नई परिवहन नीति के खिलाफ 8000 बस ऑपरेटर्स लामबंद, होली में थम सकते हैं बसों के पहिये
उज्जैन में नई परिवहन नीति के विरोध में बस ऑपरेटर्स ने जिला अधिकारी को सौंपा ज्ञापन, मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 26, 2026 at 10:17 PM IST
उज्जैन/ग्वालियर: मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा योजना लागू होने से पहले ही विवाद गहराता जा रहा है. प्रदेश के निजी बस संचालकों ने नई परिवहन नीति का विरोध शुरू कर दिया है. उज्जैन में मंगलवार शाम को बस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने जिला कलेक्टर और कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर बस संचालन रोकने की चेतवनी दी.
अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
प्राइम रूट बस ऑनर्स एसोसिएशन ने मंगलवार शाम को उज्जैन कलेक्टर और कमिश्नर को एक ज्ञापन सैंपा. ज्ञापन में एसोसिएशन ने कहा है कि अगर हमारी 3 सूत्रीय मांगों को नहीं माना गया तो 2 मार्च से बसों का संचालन पूर्ण रूप से रोक दिया जाएगा. इसके विरोध में बस संचालकों ने करीब 3000 हजार बसों पर काले झंडे लगा दिए हैं. एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि पूरे प्रदेश में 28 हजार 500 निजी बसें संचालित हो रही है. जिनके करीब 8 हजार मालिक हैं. सभी संचालकों ने सरकार के फैसले के खिलाफ एकजुटता दिखाई और 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है.
बैठक में लिया गया कठोर निर्णय
मध्य प्रदेश प्राइम रूट बस ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद शर्मा ने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा, "22 फरवरी 2026 को सागर में बस मालिकों और अलग-अलग बस एसोसिएशन के प्रमुख पदाधिकारीयों के साथ बैठक हुई. बैठक में निर्णय लिया गया है कि अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर 3 सूत्रीय मांगों को पूरा करने का निवेदन करेंगे. मांग पूरी नहीं होने पर 2 मार्च 2026 से स्वेच्छा से बसों का संचालन बंद कर हड़ताल करेंगे."
क्या है मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा योजना
नई परिवहन नीति में परिवहन सेवा को फिर से सरकारी नियंत्रण में लाने की तैयारी है. सरकार के पास अपनी बसें नहीं हैं, इसलिए यह सेवा पीपीपी मॉडल पर शुरू की जा रही है. इसके तहत सरकार प्राइवेट बसों को लीज पर लेकर चलाएगी, जिसके चलते एकाधिकार खत्म होने का डर निजी बस संचालकों को सता रहा है. बस ऑपरेटर्स का आरोप है कि नई व्यवस्था में बसें भले ही निजी ऑपरेटरों की हों, लेकिन नियंत्रण पूरी तरह सरकार या उससे जुड़ी कंपनियों के पास रहेगा. यह नीति धीरे-धीरे निजी बस कारोबार को खत्म कर देगी.
सरकार का लक्ष्य
इस योजना के तहत शहरी क्षेत्रों के बीच किफायती, सुरक्षित और समयबद्ध परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी. इसके साथ ही डिजिटल सिस्टम लागू करने से भ्रष्टाचार कम होगा. टिकट और संचालन में डिजिटल सुविधाएं होगी. जानकारी के अनुसार, पहली राज्य परिवहन नीति साल 2009 में लागू की गई थी. जिसके बाद अब 2025-2026 में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है.
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बस संचालकों की निजी मांग
मध्य प्रदेश प्राइम रुट बस ऑनर्स एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश जटिया ने बताया, "मोटरयान अधिनियम 1988 के नियमों में मूल परिवर्तन को प्रदेश राजपत्र असाधारण में प्रस्तावित संशोधन को वापस लिया जाए. मोटरयान अधिनियम 1988 एवं नियम 1994 मोटरयान काराधान अधिनियम में टैक्स बढ़ोतरी कर प्रदेश राजपत्र को वापस लिया जाए. 29 जनवरी को प्रकाशित संशोधन को भी पूरी तरह निरस्त किया जाए. मोटरयान अधिनियम 1988 एवं नियम 1994 के तहत संचालित बस व्यवस्था को लागू रखा जाए."
होली से पहले यात्रियों की बढ़ सकती है मुसीबतें
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भी नई परिवहन नीति के खिलाफ निजी बस संचालकों ने मोर्चा खोल दिया है. ग्वालियर-चंबल संभाग के बस ऑपरेटरों ने 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है. यह हड़ताल होली के त्यौहार से ठीक दो दिन पहले शुरू होने वाली है, जिससे प्रदेशभर में यात्रियों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं.
एकाधिकार खत्म होने की चिंता
बस यूनियन के महामंत्री पदम गुप्ता ने कहा, "सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के तहत वर्तमान निजी बस ऑपरेटरों के परमिट निरस्त कर दिया जाएगा और एक ही व्यक्ति या कंपनी को पूरे क्षेत्र का लाइसेंस देने की तैयारी है. इस व्यवस्था में ऑपरेटरों की बसें उसी व्यक्ति के माध्यम से संचालित होंगी. जिससे नियंत्रण सरकार के बजाय एक निजी इकाई के हाथ में चला जाएगा."
दो मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान
यूनियन के उपाध्यक्ष और शरद बस ऑपरेटर्स के मालिक प्रेम नारायण भटेले ने कहा, "मेरी तीन प्रमुख मांग है. टेक्स में हुई बढ़ौतरी को वापस लिया जाए, पीमित के अवधि में किए गए बदलाव को निरस्त किया जाए. साथ ही वर्तमान में जो व्यवस्था के साथ बसों का संचालन किया जा रहा है उसे जारी रखा जाए."
काग्रेस में शामिल होने की धमकी
उन्होंने चेतावनी देते हुए आगे कहा, "अगर हमारी मांगे पूरी नहीं हुई हैं तो मध्य प्रदेश में बस ऑपरेटर दो मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे. बीजेपी का सपोर्ट कर रहे हजारों लोग कांग्रेस में शामिल हो जाएंगे."
प्रदेश में वर्तमान में लगभग 28 हजार बसें संचालित होती हैं, जिनमें ऑल इंडिया परमिट और स्टेज कैरिज बसें शामिल हैं. अगर ड़ताल होती है तो इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं. क्योंकि हड़ताल की वजह से करीब 1.5 लाख यात्रियों का आवागमन बाधित होगा. साथ ही ड्राइवरों, कंडक्टरों, मैकेनिकों और बुकिंग एजेंटों सहित हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा. पहले ही होली के कारण ट्रेनों में भारी वेटिंग है. ऐसे में बसों का बंद होना यात्रियों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है.

