ETV Bharat / state

निःशक्त बच्चों का अद्भुत संसार, जहां भाग्य में लिखे पन्नों को पलट नए सिरे से गढ़ते हैं भविष्य

उज्जैन स्थित अंकित सेवाधाम आश्रम बना निराश्रित बच्चों का घर. यहां दिव्यांग बच्चों की देखभाल कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा.

Ujjain sewadham ashram
उज्जैन में निःशक्त बच्चों का अद्भुत संसार सेवाधाम आश्रम (ETV BHARAT)
author img

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : November 14, 2025 at 3:52 PM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

रिपोर्ट: राहुल सिंह राठौर

उज्जैन : उज्जैन का अंकित सेवा धाम आश्रम बेसहारा, निराश्रित व नि:शक्त बच्चों को अपनाता है. ऐसे बच्चों की यहां पूरी शिद्दत के साथ देखभाल की जाती है. मकसद यही है कि किसी प्रकार इन बच्चों को बड़ा कर समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जाए. ऐसे बच्चे जो बोल नहीं सकते, खा-पी नहीं सकते, चल नहीं सकते, देख नहीं सकते, इन्हें माता-पिता ने लावारिस छोड़ दिया. लेकिन इस आश्रम में यहां ये बच्चे संवर रहे हैं. देखिए ETV भारत की ये स्पेशल रिपोर्ट...

पैरेंट्स ने ठुकराया तो आश्रम ने संवारा

अपने माता-पिता और संसार से ठुकराए गए ये निराश्रित बच्चे अंकित सेवाधाम आश्रम में लाए गए. इनमें से कई अनेक प्रकार के संक्रमण से घिरे थे. इनके माता-पिता ने किसी को रेलवे स्टेशन, ट्रेन, बस स्टॉप, नदी-नाले किनारे या फिर जंगलों में फेंक दिया था. इनमें से कुछ बच्चे 5, 10 एवं 15 वर्षों से अभी भी बिस्तर पर हैं. यहां तक कि एक बड़े उद्योगपति की बेटी भी आश्रम में है, उसे यहां आए 5 साल हो गए हैं, माता-पिता ने कभी सुध नहीं ली. वहीं, कुछ बच्चे अपने पैरों पर खड़े होने लगे हैं. आत्मनिर्भर होने लगे हैं. अब ये बच्चे दूसरों की सेवा कर रहे हैं.

उज्जैन स्थित अंकित सेवाधाम आश्रम बना निराश्रित बच्चों का घर (ETV BHARAT)
उज्जैन सेवाधाम आश्रम में दिव्यांग बच्चों को आत्मनिर्भर बनाया (ETV BHARAT)

आश्रम में 1200 लोगों का परिवार

अंकित सेवा धाम आश्रम उज्जैन शहर से 22 किलोमीटर दूर गांव अंबोदिया में है. इसके संचालक सुधीर भाई गोयल हैं. उनका कहना है "सेवाधाम आश्रम में मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र के भी बच्चे भी हैं. मध्यप्रदेश के शहडोल, रीवा, सतना व आदिवादी इलाकों के बच्चे ज्यादा हैं. यहां सामान्य और दिव्यांग कुल 228 बच्चे रह रहे हैं. आश्रम में 1200 लोगों का परिवार है, जिसमे हर उम्र के लोग हैं."

Ujjain sewadham ashram
लावारिस बच्चों को मिला घर जैसा लाड़ प्यार (ETV BHARAT)

आश्रम में कितनी उम्र के कितने बच्चे

आश्रम में रहने वाले बच्चे सुबह 05 बजे उठते हैं. प्रार्थना करते हैं. इसके बाद अलग-अलग एक्टिविटी में शामिल होते हैं. कुछ बच्चे बड़े होकर इतने सक्षम हो चुके हैं कि वे बुजुर्गों की देखभाल भी रखते हैं. सेवाधाम का मैनेजमेंट संभाल रहे राहुल राज बताते हैं "यहां 0-6 से वर्ष तक 3 सामान्य बालक हैं और 6 बालिकाएं हैं. 13 दिव्यांग बालक हैं और 8 बालिकाएं हैं. साथ ही 06 से 18 वर्ष उम्र तक के सामान्य में 3 बालक, 7 बालिका, 83 दिव्यांग बालक एवं 105 दिव्यांग बालिकाएं हैं."

Ujjain sewadham ashram
बच्चे सुबह उठकर करते हैं प्रार्थना (ETV BHARAT)

बच्चे बड़े होकर बन रहे आत्मनिर्भर

आश्रम संचालक सुधीर भाई गोयल ने बताया "यहां जब बच्चे आते हैं तो निरश्रित और नि:शक्त होते हैं. इन्हें यहां पर इस प्रकार डेवलप किया जाता है, जिससे वे बड़े होकर कोई लॉन्ड्री बॉय, इलेक्ट्रिक, ड्राइवर, ग्राफिक्स डिजाइनर फोटोग्राफी के काम करने लगता है. लड़किया छोटे बच्चों को संभालती हैं, मैनेजमेंट देखती हैं, नर्सिंग के काम करती हैं. यहां 200 गायों की गौशाला है तो गोबर से होम मेड प्रोडक्ट बनाती हैं."

Ujjain sewadham ashram
उज्जैन सेवाधाम में निराश्रित बच्चे होने लगे हुनरमंद (ETV BHARAT)

आश्रम में बच्चों के भोजन पर फोकस

आश्रम में बच्चों को इम्युनिटी बूस्टर के लिए रोज बनने वाले भोजन में विशेष कर दाल में मोरेंगा पाउडर, खजूर का कटिंग करके दाल में डाला जाता है. रोटी बनाने से पहले आटे को हल्दी-दूध से गूंथते हैं. दालचीनी, गुड़-दूध में डालकर देते हैं. बच्चों का डॉक्टर चेकअप करते हैं. इसका उद्देश्य बीमार बच्चों को ठीक करना है.