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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का बायसन प्रोजेक्ट कैसे सफल हुआ? ट्रेनिंग लेने पहुंचे आंध्र प्रदेश के अफसर

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में आंध्र प्रदेश के नागार्जुन श्री सेलम टाइगर रिजर्व के वन अधिकारी को गौर के पुनर्स्थापन एवं सप्लीमेंटेशन की ट्रेनिंग.

Andhra Pradesh IFS officers training in Bandhavgarh
बांधवगढ़ में आंध्र प्रदेश के IFS अधिकारी को दी गई ट्रेनिंग (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : November 28, 2025 at 11:10 AM IST

3 Min Read
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उमरिया: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की पहचान अब देश और विदेशों तक पहुंच चुकी है, तभी तो यहां विदेशी पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है. ये टाइगर रिजर्व वन्य प्राणी, जंगल और जैव विविधता के लिए फेमस है, लेकिन अब ये टाइगर रिजर्व वन्य प्राणियों के पुनर्स्थापना को लेकर भी प्रसिद्ध हासिल कर रहा है.

कुछ साल के अंदर ही बांधवगढ़ में सफल गौर (इंडियन बॉयसन) प्रतिस्थापना का काम किया गया, इसीलिए अब यहां देश के दूसरे टाइगर रिजर्व से भी अधिकारी कर्मचारी अनुभव साझा करने पहुंच रहे हैं. जिसके तहत आंध्र प्रदेश के नागार्जुन श्री सेलम टाइगर रिजर्व के अधिकारी बांधवगढ़ में ट्रेनिंग लेने पहुंचे.

NAGARJUNA SRI SAILAM TIGER RESERVE
गौर ट्रांसलोकेशन तकनीक की दी गई ट्रेनिंग (ETV Bharat)

आंध्र प्रदेश के अधिकारी ले रहे हैं ट्रेनिंग

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ने बाघ, जंगली हाथी, बारहसिंघा और गौर वन्यप्राणी प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है और संरक्षण के काम में 3 नए आयाम स्थापित कर रही है. अभी हाल ही में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ने गौर के पुनर्स्थापन एवं सप्लीमेंटेशन में सफलता हासिल की.

इसके बाद इस काम का अनुभव साझा करने के लिए आंध्र प्रदेश के नागार्जुन श्री सेलम टाइगर रिजर्व से दो भारतीय वन सेवा अधिकारी अनुराग मीना (IFS-2020) और अब्दुल रऊफ (IFS-2022) को बांधवगढ़ में विशेष फील्ड ट्रेनिंग दी गई. फिलहाल दोनों उपसंचालक के पद पर तैनात हैं.

बांधवगढ़ कल्लवाह रेंज में चल रही ट्रेनिंग

ये ट्रेनिंग बांधवगढ़ के कल्लवाह रेंज में आयोजित की गई, जहां अधिकारियों को गौर इनक्लोजर प्रबंधन एवं अनुश्रवण प्रणाली, गौर ट्रांसलोकेशन की परिवहन प्रक्रिया, सॉफ्ट एवं हार्ड रिलीज तकनीक, VHF एवं GPS कॉलरिंग सिस्टम, कॉलर बैंड एवं ईयर टैग के माध्यम से मॉनिटरिंग प्रक्रिया तथा चारागाहों के रखरखाव एवं प्रबंधन के संबंध में जानकारी प्रदान की गई. ये ट्रेनिंग परिक्षेत्र अधिकारी कल्लवाह, महावीर पांडेय एवं गौर मॉनिटरिंग टीम के माध्यम से दिया गया.

गौर ट्रांसलोकेशन योजना

फील्ड विजिट के दौरान दोनों अधिकारियों को रियल में फील्ड स्थितियों में गौर का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया गया, कॉलर बैंड एवं रिसीवर, एंटीना से ट्रैकिंग एवं उनके व्यवहार अनुश्रवण की प्रक्रिया प्रदर्शित की गई. बांधवगढ़ के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि "यह मेगा हरवि‍वोर संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण फील्ड आधारित अध्ययन ट्रेनिंग है. क्योंकि आंध्र प्रदेश सरकार निकट भविष्य में नागार्जुन श्री सेलम टाइगर रिजर्व में गौर ट्रांसलोकेशन योजना लागू करने जा रही है, जिसके लिए बांधवगढ़ का ये एक्सपीरियंस, बहुत ही हेल्प फूल साबित हो सकता है."

बांधवगढ़ में गौर पुनर्स्थापना साल 2011–12 में 50 गौर कान्हा टाइगर रिजर्व से लाकर शुरू किया गया था. इसके बाद जीन विविधता बढ़ाने हेतु 50 गौर को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से सप्लीमेंटेशन के रूप में लाने की योजना वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया एवं बांधवगढ़ प्रबंधन द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई. इसी योजना के अंतर्गत वर्ष 2025 में 23 गौर लाए जा चुके हैं, जिनकी मॉनिटरिंग सफलतापूर्वक की जा रही है.