मिट्टी के अखाड़ों से इंटरनेशनल ट्रैक तक, स्पोर्ट्स हब बनने की रेस में उज्जैन की बदल रही तस्वीर
विक्रम अवॉर्ड से शुरू हुई उपलब्धियों का सफर 2026 में द्रोणाचार्य पुरस्कार तक पहुंचा. सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक, ग्रास फुटबॉल मैदान, लॉन टेनिस कोर्ट जैसी कई सुविधाएं. 36 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा हॉकी टर्फ. राहुल सिंह राठौड़ की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 30, 2026 at 9:12 PM IST
|Updated : August 30, 2026 at 9:24 PM IST
उज्जैन: कभी संसाधनों की कमी के बीच मिट्टी के मैदानों और सीमित साधनों से खेल प्रतिभाएं तैयार करने वाला उज्जैन आज आधुनिक खेल सुविधाओं की नई पहचान बना रहा है. मलखंब के विक्रम पुरस्कार से शुरू हुई यह कहानी द्रोणाचार्य पुरस्कार के साथ अब एथलेटिक्स, हॉकी, कुश्ती, जिमनास्टिक, फुटबॉल, बैडमिंटन, शूटिंग, बास्केटबॉल, तैराकी जैसे खेलों तक पहुंच चुकी है.
शहर के नानाखेड़ा का सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक, ग्रास फुटबॉल मैदान, लॉन टेनिस कोर्ट, मल्टीपर्पज हॉल और अंतरराष्ट्रीय स्तर का हॉकी टर्फ जिसका लगभग 36 करोड़ की लागत से काम शुरू हो गया है. यह कहानी केवल पुरस्कारों की सूची नहीं बल्कि एक ऐसे शहर के बदलते खेल ईको सिस्टम की कहानी है, जहां पुरानी परंपरा और आधुनिक सुविधाएं एक साथ खड़ी दिखाई दे रही हैं. आज उज्जैन 23 राष्ट्रीय, 91 राज्य स्तरीय मेडलों कुल 114 मेडलों की सूची के साथ सामने है.
जिमनाशियम, बॉक्सिंग, कुश्ती में मिले अवॉर्ड
दीपेश लश्करी को जिम्नास्टिक 2022 में एकलव्य पुरस्कार मिला, मंजू बमोरिया को बॉक्सिंग में विक्रम पुरस्कार 2020 में, 2023 में प्रियांशी प्रजापत को कुश्ती में एकलव्य पुरस्कार, 2023 - 2025 में रतनलाल वर्मा को लाइफ टाइम एचीवमेंट अवॉर्ड जिमनाशियम में मिला है.

1972-1973 से शुरू हुई सम्मान की परंपरा
उज्जैन के खेल इतिहास में मलखंब की भूमिका सबसे मजबूत रही है. 1973-74 में मलखंब में विक्रम अवॉर्ड ले चुके किशोरीशरण श्रीवास्तव वर्तमान में मध्य प्रदेश मलखंब एसोसिएशन के अध्यक्ष और मलखम्भ फेडरेशन ऑफ इंडिया के फाउंडर हैं. उन्होंने ईटीवी भारत से चर्चा में कहा, "1972-73 में मनोहर लाल झाला को विक्रम अवॉर्ड मिला, 1973-74 में मुझे, 1974-75 में केशव झाला 1991-92 में संजय भागर्व को विक्रम अवॉर्ड मिला. 1994-95 में डॉ आशीष मेहता को फिर 2006 में उन्हें विश्वामित्र अवॉर्ड भी मिला. 2007-08 में विक्रम पुरस्कार पंकज सोनी को मिला."

मलखंब में विश्वामित्र पुरस्कार भी मिले
किशोरीशरण श्रीवास्तव ने आगे बताया, "इसके बाद उज्जैन की विक्रम पुरस्कार परंपरा में मुन्नालाल मामोडिया, चंद्रशेखर चौहान, राजवीर सिंह पंवार और पूजा मालवीय का नाम जुड़ा. यह सूची बताती है कि उज्जैन में मलखंब किसी एक पीढ़ी का खेल नहीं रह बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती खेल परंपरा है. मलखंब में विश्वामित्र अवॉर्ड पाने वालों में कन्हैयालाल मामोडिया, योगेश मालवीय, डॉ आशीष मेहता, तरुणा चावड़े और मोहनलाल बंबोरिया का नाम शामिल है."

उज्जैन के खेल इतिहास का राष्ट्रीय मोड़ है साल 2020
उज्जैन की खेल यात्रा में किसी एक साल को सबसे महत्वपूर्ण मोड़ कहा जाए तो वह 2020 है. मलखंब कोच योगेश मालवीय को भारत सरकार के राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार की नियमित श्रेणी में सम्मानित किया गया. यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक थी क्योंकि उस समय इसे मलखंब के क्षेत्र में देश का पहला द्रोणाचार्य पुरस्कार बताया गया था. योगेश मालवीय की उपलब्धि ने उज्जैन के मलखंब को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी. राष्ट्रीय खेल पुरस्कार में योगेश राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित है.

एकलव्य, प्रभाष जोशी अवॉर्ड में हुई नई पीढ़ी की एंट्री
मलखंब की इस परंपरा को आगे बढ़ाने वाली नई पीढ़ी में इंद्रजीत नागर, प्रवीण चौहान, रवी चौहान का नाम शामिल है. इंद्रजीत को साल 2022 में यह अवॉर्ड मिला. मध्य प्रदेश सरकार ने पारंपरिक खेल मलखंब में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने के लिए 2013 से स्व प्रभाष जोशी पुरस्कार शुरू किया. पहला पुरस्कार 2013 में ही अजय वक्तारिया को दिया गया इसके बाद योगेश भदौरिया, हर्ष यादव, चंद्रशेखर चौहान, वैष्णवी कहार और मुजाहिद बेग को यह पुरस्कार मिल चुका है.
2020 के बाद जब पुरस्कारों के साथ मैदान भी बदलने लगे
उज्जैन के तत्कालीन जिला खेल अधिकारी ओ पी हारोड ईटीवी भारत को बताते हैं, "साल 2020 में उनके उज्जैन आने के समय खेल सुविधाएं आज की तुलना में काफी सीमित थीं. तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सहयोग से नानाखेड़ा स्टेडियम की जमीन को उज्जैन विकास प्राधिकरण से खेल विभाग के लिए उपयोग में लाने की दिशा में काम हुआ. इसके बाद खेल अधोसंरचना के विस्तार की शुरुआत हुई.

जहां आज 7 करोड़ से अधिक की लागत का सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक है. ग्रास फुटबॉल मैदान है, सिंथेटिक लॉन टेनिस कोर्ट है, मल्टीपर्पज स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स, शूटिंग सुविधा, बैडमिंटन कोर्ट, मलखंब, जिमनाशियम और अन्य खेलों की सुविधाएं हैं. इसके अलावा महाराजवाड़ा में जिम्नास्टिक्स के लिए आधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाए गए हैं."
2026 में इंटरनेशनल हॉकी टर्फ और तैराकी की बारी
जिला खेल अधिकारी विजेंद्र देवड़ा के अनुसार, "मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देशन में अब उज्जैन इंटरनेशनल हॉकी टर्फ की और बढ़ रहा है. 36 करोड़ से अधिक की लागत से हॉकी टर्फ उज्जैन के नानाखेड़ा में बन रहा है, 15 प्रतिशत काम भी पूरा हो चुका है.

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मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी स्विमिंग अकादमी उज्जैन आ रही है, जिस पर निर्णय हो चुका है. उज्जैन खेल इंफ्रास्ट्रक्चर 2026 में एक और बड़े चरण में पहुंच गया है. नानाखेड़ा स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय मानकों का सिंथेटिक हॉकी टर्फ, पवेलियन, एथलेटिक्स पवेलियन, नई बाउंड्री, सड़क, पार्किंग जैसी सुविधाएं हैं और यहां काम चल रहा है."

