महाकाल की नगरी से निकल रहा ज्ञान का नया मॉडल, वेद पढ़कर देश भर में चमक रहे यहां के सितारे
उज्जैन में महाकाल के गुरुकुल में वेदों से लेकर आधुनिक शिक्षा, 14 साल में एक भी छात्र फेल नहीं. राहुल सिंह राठौड़ की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 22, 2026 at 8:30 PM IST
उज्जैन: महाकाल की नगरी में वेदों की शिक्षा लेने वाले युवा अब सिर्फ शास्त्रों तक सीमित नहीं हैं. कोई भारतीय सेना में धर्मगुरु बनकर जवानों का मनोबल बढ़ा रहा है, कोई कर्नाटक के विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर बनकर पढ़ा रहा है, तो कोई काशी हिंदू विश्वविद्यालय में शोध कर रहा है.
किसी ने राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीते हैं तो किसी ने नेट और जेआरएफ जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल की है. इन उपलब्धियों की नींव है श्री महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान. जहां वेदों और संस्कृत के साथ आधुनिक शिक्षा, कंप्यूटर, खेल और अनुशासन का भी पाठ पढ़ाया जाता है.
14 साल में एक भी छात्र फेल नहीं
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा संचालित इस संस्थान की स्थापना साल 2008 में हुई और 2010 से वैदिक कक्षाओं का संचालन शुरू हुआ. संस्थान के निदेशक एवं प्रभारी प्राचार्य डॉ. पीयूष त्रिपाठी ने ईटीवी भारत से चर्चा में बताया, "करीब 14 सालों में एक भी छात्र फेल नहीं हुआ. इस साल दसवीं और बारहवीं के समकक्ष हम कहते हैं "पूर्व मध्यमा द्वितीय वर्ष और उत्तर मध्यमा द्वितीय वर्ष" के छात्रों में लगभग सभी फर्स्ट डिवीजन में उत्तीर्ण हुए, जबकि केवल 2 छात्र सेकंड डिवीजन में रहे. थर्ड डिवीजन पूरक या फेल कोई छात्र नहीं हुआ. परीक्षा परिणामों के लिए मुझे प्रादेशिक स्तर पर 2 बार सम्मानित भी किया जा चुका है."
देश के कई राज्यों से पढ़ने आते हैं छात्र
निदेशक एवं प्रभारी प्राचार्य डॉ. पीयूष त्रिपाठी ने बताया, "संस्थान में इस साल 113 छात्र अलग अलग राज्यों से आकर आवासीय रूप से पढ़ाई कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात सहित कई राज्यों के छात्र यहां शिक्षा ले रहे हैं.

छात्रों को शिक्षा के साथ निःशुल्क भोजन, आवास, खेल मैदान, ओपन जिम, बास्केटबॉल और स्वास्थ्य परीक्षण जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं. संस्थान में शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक मिलाकर करीब 30 स्टाफ है. इस साल स्मार्ट क्लास शुरू करने की तैयारी है. करीब 30 कंप्यूटर की व्यवस्था की गई है और छठवीं कक्षा से ही छात्रों को कंप्यूटर ट्रेनिंग देने पर जोर दिया जा रहा है."
वेदों के साथ अंग्रेजी, सोशल साइंस और कंप्यूटर
निदेशक एवं प्रभारी प्राचार्य डॉ. पीयूष त्रिपाठी के अनुसार, "संस्थान महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान संस्कृत बोर्ड से संबद्ध है. यहां वैदिक शिक्षा के साथ अंग्रेजी, सोशल साइंस, वैदिक गणित और कंप्यूटर की शिक्षा भी दी जाती है. उद्देश्य स्पष्ट है छात्र परंपरा की जड़ों से जुड़े रहें, लेकिन आधुनिक प्रतिस्पर्धा में भी पीछे न रहें."

कलेक्टर बोले ये गर्व का विषय
कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने ईटीवी भारत से चर्चा में संस्थान की व्यवस्था और परीक्षा परिणाम की सराहना करते हुए कहा, "यह बहुत ही गर्व की बात है, अच्छी पहल है कि महाकाल मंदिर के द्वारा यह विद्यालय चलाया जाता है. जिसमें वैदिक शिक्षा पर विशेष फोकस रहता है. देश के कोने-कोने से यहां पर बच्चे आते हैं और उन्हें सारी सुविधाएं निःशुक्ल उपलब्ध कराई जाती हैं. बहुत खुशी की बात है कि इन बच्चों का जो रिजल्ट आता है, वह बहुत ही अच्छा आता है और सभी बच्चे बहुत अच्छे मार्क्स के साथ उत्तीर्ण होते हैं."

गुरुकुल से सेना में धर्मगुरु बने विद्यासागर
रीवा निवासी 29 वर्षीय विद्यासागर पाण्डेय आज भारतीय सेना में धर्मगुरु जूनियर कमीशन ऑफिसर हैं. ईटीवी भारत को बताया साल 2025 में उनका चयन हुआ और वर्तमान में वे जम्मू में पदस्थ हैं. 2010 और 2011 में उज्जैन के इसी संस्थान से कक्षा 9वीं और 10वीं की पढ़ाई की थी. सेना में उनका काम जवानों को मानसिक रूप से मजबूत करना, सकारात्मक विचारों के माध्यम से उनका मनोबल बढ़ाना और काउंसलिंग करना है. धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा पाठ की जिम्मेदारी भी निभाते हैं.

गुरुकुल से कर्नाटक के विश्वविद्यालय तक पहुंचे सुधांशु
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट निवासी 24 वर्षीय सुधांशु शुक्ला ने ईटीवी भारत को बताया कक्षा 8वीं से 12वीं तक इसी संस्थान में पढ़ाई की. वे नेट परीक्षा उत्तीर्ण करने के साथ राष्ट्रीय स्तर की शलाका परीक्षा में गोल्ड मेडलिस्ट हैं. मार्च 2026 में उनका चयन कर्नाटक स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, श्रृंगेरी राजीव गांधी परिसर में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में हुआ. वे अध्यापन के साथ पीएचडी भी कर रहे हैं.
बीएचयू से पीएचडी कर रहे विवेक
संस्थान के पूर्व विद्यार्थी विवेक त्रिपाठी ने बताया वे 06 से 12वीं तक इसी संस्थान में पढ़े हैं. प्रदेश के टॉप-5 में स्थान बना चुके हैं. वे राष्ट्रीय स्तर पर 3 गोल्ड मेडल और 1 रजत पदक जीत चुके हैं. नेट-जेआरएफ उत्तीर्ण करने के बाद वर्तमान में काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी में पीएचडी कर रहे हैं.

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सेना से लेकर विश्वविद्यालय तक हर जगह बना रहे पहचान
श्री महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान की उपलब्धियां यह बताती हैं कि परंपरागत वैदिक शिक्षा को आधुनिक शिक्षा और अनुशासन के साथ जोड़ा जाए तो उसके परिणाम व्यापक हो सकते है. महाकाल मंदिर के आंगन से निकले ये विद्यार्थी आज सेना, विश्वविद्यालय, शोध और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बना रहे हैं. वेदों से शुरू हुआ सफर अब जवानों की सेवा, विश्वविद्यालयों में अध्यापन और शोध तक पहुंच रहा है. यही इस गुरुकुल की सबसे बड़ी उपलब्धि है.

