नागौरी मैथी को जल्द मिलेगा GI टैग, सांसद बेनीवाल बोले-किसानों की आय होगी तिगुनी
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सांसद को दी पत्र के जरिए बताया कि नागौरी मैथी को GI टैग दिलाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है.

Published : February 27, 2026 at 3:55 PM IST
नागौर/जयपुर: नागौर क्षेत्र की प्रसिद्ध नागौरी पान मैथी को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) दिलाने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है. यह जानकारी केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल को पत्र के जरिए दी. सांसद बेनीवाल ने कहा कि नागौरी पान मैथी को जीआई टैग मिलने से क्षेत्र के किसानों को पारंपरिक और विशिष्ट उपज का उचित मूल्य मिलेगा. इससे उत्पाद की ब्रांड पहचान मजबूत होगी. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए अवसर खुलेंगे. यह पहल नागौर जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण होगी. नागौर की विशिष्ट पहचान देश-दुनिया में स्थापित होगी. सांसद ने कहा कि इससे किसानों की आय तिगुना तक बढ़ने की उम्मीद है.
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, नागौरी पान मेथी के जीआई पंजीकरण के लिए आवेदन 13 अगस्त 2024 को किया गया. प्रारंभिक परीक्षण के दौरान कुछ कमियों की ओर संकेत किया गया. इनके समाधान के लिए आवेदक को निर्देश दिए थे. इन कमियों का आंशिक समाधान किया जा चुका है. 6 फरवरी 2026 को अहमदाबाद में परामर्शदात्री समूह की बैठक में आवेदन का विस्तृत मूल्यांकन किया गया. समिति की अनुशंसा के आधार पर अब अनुपालन रिपोर्ट जारी की जाएगी. औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद आवेदन को जीआई जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा. सांसद बेनीवाल ने बताया कि पान मैथी को जीआई टैग दिलाने के लिए केंद्रीय मंत्री गोयल से व्यक्तिगत मुलाकात कर किसानों की मांग को प्रमुखता से रखा.
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मैथी का भौगोलिक ग्राफ और अपडेट
पैदावार (उत्पादन): वैज्ञानिक शोध और कृषि सर्वेक्षणों के अनुसार पान मैथी की पत्ती और बीज दोनों कृषि उत्पाद के रूप में मूल्यवान हैं. अच्छी बीज दर तथा पोषक तत्व प्रबंधन पर उत्पादन प्रभावित होता है. पत्तों की ताजी उपज और सूखे बीज की पैदावार पर उचित खेती से सार्थक आर्थिक लाभ मिलता है.
कितने हैक्टेयर में बुआई: कृषि रिपोर्ट के अनुसार लगभग 4,100 से 4500 हैक्टेयर के आसपास नागौर जिले में पान मैथी की बुआई होती हैं.
बाजार भाव बीज: नागौर मंडी में मैथी बीज का भाव आम तौर पर 4,800–5,400 रुपए प्रति क्विंटल रहता है.
सूखी पत्तियां: साल 2025 में पत्तेदार मैथी (सूखी पत्तियां) की कीमत लगभग 4,425 रुपए प्रति क्विंटल रिकॉर्ड हुई है. मतलब यह भी लगभग 44–45 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास बिकती है.
किसान के भाव (सूचना): स्थानीय व्यापारी बताते हैं, किसान सीधे खेत से पान मैथी करीब 60–150 रुपए प्रति किलो (अक्सर ताजी पत्ती/सूखी पत्ती के अनुसार) बेचते हैं, जबकि उद्योग/ब्रांड इसे 700–1,500 रुपए प्रति किलो तक बेच सकते हैं.
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क्यों खास है नागौर की पान मैथी: नागौर का मौसम शुष्क और वर्षा सीमित होती है. यहां की मिट्टी और जलवायु पान मैथी के लिए अनुकूल साबित होती है. कम पानी में भी यह फसल अच्छी वृद्धि करती है. इससे किसानों की सिंचाई लागत एवं जोखिम घटता है. यही कारण है कि सूखे की स्थिति में भी मैथी किसानों की भरोसेमंद फसल है. मैथी की पत्तियां चौड़ी, मुलायम और गहरे हरे रंग की होती हैं. इसमें अलग तरह की प्राकृतिक खुशबू और हल्का कड़वापन होता है, जो इसे अन्य क्षेत्रों की मैथी से अलग बनाता है. यही विशिष्ट स्वाद इसे देश के बड़े बाजारों और मसाला उद्योग में खास मांग दिलाता है. स्थानीय जलवायु और मिट्टी की संरचना के कारण इस फसल पर कीटों और रोगों का प्रकोप अपेक्षाकृत कम होता है. इससे रसायनिक दवा का उपयोग कम करना पड़ता है, जो उत्पादन लागत घटाने के साथ गुणवत्ता बेहतर बनाता है. नागौरी पान मैथी की पत्तियां सूखने के बाद भी खुशबू और रंग को लंबे समय तक बनाए रखती हैं. यही वजह है कि इसे सूखी मैथी (ड्राई लीफ) और मसाले के रूप में दूर-दराज के बाजारों तक आसानी से भेजा जा सकता है. इसकी लंबी शेल्फ लाइफ व्यापारियों और निर्यातकों के लिए भी फायदेमंद है.
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GI टैग से मिलेंगे फायदे: नागौरी पान मैथी को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिलता तो क्षेत्र की कृषि पहचान मजबूत होगी. केवल नागौर जिले में उत्पादित मैथी ही नागौरी पान मैथी नाम से बाजार में बेची जा सकेगी. नकली और अन्य क्षेत्रों की मैथी को इस नाम से बेचने पर रोक लगेगी. उत्पाद की मौलिकता सुरक्षित रहेगी. किसानों को उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा. अलग ब्रांड पहचान बनने से बाजार में प्रीमियम दाम मिल सकते हैं. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग बढ़ने से निर्यात के नए अवसर खुलेंगे. व्यापारिक दृष्टि से यह कदम महत्वपूर्ण है. ब्रांड वैल्यू मजबूत होने से स्थानीय मंडियों में कारोबार बढ़ेगा. किसानों, व्यापारियों व श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा. कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि GI टैग जिले की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे सकता है.
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