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दुनिया में बज रहा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का डंका, न्यूयॉर्क टाइम्स की इस खास लिस्ट में हुआ शामिल

न्यूयॉर्क टाइम्स ने 2026 में घूमने के लिए जारी की लिस्ट. इसमें मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व को भी किया शामिल.

BANDHAVGARH IN NEW YORK TIMES LIST
न्यूयार्क टाइम्स की लिस्ट में बांधवगढ़ (Bandhavgarh Tiger Reserve)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 8, 2026 at 10:56 PM IST

4 Min Read
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उमरिया: मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का डंका अब पूरी दुनिया में बज रहा है. अभी हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स ने 2026 में घूमने वाले 52 जगहों की लिस्ट जारी की है, उसमें बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का भी नाम है. बाघों के इस गढ़ के लिए यह बड़ा अचीवमेंट है.

न्यूयार्क टाइम्स की लिस्ट में बांधवगढ़

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व को बड़ी उपलब्धि मिली है और यह मध्य प्रदेश के लिए भी बहुत खास है क्योंकि न्यूयॉर्क टाइम्स की '52 Places to Go 2026' की लिस्ट में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व को भी जगह मिली है. मतलब न्यूयॉर्क टाइम्स ने 2026 में घूमने के लिए जो 52 जगह की लिस्ट जारी की है, उसमें मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व को भी जगह दी है. यह मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है और बाघों के गढ़ के लिए भी ये यह बहुत ही खास अचीवमेंट है.

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बांधवगढ़ में बाघों की साइटिंग आसान (Bandhavgarh Tiger Reserve)

द न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की जमकर सराहना की है, खासकर उसके बाघ संरक्षण के प्रयासों की जमकर तारीफ की है, जो इस टाइगर रिजर्व को बाघ देखने के मामले में एक टॉप मॉडल बनाता है.

UMARIA BANDHAVGARH TIGER RESERVE
दुनिया में बज रहा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का डंका (Bandhavgarh Tiger Reserve)

द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड के मुताबिक धरती पर 5,600 से भी कम बाघ बचे हैं जिनमें से कई भारत के जंगलों में घूम रहे हैं. 1970 के दशक की शुरुआत से संरक्षण प्रयासों की बदौलत भारत में बाघों की आबादी अब दोगुनी हो गई है, जो भारत के लिए बहुत अच्छी खबर है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा बाघों के लिए अपनी पहचान रखता है, जो इस टाइगर रिजर्व को एक खास पहचान देता है.

क्यों है खास बांधवगढ़ ?

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर अनुपम सहाय बताते हैं कि "बांधवगढ़ में बाघों की साइटिंग बड़ी आसानी से होती है. एक अच्छा हैबिटेट है तो यहां पर शावकों के साथ मादा बाघिन भी काफी संख्या में देखी जाती हैं. मां के साथ शावकों को देखना एक बड़े अट्रैक्शन की बात रहती है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व एक ऐसा है, जहां बाघ और शावकों को देखने की संभावना सबसे ज्यादा रहती है. ये कुछ कारण हैं जो पर्यटकों को बहुत ही अट्रैक्ट करते हैं."

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बाघिन के साथ देखे जा सकते हैं शावक (Bandhavgarh Tiger Reserve)

अनुपम सहाय बताते हैं कि "अब यहां हाथी भी बड़ी आसानी से देखे जा सकते हैं, यहां का घना जंगल, यहां के पक्षी, दूसरे वन्य प्राणी भी पर्यटकों को बहुत अट्रैक्ट करते हैं, पर्यटकों को आने जाने में सुलभ भी है, एयर कनेक्टिविटी भी है जबलपुर से करीब है, रुकने की अच्छी व्यवस्था है. यहां पर जो गाइड हैं जिप्सी चालक हैं बहुत प्रोफेशनल है, पर्यटकों को पर्सनल केयर भी देते हैं. ये सुविधाएं भी टूरिस्ट को बहुत अट्रैक्ट करती हैं. इसके अलावा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में ऐतिहासिक, पुरातात्विक और धार्मिक महत्व की भी बहुत सारी चीजें हैं जो इस टाइगर रिजर्व को खास बनाती हैं."

बाघों के अलावा भी है बहुत कुछ खास

बांधवगढ़ में जंगल ही नहीं बल्कि 2000 साल पुराना बांधवगढ़ किला भी है. पौराणिक कथाओं और जन श्रुतियों की माने तो भगवान राम ने ये किला अपने भाई लक्ष्मण को लंका पर नजर रखने के लिए उपहार में दिया था. बाघों के अलावा भी यहां कई वन्य प्राणी पशु पक्षी जीव पाए जाते हैं.

UMARIA BANDHAVGARH TIGER RESERVE
देखे जा सकते हैं हाथी समेत कई जंगली जानवर (Bandhavgarh Tiger Reserve)

टाइगर रिजर्व के जंगल के अंदर विष्णु भगवान की लेटी हुई शेष शैय्या, कई ऐसे ऐतिहासिक पुरातात्विक स्थल हैं, जो इस टाइगर रिजर्व को प्राकृतिक और संस्कृति का संगम बनाते हैं. इसके अलावा बाघों की अच्छी साइटिंग के चलते ये दुनिया भर के फोटोग्राफरों की भी पहली पसंद है. इसके अलावा इको टूरिज्म का भी बहुत अच्छा एक्सपीरियंस मिलता है.

यहां का टिकाऊ पर्यटन और वन्य प्राणियों और बाघों के जो संरक्षण के प्रयास हैं वो बहुत बेहतर हैं. विंध्य की पहाड़ियों और साल के घने जंगलों के बीच सफारी का अनुभव बहुत ही रोमांचक लगता है. यहां रहने के लिए बेहतरीन इको फ्रेंडली रिजॉर्ट्स और स्थानीय जनजाति संस्कृति को करीब से देखने का मौका भी मिलता है.