बांधवगढ़ में हाथियों के जिम्मे बिजली का रोस्टर, मूवमेंट से पहले आ जाता है बिजली गुल का ऑर्डर
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथियों की मौज. 60-70 एलिफेंट का पर्मानेंट बसेरा. जहां जाते हैं वहां की बत्ती कराते हैं गुल. खूब फूली आबादी.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 23, 2026 at 5:01 PM IST
शहडोल: जब से हाथियों ने छत्तीसगढ़ के रास्ते मध्य प्रदेश में एंट्री की है, मानो उनकी मौज आ गई है. उन्हें यहां की आबोहवा इतनी पंसद आ रही है कि इलाकों में उनकी दस्तक बनी रहती है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व को तो हाथियों ने घर ही बना लिया है. यहां के आसपास के इलाकों में हाथियों का मूवमेंट हमेशा बना रहता है. पिछले 1 साल से शहडोल के उत्तर वन मंडल क्षेत्र अंतर्गत बाणसागर इलाके के बैकवॉटर एरिया में 20 से 25 हाथियों का झुंड परमानेंट तौर पर रह रहा है.
बाणासागर का बैक वाटर एरिया बना पंसदीदा जगह
शहडोल उत्तर वन मंडल की डीएफओ तरुणा वर्मा बताती है कि "अभी हाथियों का मूवमेंट झिरिया शहरगढ़ इलाके में हैं. इस क्षेत्र में नहर आदि अधिक होने के कारण यहां किसानों ने फसल लगाए हुए हैं. जिससे यहां इनका मूवमेंट बना हुआ है. रात में इनका मूवमेंट अधिक होता है. वहीं, बाणासागर के बैक वाटर वाले एरिया में बांस बहुत अधिक है और हाथियों को बांस खाना बहुत पंसद है. चूकि यहां खाना और पानी हाथियों को पर्याप्त मिल रहा है, जिससे यह इलाका लंबे समय से हाथियों का पंसदीदा जगह बन गया है.

सीधी पहुंचे 2 हाथी
डीएफओ तरुणा वर्मा बताती है कि "बांधवगढ़ और संजय गांधी टाइगर रिजर्व की ओर से हाथी शहडोल की ओर आते हैं. यहां से अभी एक मेल और फीमेल हाथी सीधी की ओर मूव किए हैं, जो इन दिनों वहां चहलकदमी कर रहे हैं." सीधी के रहने वाले आशीष बताते हैं कि "चुरहट से ये हाथी आगे बढ़ चुके हैं और अब अमरोहा होते हुए सीधी की ओर बढ़ रहे हैं. हाथी जिस एरिया में जाते हैं, उस एरिया की लाइट बंद कर दी जाती है."
हाथियों के आते ही लाइट क्यों कर देते हैं बंद?
जहां-जहां हाथियों का मूवमेंट रहता है, उस इलाके के लाइट को बंद कर दिया जाता है. सीधी में भी जहां-जहां हाथी आगे बढ़ते जा रहे हैं, उस एरिया की लाइट बंद कर दिया जा रहा है. शहडोल जिले के ब्यौहारी में भी इस तरह की स्थिति देखने को मिलती है. इसे लेकर शहडोल उत्तर वन मंडल की डीएफओ तरुणा वर्मा बताती हैं कि "उबड़-खाबड़ एरिया में कई जगह ऐसे होते हैं, जहां हाथियों को बिजली वायर के संपर्क में आने का खतरा रहता है. इसलिए इनके मूवमेंट वाले एरिया में बिजली बंद कर दी जाती है, ताकि हाथी करंट की चपेट में न आएं. बिजली तार के संपर्क में आने से हाथियों को नुकसान हो सकता है."

बांधवगढ़ में 60-70 हाथियों का डेरा
मध्य प्रदेश को पिछले कुछ सालों से हाथियों ने अपना स्थाई पता बना लिया है. छत्तीसगढ़ के रास्ते कॉरिडोर का इस्तेमाल करते हुए पहले भी मध्य प्रदेश में हाथी पहुंचते थे, लेकिन कुछ समय विचरण करने के बाद चले जाते थे. लेकिन 2018 में जब से 40 हाथियों का झुंड बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पहुंचा, तब से उन्होंने इसको स्थाई पता बना लिया. यहां उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. फिलहाल करीब 60 से 70 हाथी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बताए जा रहे हैं.
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पुरखों के बताए रास्ते पर चलते हैं हाथी
पर्यावरणविद संजय पयासी बताते हैं कि "हाथी अपने पुरखों के बताए रास्ते पर चलते हैं. इसे बुद्धिमान जानवर माना जाता है. छत्तीसगढ़ के जनकपुर से होते हुए शहडोल के जयसिंहनगर और फिर उमरिया जिले के बांधवगढ़ में हाथियों आना जाना लगा रहता हैं. ये हाथियों का कॉरिडोर है. बाकी जगहों की तुलना में बांधवगढ़ में इन्हें बिल्कुल डिस्टरबेंस नहीं मिलता है. यहां कई ऐसी छोटी-छोटी नदियां बहती है, जो हाथियों के लिए सुविधाजनक है. पूरा शहडोल संभाग ही छत्तीसगढ़ से लगा हुआ है और छत्तीसगढ़ से ही लगातार हाथियों का मूवमेंट इधर बना रहता है. हालांकि 2018 से अब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भी हाथी रहने लगे हैं, जो कभी संजय गांधी टाइगर रिजर्व और आसपास के इलाकों में मूव करते रहते हैं."

