उज्जैन में गजब इंजीनियरिंग! सिंहस्थ मेला क्षेत्र को जोड़ने वाला ब्रिज रोड से भटका, खेत में उतरा
इंदौर से सिंहस्थ मेला क्षेत्र में जाने के लिए बन रहे ब्रिज की लैंडिंग खाली खेत में. 90 डिग्री ब्रिज के बाद अब उज्जैन का ब्रिज चर्चा में. रोड और ब्रिज के बीच अलाइनमेंट नहीं. राहुल सिंह राठौर की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 25, 2026 at 12:27 PM IST
|Updated : August 25, 2026 at 2:24 PM IST
उज्जैन : भीड़भाड़ और बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान ट्रैफिक सुचारु रखने के लिए उज्जैन में फ्लाईओवर का एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चल रहा है. यहां ब्रिज कंस्ट्रक्शन के दौरान एक नायाब किस्म की चूक सामने आई. सड़क से ब्रिज निकाल कर लैंडिंग एक खेत में कराई गई. ब्रिज से सीधे खेत में उतरने का शायद कभी किसी ने सोचा भी नहीं होगा, अधिकारियों ने भी नहीं. लिहाजा सबके माथे पर बल पड़ना लाजिम है. इंदौर से आने वाले वाहनों को सीधे मेला क्षेत्र तक पहुंचने के लिए यह पूरा प्रोजेक्ट चलाया जा रहा जिसमें बायपास और ब्रिज में निर्माण एजेंसी की लापरवाही दर्शाता है. सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर उज्जैन में इंफ्रास्ट्र्क्चर मजबूत करने के लिए युद्ध स्तर पर चल रहे निर्माण कार्य मॉनीटरिंग कमिश्नर आशीष सिंह कर रहे हैं.
रोड से ब्रिज का एलाइनमेंट करना भूले इंजीनियर
इंदौर रोड से सिंहस्थ क्षेत्र को जोड़ने के लिए एक निजी शॉपिंग मॉल के सामने महावीर बाग मार्ग एमआर 21 तक सड़क बनाई जा रही है. इसकी लागत 23.26 करोड़ है. शिप्रा नदी पर पुल निर्माणाधीन है, इसकी लागत 13.38 करोड़ रुपये है. इस रोड और ब्रिज का एलाइनमेंट आपस में मेल ही नहीं खा रहा. ETV भारत ने मौके जाकर देखा तो पाया कि पुल इस सड़क से जुड़ने के बजाय खेत की दिशा में उतर रहा है. गड़बड़ी सामने आने के बाद अब सेतु विभाग सड़क की दिशा बदलने के लिए किसानों से अतिरिक्त जमीन लेने की तैयारी में है.
सड़क और ब्रिज का काम काफी आगे बढ़ा
इस प्रोजेक्ट में सड़क निर्माण का जिम्मा नगर निगम और पुल निर्माण का काम सेतु विभाग के पास है. यहां सड़क का अर्थवर्क और पुल के पिलर तैयार हो चुके हैं. निर्माण आगे बढ़ने के बाद दोनों के अलाइनमेंट में करीब 30 डिग्री का अंतर सामने आया. जनकारों ने सवाल उठाया कि जब दोनों काम एक ही यातायात मार्ग का हिस्सा हैं तो निर्माण शुरू करने से पहले संयुक्त सर्वे और अलाइनमेंट का मिलान क्यों नहीं किया गया? पुल को सीधे सिंकदरी और डाबरीखेड़ी गांव को जोड़ने वाले मार्ग पर मिलना था.
अब किसानों से अतिरिक्त जमीन लेने की तैयारी
इस बायपास के बनाने का मकसद ये है कि बदनावर, गरोठ, देवास की और से आने वाले वाहन सीधे सिंहस्थ क्षेत्र में आ सकें. इंदौर-उज्जैन फोरलेन के बायपास की मदद से उज्जैन शहर को भारी ट्रैफिक के दबाव का सामना नहीं करना पड़े. अब अलाइनमेंट की समस्या सामने आने के बाद सड़क को मोड़ने की योजना बनाई जा रही है. ऐसे में अतिरिक्त निजी जमीन की जरूरत पड़ेगी. इसका खामियाजा सीधा किसानों और निजी प्लॉट वालों को भुगतना पड़ेगा.

निर्माण करने वाले विभागों के बीच तालमेल नहीं
सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन की तैयारियों में करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट समय पर और सही तरीके से पूरे होना जरूरी है. यहां सवाल सिर्फ यह नहीं है कि पुल किस विभाग की गलती से सड़क से नहीं मिल रहा, बल्कि यह भी है कि क्या करोड़ों रुपए के निर्माण कार्य शुरू करने से पहले विभागों के बीच पर्याप्त समन्वय और तकनीकी जांच हुई? यदि अलाइनमेंट की गलती निर्माण के शुरुआती चरण में ही पकड़ ली जाती तो आज सड़क को मोड़ने और किसानों की अतिरिक्त जमीन लेने की नौबत नहीं आती.

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बात करने को तैयार नहीं जिम्मेदार अधिकारी
जब इस बारे में ईटीवी भारत संवाददाता ने सेतु विभाग के ईई पीएस पंत से बात की तो उन्होंने कहा "अभी बात करने की स्थिति में नहीं हूं." ये कहकर कॉल कट कर दिया. दूसरी बार कॉल करने पर रिसीव नहीं किया. सड़क निर्माण करवा रहे नगर नगर की एमआईसी के आर.के जैन ने भी जवाब नहीं दिया और कहा "कुछ देर में संपर्क करता हूं." बाद में कॉल रिसीव नहीं किया.

