यात्री बेहाल, रेलवे बेबस: रिजर्व कोच में अनऑथराइज्ड यात्रियों से परेशानी, अपनी सीट पर भी सफर करना मुश्किल
आरक्षित सीटों पर बैठे यात्री रेल मदद एप पर शिकायतें करते हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा.

Published : September 1, 2026 at 12:37 PM IST
कोटा: त्यौहार या फिर छुट्टियों के अवसर पर यात्री समय से अपना आरक्षण करवा लेते हैं या फिर तत्काल में भी रिजर्व टिकट ले लेते हैं, लेकिन त्योहार और छुट्टियों के अवसर पर उन्हें अपनी सीट पर सफर करने में भी परेशानी आ रही है. ऐसा स्लीपर और सेकंड सिटिंग के कोच में ही नहीं, अब तो एयर कंडीशन कोचों में भी होने लगा है, जहां पर अनऑथराइज्ड पैसेंजर पहुंच जाते हैं. उनके बड़ी संख्या में होने पर उन्हें कुछ कहा भी नहीं जाता है. यहां तक कि यात्री रेल मदद पर शिकायत करते हैं, लेकिन अधिकांश बार उन्हें समाधान भी नहीं मिल पाता है.
हालांकि कोटा रेल मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन का कहना है कि त्योहार या सीजन में शिकायतें बढ़ जाती हैं, जिनका त्वरित समाधान किया जा रहा है. अनऑथराइज्ड पैसेंजरों को आरपीएफ के जरिए यथासंभव ट्रेन के दूसरे कोच में भेजा भी जाता है. टिकट चेकिंग स्टाफ द्वारा उन पर जुर्माना भी लगाया जा रहा है, रेलवे के नए नियमों के अनुसार भी जुर्माना लिया जा रहा है. अब सख्ती और बढ़ाने की तैयारी हम लोग कर रहे हैं. त्योहारों के दौरान अतिरिक्त यात्रीभार को देखते हुए रेलवे विशेष ट्रेनों का संचालन भी कर रही है.

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एसी या स्लीपर कोई कोच अछूता नहीं: यात्री जसप्रीत सिंह सैनी ने शिकायत की है कि वह ट्रेन नंबर 12926 पश्चिम एक्सप्रेस के थर्ड एसी में सफर कर रहे थे, लेकिन जनरल कोच के यात्री बड़ी संख्या में प्रवेश कर गए थे, जिससे अन्य सभी को परेशानी हो रही थी. उन्होंने यह भी शिकायत की है कि आरपीएफ और टीटीई क्या कर रहे हैं? इसी तरह से नंदित नामा ने शिकायत की है कि वह ट्रेन के स्लीपर कोच में सफर कर रहे थे, लेकिन बड़ी संख्या में जनरल और टिकट वाले यात्री उसमें चढ़ गए, जिससे टॉयलेट जाने में भी उन्हें दिक्कत आ रही थी. सक्षम ने शिकायत की है कि वह ट्रेन नंबर 12904 गोल्डन टेंपल मेल में सफर कर रहे थे, जिसमें बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए थे.
इसी तरह से उदयपुर निवासी डॉ. कुंजन आचार्य का कहना है कि मेवाड़ एक्सप्रेस में दिल्ली से चलने पर इस ट्रेन में बड़ी संख्या में अप-डाउन करने वाले प्रवेश कर जाते हैं. वे यात्रियों से अपनी सीट पर जगह देने के लिए बोलते हैं और जबरन भी बैठ जाते हैं. स्थिति ऐसी हो जाती है कि यात्री टॉयलेट तक भी नहीं जा पाता है. करीब दो घंटे का यह सफर इतना दुविधा भरा होता है, जिसमें काफी परेशानी होती है. रेलवे को इस दौरान कोई शटल या अप-डाउन करने वालों के लिए अलग ट्रेन चलानी चाहिए या फिर इस ट्रेन के टाइम में बदलाव करना चाहिए.
S6 is full frol this type of people in the train
— VLOOGER SAKSHAM (@SakshamSin31001) September 1, 2026
Pnr number 2261713127
Train number 12904
Berth number S6 39 pic.twitter.com/9sC1GBuu1Q
यह समस्या गोल्डन टेंपल मेल कई ट्रेनों में: कोटा रेल मंडल में यह समस्या कोटा से रतलाम, दिल्ली और जयपुर के बीच चलने वाली ट्रेनों में ज्यादा सामने आ रही है. कोटा रेल मंडल की अधिकांश ट्रेनें इसी रूट से निकलती हैं. लंबी दूरी की ट्रेनें भी इनमें होती हैं, जो प्रभावित होने से नहीं चूक रही हैं. इन ट्रेनों में ट्रेन नंबर 12963 हजरत निजामुद्दीन-उदयपुर सिटी मेवाड़ एक्सप्रेस, ट्रेन नंबर 12904 अमृतसर-मुंबई सेंट्रल गोल्डन टेंपल मेल, ट्रेन नंबर 19020 हरिद्वार-बांद्रा टर्मिनस, ट्रेन नंबर 12926 पश्चिम एक्सप्रेस, ट्रेन नंबर 12182 दयोदय एक्सप्रेस, ट्रेन नंबर 12465 इंदौर-जोधपुर, ट्रेन नंबर 12466 जोधपुर-इंदौर, ट्रेन नंबर 19037 अवध एक्सप्रेस, ट्रेन नंबर 19019 बांद्रा टर्मिनस से हरिद्वार, ट्रेन नंबर 12903 मुंबई सेंट्रल-अमृतसर गोल्डन टेंपल मेल व ट्रेन नंबर 12964 उदयपुर सिटी-हजरत निजामुद्दीन मेवाड़ एक्सप्रेस में ज्यादा दिक्कत है.
@RailMinIndia @RailwaySeva Please take strict action against passengers travelling in Sleeper Class coaches with unreserved/general tickets. It becomes extremely uncomfortable for passengers with valid reserved tickets—even going to the washroom (WC) becomes difficult due to ovc pic.twitter.com/hHjEu18wM5
— Vandit Nama (@VanditNama_atX) August 30, 2026
यहां आती है समस्या: त्योहारों के अवसर पर ही ज्यादा समस्या यहां पर आती है. दिल्ली से मथुरा के बीच में राखी, होली, दीवाली, जन्माष्टमी और अन्य त्योहारों के दौरान समस्या आती है, वहीं अब अप-डाउनर्स भी यहां पर काफी ज्यादा परेशान करते हैं. छुट्टी होने पर जयपुर से सवाई माधोपुर और कोटा के बीच में काफी समस्या आ जाती है. वीकेंड पर भी समस्या रहती है. इसी तरह से बात की जाए तो कोटा से रतलाम के बीच में भी छुट्टियों के दौरान ही यह समस्या आती है. महाशिवरात्रि के आसपास या सावन के महीने में कोटा से नागदा व उज्जैन के बीच भी इस तरह की समस्या बड़ी भारी रहती है. सावन के महीने में यह समस्या चित्तौड़गढ़ से कोटा के बीच भी रहती है. नवरात्र के अवसर पर कोटा से इंद्रगढ़ और सवाई माधोपुर से इंद्रगढ़ के बीच भी समस्या बढ़ जाती है. इसी तरह से चौथ का बरवाड़ा स्टेशन के आसपास भी प्रॉब्लम रहती है.
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यात्री बेहाल रेलवे हो जाता है बेबस: रेल मदद के जरिए लंबी शिकायतें कोटा रेल मंडल में भी आ रही हैं. इन शिकायतों पर रेलवे भी बेबस जैसा ही नजर आता है. अधिकांश जगहों पर यात्रियों को नहीं उतारा जाता है. कई बार तो स्थिति ऐसी होती है कि आरपीएफ स्टाफ भी इन कोचों तक नहीं पहुंच पाता है. दीपावली, होली, राखी और अन्य बड़े त्योहारों के अवसर पर तो लंबी दूरी की ट्रेनें, जो मुंबई, अहमदाबाद, सूरत व वडोदरा से मथुरा की तरफ से बिहार और उत्तर प्रदेश जाती हैं, उनमें ये हालात आम हो जाते हैं. ये ट्रेनें अधिकांशतः ओवरक्राउडेड होकर आती हैं, जिनमें बड़ी संख्या में वहां काम करने वाले कामगार होते हैं. ये वेटिंग टिकट लेकर भी बैठ जाते हैं, या परिवार में एक का कन्फर्म होने पर अन्य वेटिंग वाले सदस्य साथ आ जाते हैं, इसीलिए काफी समस्या होती है.
@RailMinIndia @RailwaySeva 12239 Hisar Duronto Express — A large number of passengers without valid tickets/reservations have entered the 2S coach and are occupying seats, causing inconvenience to passengers. Please take immediate action and remove unauthorized passengers.
— Harish Prajapati (@HarishEleven) August 31, 2026
हालांकि रेलवे ने नए नियम के अनुसार वेटिंग टिकट पर यात्रा की मनाही की है, लेकिन इन लोगों की संख्या इतनी होती है कि ये जनरल कोच में भी एडजस्ट नहीं हो पाते हैं. ये ट्रेनें कोटा होकर गुजरती हैं और लंबी दूरी की होने के चलते दूसरे स्टेशनों से यात्री चढ़ जाते हैं. यहां पर कम समय के लिए ही स्टॉपेज रहता है, ऐसे में आरपीएफ व चेकिंग स्टाफ भी यहां ज्यादा कुछ नहीं कर पाता है और वे इन कोचों में नहीं पहुंच पाते हैं. मेवाड़ एक्सप्रेस की बात की जाए तो उसमें यह समस्या रोज ही हो रही है, जहां दिल्ली के नजदीक से मथुरा तक अप-डाउन करने वाले लोग रोज चढ़ जाते हैं और रिजर्व कोच में जाकर बैठ जाते हैं.
ज्यादा प्रभावित सेक्शन: दिल्ली-मथुरा के बीच पलवल, फरीदाबाद, बल्लभगढ़, कोसीकलां; जयपुर-सवाई माधोपुर के बीच दुर्गापुरा, वनस्थली, ईसरदा, चौथ का बरवाड़ा, निवाई; सवाई माधोपुर-गंगापुर सिटी, श्री महावीरजी, बयाना; नागदा-कोटा में रामगंजमंडी, भवानीमंडी.
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