मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की ग्रुप-2 सब ग्रुप 4 परीक्षा में अयोग्य व्यक्ति मैरिट में कैसे? हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
2022-23 में हुई थी ग्रुप 2 के सब ग्रुप 4 परीक्षा, जो योग्य नहीं वे भी मैरिट में पहुंचे, कोर्ट ने कहा- इस तरह भर्ती प्रक्रिया सही नहीं

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 27, 2026 at 8:04 PM IST
|Updated : February 27, 2026 at 8:17 PM IST
जबलपुर : मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित 2022-23 की ग्रुप 2 के सब ग्रुप 4 परीक्षा में गड़बड़ी का मामला सामने आया है. कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा अयोग्य व्यक्तियों को मेरिट सूची में स्थान दिए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. याचिका में कहा गया कि विभिन्न पदों में ऐसे लोग भी मैरिट में आ गए जो उन पदों के लिए योग्य ही नहीं थे, इससे उन अभ्यर्थियों का हक मारा गया जो वास्तव में योग्य थे लेकिन अयोग्य अभ्यर्थियों के आगे होने से पीछे रह गए या मैरिट में नहीं आ पाए.
2022-23 में इन पदों के लिए हुई थी परीक्षा
याचिकाकर्ता सुधीर सिंह व अन्य की ओर से मध्य प्रदेश कर्मचारी मंडल के खिलाफ ये याचिका दायर की गई है. याचिका में बताया गया कि वर्ष 2022-23 में मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने ग्रुप 2 के सब ग्रुप 4 में 9 हजार पदों के लिए भर्ती का विज्ञापन जारी किया था, जिसमें सहायक संपरीक्षक, सहायक जनसंपर्क अधिकारी, सहा. नगर निवेक्षक, सहा. राजस्व अधिकारी, सहा. अग्नि शमन अधिकारी, पटवारी व समकक्ष पदों के लिए सीधी व बैकलॉग भर्ती की जानी थी.

अयोग्य अभ्यर्थियों के भी मैरिट में नाम
विज्ञापन जारी होने के बाद परीक्षा आयोजित की गई और रिजल्ट जारी किए गए लेकिन लंबे समय तक नियुक्ति प्रदान नहीं की गई थी. चार हजार अभ्यर्थियों के नाम चयन सूची पर वेटिंग लिस्ट में थे, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 90 दिनो में वेरिफिकेशन कर चयन सूची जारी करने के आदेश जारी किए थे. याचिका में आरोप लगाते हुए कहा गया कि सहायक नगर निवेक्षक, सहायक अतिक्रमण निरोधक अधिकारी के 86 पदों के लिए चयनित उम्मीदवारों में सिर्फ 10 अभ्यर्थियों के पास ही मास्टर्स डिग्री है. नियमानुसार उक्त पदों के लिए मास्टर डिग्री अनिर्वाय है, अयोग्य होने के बावजूद भी उन्हें मेरिट सूची में स्थान प्रदान किया गया, जिससे उन अभ्यर्थियों का हक मारा गया जो सचमुच में योग्य थे.
कोर्ट ने मांगा जवाब, अन्य पदों में भी हो सकती है गड़बड़ी
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित 2022-23 की ग्रुप 2 के सब ग्रुप 4 परीक्षा के रिजल्ट को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि अगर भर्ती प्रक्रिया में ही गड़बड़ी है, तो उस भर्ती को सही नहीं ठहराया जा सकता है. इस टिप्पणी के साथ युगलपीठ ने आवेदकों को जवाब पेश करने के लिए समय प्रदान करते हुए अगली सुनवाई 7 अप्रैल को निर्धारित की है. वहीं, इस मामले में अन्य पदों में भी इस तरह की गड़बड़ी को लेकर याचिका दायर करने की बात कही जा रही है.
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दरअसल, इस भर्ती परीक्षा में पटवारी भर्ती के साथ सहायक संपरीक्षक, सहायक जनसंपर्क अधिकारी, सहा. नगर निवेक्षक समेत कई पदों के लिए परीक्षा हुई थी, और परीक्षा से पहले एलिजिबिलिटी कंफर्म करने के लिए डॉक्यूमेंट्स अपलोड करने की कोई सुविधा नहीं दी गई, इससे ऐसे सभी पदों के लिए वे अभ्यर्थी भी परीक्षा में शामिल हो गए, जो योग्य नहीं थे, इससे उन अभ्यर्थियों का हक मारा गया, जो उन पदों के लिए सारी शर्तें पूरी कर रहे थे.

