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बेटी की कमजोरी देख छोड़ दी बैंक की नौकरी, 300 से अधिक स्पेशल चाइल्ड की बनीं सहारा

उज्जैन की सुमन ने बैंक अधिकारी की नौकरी छोड़ समाजसेवा का उठाया बीड़ा. दिव्यांगों पर खर्च कर देती हैं पेंशन. बच्चों को कर रहीं ट्रेंड.

UJJAIN SUMAN LEFT JOB SERVE SOCIETY
बेटी की कमजोरी देख छोड़ दी बैंक की नौकरी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 7, 2026 at 8:08 PM IST

5 Min Read
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उज्जैन: शहर के आजाद नगर क्षेत्र में रहने वाली बैंक अधिकारी रही एक महिला की कहानी आपको प्रेरणा से ओतप्रोत कर देगी. एक ऐसी महिला जो खुद दिव्यांग होकर जिसने अपनी बेटी की कमजोरी को भी समझा और बैंक की नौकरी छोड़ समाज सेवा का बीड़ा उठाया. महिला बीते 8 सालों में 300 से अधिक दिव्यांगों का सहारा बन चुकी हैं. खास बात यह है महिला अपनी पेंशन से हर महीने 35 से 40 हजार रुपए दिव्यांगों पर खर्च करती हैं. बच्चों की उम्र 08 से 20 वर्ष तय की हुई है.

वीआरएस लेकर समाजसेवा का संकल्प

शहर के आजाद नगर की रहने वाली सुमन मेहता की उम्र 62 वर्ष और वे बैंक ऑफ इंडिया में चीफ मैनेजर रही हैं. महिला को बैंक में एजीएम की पोस्ट पर प्रमोशन भी मिला लेकिन उन्होंने वीआरएस ले लिया. ईटीवी भारत से चर्चा में सुमन मेहता ने बताया कि "मुझे बचपन में ज्यादा बुखार की वजह से एक पैर डिसलोकेट हुआ. बाद में मेरी बेटी का जन्म हुआ उसके बाद उसे डाउन सिंड्रोम बीमारी का पता चला.

300 से अधिक स्पेशल चाइल्ड की सहारा बनीं सुमन (ETV Bharat)

सुरभी की परिस्थितियों को देख मन मे विचार आया ऐसे कई बच्चे हैं, जिनके माता पिता उनका उपचार करवाने, उनकी देख भाल करने के लिए भी सक्षम नहीं है. ऐसे बच्चों की भी सेवा करना है. 8 साल पहले 31 मार्च 2018 को सुरभि सुमन वेलफेयर फाउंडेशन सोसाइटी का रजिस्ट्रेशन करवाया और बैंक ऑफ इंडिया से वीआरएस लेकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के स्पेशल चाइल्ड को कैम्प के माध्यम से एकत्रित करना शुरू किया."

Surbhi Suman Welfare Foundation Society Registration
सुरभि सुमन वेलफेयर फाउंडेशन सोसाइटी का रजिस्ट्रेशन (ETV Bharat)

'300 से अधिक बच्चों को दी ट्रेनिंग'

सुमन मेहता ने बताया कि "बच्चों की उम्र 08 से 20 वर्ष तय की है. ये वो बच्चे हैं जिनके परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं, जो ना बच्चों का उपचार करवा सकते हैं और ना ही उनकी ठीक से देखभाल कर सकते. ऐसे बच्चों को हम जनरल एजुकेशन देते हैं. जिसमें धर्म, शिक्षा, कला, साहित्य से जुड़े विषय शामिल हैं. त्योहारों के अनुसार उन्हें प्रोडक्ट बनाना सिखाते हैं. मिट्टी के गणेश, दीपक, लाइट, आर्टिफिशियल आइटम व अन्य बनाना. इसके अलावा घर के काम करना सिखाते हैं, जिससे वे स्वरोजगार से जुड़ परिवार को आर्थिक रूप से मदद कर सकें. अब तक 500 से अधिक बच्चे हमसे जुड़े और 300 से अधिक को ट्रेनिंग दे चुके हैं, जो समाज की मुख्य धारा से जुड़ रहे हैं."

SUMAN SUPPORT SPECIAL CHILDREN
दिव्यांगों पर खर्च कर देती हैं पेंशन (ETV Bharat)

'बेटी जन्म से ही स्पेशल चाइल्ड'

सुमन मेहता ने बताया कि "मेरी बेटी जन्म से ही स्पेशल चाइल्ड है, जो ना कुछ ठीक से बोल सकती है और ना पढ़ सकती है और ना कुछ सामान उठा पाती. आज बेटी 21 वर्ष की है उसे हमने इतना ट्रेंड कर दिया है कि उसने ऑनलाइन 10वीं की परीक्षा पास की है. अब घर के सारे काम, खुद के सारे काम करती है. मेरी बिटिया को समाज के लोग एक घृणा की नजर से देखते थे लेकिन जब इसमें बदलाव हुए और समाज के अन्य बच्चों में भी बदलाव हुए तो समाज के विचार भी बदले. अब सभी उसके साथ खेलते हैं, उनके साथ हर एक्टिविटी में हिस्सा लेते हैं तो यह एक बड़ी उपलब्धि है हमारे लिए."

UJJAIN SUMAN MEHTA LEFT BANK JOB
दिव्यांग बच्चों को कर रहीं ट्रेंड (ETV Bharat)

'लोन लेकर बनाई बिल्डिंग'

सुमन मेहता ने बताया कि "शहर के नानाखेड़ा क्षेत्र में हमने बैंक से लोन लेकर 2 मंजिला बिल्डिंग बनाई. जिसमें बच्चों के रहने से लेकर उनकी हर एक एक्टिविटी के लिए ट्रेनिंग सेंटर डेवलप किया है. ग्राउंड फ्लोर पर ट्रेनिंग, फर्स्ट फ्लोर पर 20 बेड का सेटअप, किचन और वॉशरूम सुविधा है. कुल 4 लोगों का स्टाफ है, जिसमें 2 स्पेशल एजुकेटर, एक केयरटेकर, एक सफाई कर्मी है. बच्चों के भोजन, स्टाफ की तन्ख्वाह सब कुछ पेंशन में से 35 से 40 हजार रु मासिक खर्च करते हैं. पति राजेश एक प्राइवेट कम्पनी में कार्यरत हैं उनका भी खूब सहयोग मिलता है."

'अन्य राज्यों के बच्चों को भी करेंगे ट्रेंड'

सुमन मेहता ने बताया कि "फिलहाल उज्जैन और आसपास के बच्चे ही हमारे पास निशुल्क ट्रेंड हुए हैं. इस दौरान हमारे संपर्क में कई राज्यों के लोग जुड़ रहे हैं. महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तरप्रदेश यहां तक दिल्ली के भी जहां सिंगल पैरेंट अपने स्पेशल चाइल्ड की चिंता करते हैं और कहते हैं कि हमारे बाद इनका कौन ख्याल रखेगा. ऐसे बच्चों के लिए हम एक और बिल्डिंग तैयार करने का प्लान बना रहे हैं. वर्ष 2025 में अलग-अलग राज्यों में हमने कैंप लगाए, विजिट किए. हमने तय किया है 18+ युवतियों को हम हमारे सेंटर पर लाएंगे और उनकी देख रेख करेंगे."