें वित्त आयोग ने 41 फीसदी और हिमाचल को 2004-14 तक 12,639 करोड़ की हिस्सेदारी मिली, जो अब 76800 करोड़ हो गई है. UPA में 50 हजार करोड़, 2014 से 1, लाख 41 हजार करोड़ का अनुदान मिला है. बजट के जरिए हिमाचल को सशक्त और विकसित बनने के लिए सहयोग कर रहा केंद्र.
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