ट्रैफिक का झंझट खत्म, जमीन के नीचे से महाकाल लोक तक 700 मीटर की टनल, आसान होंगे दर्शन
700 मीटर का अंडरपास टनल बदलेगा महाकाल क्षेत्र की कनेक्टिविटी. सिंहस्थ से पहले तैयार होगा नया मार्ग. श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालने में अहम कड़ी. राहुल सिंह राठौड़ की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 28, 2026 at 5:20 PM IST
|Updated : August 29, 2026 at 9:47 AM IST
उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के कारण उज्जैन देश के प्रमुख धार्मिक शहरों में शामिल है. हर साल 13 करोड़ से अधिक पर्यटक और श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. श्रावण, महाशिवरात्रि, नागपंचमी, 84 महादेव, सप्त सागर, पंचकोशी यात्रा जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में यहां पर्यटकों, श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है. सिंहस्थ 2028 में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान मध्य प्रदेश सरकार ने जताया है. ऐसे मे उज्जैन के सामने सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं को शहर तक लाने के साथ साथ उन्हें व्यवस्थिति, सुरक्षित और कम ट्रैफिक वाले रास्ते से महाकाल व सिंहस्थ क्षेत्र तक पहुंचाने की है.
हरिफाटक चौराहा पार्किंग से महाकाल लोक तक टनल
इन्ही सब बातों को ध्यान में रखते हुए कमिश्नर एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह, सिंहस्थ मेला प्राधिकरण अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, आईजी राकेश गुप्ता, डीआईजी नवनीत भसीन, एसपी प्रदीप शर्मा, नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा, स्मार्ट सिटी सीईओ संदीप शिवा, महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक सहित तमाम आईएएस आईपीएस ने मिलकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में हरिफाटक चौराहा पार्किंग से महाकाल लोक तक जमीन के नीचे नया सफर तय करवाने के प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया गया है.
कहा जा सकता है 650 से 700 मीटर का अंडरपास टनल महाकाल क्षेत्र की कनेक्टिविटी बदलेगा. जो सिंहस्थ 2028 से पहले तैयार होगा और लाखों करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालने में अहम कड़ी बेनगा. इसके सामान्य दिनों में बड़े फायदे देखने को मिलेंगे. ये वाहनों के आवागमन के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा.

पैदल श्रद्धालु के साथ यातायात भी हो सकेगा डाइवर्ट
एसपी प्रदीप शर्मा ने ETV भारत से कहा, ''हर बड़े पर्व पर लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं. इंदौर उज्जैन 6 लेन हाईवे से लेकर हरिफटक चौराहा तक जो की इंदौर एयरपोर्ट की और से आने वाले, रतलाम बड़नगर मार्ग, आगर मालवा मार्ग, गरोठ, देवास, कोटा व दिल्ली मुम्बई एक्सप्रेस वे तक के मार्गों से आने वाले ट्रैफिक को भी जोड़ता है. इस दौरान ट्रैफिक का भारी दबाव और घंटे जाम की स्थिति देखने को मिलती है. जिसकी वजह से हरिफाटक चौराहा के यहां ब्रिज पर आने वाले वाहनों का दबाव इस क्षेत्र को बॉटलनेक बना देता है.

इसी समस्या के समाधान के लिए हरिफाटक चौराहे के पास बनी पार्किंग क्षेत्र से महाकाल लोक तक जमीन के नीचे 90 करोड़ से अधिक की लागत का नया अंडरपास कनेक्शन टनल अहम कड़ी साबित होगा. यह परियोजना केवल सिंहस्थ के लिए नहीं है. सामान्य दिनों में भी यह हरिफाटक क्षेत्र को वैकल्पिक यातायात कनेक्शन दे सकती है और बड़े आयोजनों के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन व क्राउड मैनेजमेंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.''

सामान्य और VIP-VVIP को भी होगी सुगमता
हरिफाटक चौराहे से महाकाल लोक तक 650 से 700 मीटर बन रहे अंडरपास टनल से एक और बड़ा फ़ायदा मिलेगा. तमाम सामान्य दर्शन करने वाले श्रद्धलुओं को अंडरपास टनल के माध्यम से डाइवर्ट किया जा सकेगा. वहीं, VIP-VVIP शीघ्र दर्शन करने वाले को हरिफाटक ब्रिज के माध्यम से डाइवर्ट किया जा सकेगा. जिससे प्रोटकॉल अनुसार व्यवस्था और सुरक्षा की दृष्टि से भी यह महत्वपूर्ण हो जाएगा. इस पूरी व्यवस्था को आसान भाषा में समझें तो श्रद्धालु हरिफाटक क्षेत्र में बनाए पार्किंग क्षेत्र में अपना वाहन खड़ा कर सकेंगे.
इसके बाद वे प्रस्तावित अंडरपास के जरिए महाकाल लोक की दिशा में जा सकेंगे व लोकल और VVIP के लिए सामान्य दिनों में हरिफाटक ब्रिज फ्री हो जाएगा. दर्शन के बाद श्रद्धालु इसी अंडरपास टनल कनेक्शन से वापस पार्किंग क्षेत्र तक लौट सकेंगे. इससे हर श्रद्धालु को अपने वाहन के साथ सीधे महाकाल क्षेत्र की भीड़ में जाने की जरूरत कम हो जाएगी.

जानिए कैसा होगा अंडरपास टनल
सिंहस्थ सेल पीडब्लूडी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अवनेंद्र सिंह ने ETV भारत को बताया, ''अंडरपास की लंबाई लगभग 650 से 700 मीटर तक होगी. यह सामान्य सड़क के नीचे बनाया जाने वाला छोटा अंडरपास नहीं होगा बल्कि दो बड़े बॉक्स वाली संरचना होगी. दोनों बॉक्स 9-9 मीटर चौड़े होंगे. एक बॉक्स मे 7.50 मीटर कैरिजवे यानी वाहनों के चलने का मुख्य हिस्सा और दोनों तरफ 1.80 - 1.80 मीटर फुटपाथ रहेगा. न्यूनतम 5 मीटर वर्टीकल क्लेरेंस, करीब 6 प्रतिशत ग्रेडिएंट, सड़क की 75 मि.मी मोटी ऊपरी परत रहेगी.
पूरे अंडरपास टनल को हरिफाटक से महाकाल लोक तक का बनाया जाना है, जो जयसिंह पूरा क्षेत्र के त्रिवेणी संग्रहालय के यहां निकलेगा. प्रत्येक बॉक्स में 7.50 मीटर कैरिजवे और न्यूनतम 5 मीटर वर्टीकल क्लेरेंस दिया गया है. मतलब स्पष्ट है कि इसका डिजाइन केवल पैदल श्रद्धालुओं के लिए नहीं है बल्कि वाहनों के आवागमन को ध्यान में रखकर भी तैयार किया गया है. दोनों हिस्सों में बड़े वाहन निकल सकेंगे और आवश्यकता पड़ने पर यहां से ट्रैफिक भेजा जा सकता है. कुल 91.74 करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी है इस काम के लिए.''

पानी की निकासी के लिए अलग सिस्टम
सिंहस्थ मेला अधिकारी एवं कमिश्नर उज्जैन आशीष सिंह ने बताया, ''जमीन के नीचे बनने वाले अंडरपास में बारिश का पानी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होता है. इसके लिए दोनों बॉक्स में अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम होगा. पानी को एक अलग संपवेल, सम्प पिट में पहुंचाया जाएगा, जहां से उसे पंप करके बाहर निकाला जा सकेगा. इसका उद्देश्य टनल के अंदर जलभराव की समस्या को रोकना है. यहां एक बात स्पष्ट है वाटर लेवल सेंसर्स पंपों की संख्या या आटोमेटिक पम्पिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं, जिससे ये बड़ा आसान होगा. पानी का स्तर बढ़ते ही कंट्रोल रूम को अलर्ट मिलेगा और पंप खुद ही सक्रिय हो जाएंगे.''
घुटन और धुएं से बचाव भी जरूरी
आशीष सिंह ने यह भी बताया, "बारिश के साथ-साथ हवा और धुएं की निकासी भी महत्वपूर्ण है, जिससे लोगो को घुटन नहीं हो. इसलिए टनल के कुछ हिस्से को ऊपर से खुला रखा जाएगा, ताकि वहां प्राकृतिक रोशनी और हवा मिल सके. इमरजेंसी के लिए टनल में हर 100 मीटर पर इमरजेंसी अलार्म व्यवस्था दी जा सकती है, जिससे किसी श्रद्धालु को स्वास्थ्य संबंधी समस्या या अन्य आपात स्थिति होने पर तत्काल सहायता दी जा सके.''

भगदड़ रोकने में कैसे मदद कर सकता है डिजाइन?
कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने कहा, ''सिंहस्थ में लाखों श्रद्धालुओं की पैदल आवाजाही होगी. ऐसे में आने और जाने वाले लोगों को एक ही स्थान पर आमने सामने आने से रोकना जरूरी होगा. दो अलग बॉक्स होने से भीड़ को अलग अलग प्रवाह में रखने की संभावना बनती है. इससे आने और जाने वालों को अलग दिशा दी जा सकती है. एक जगह पर अचानक भीड़ जमा होने का खतरा कम किया जा सकता है. ट्रैफिक और पैदल भीड़ को बेहतर तरीके से अलग किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर सुरक्षा एजेंसियों को स्पष्ट मार्ग मिल सकता है.''
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जमीन के अंदर काम शुरू, करीब 15 प्रतिशत काम पूरा
मौके पर काम कर रही टीम ने बताया, करीब 15 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. हरिफाटक पार्किंग क्षेत्र से टनल बनाने का काम शुरू हो गया है. शुरुआती हिस्से में जमीन के मौजूदा स्तर से करीब 8 से 10 मीटर नीचे जाने वाला स्लोप तैयार किया जा रहा है. अब जैसे-जैसे निर्माण जमीन के अंदर जाएगा चुनौतियां बढ़ेंगी. नीलगंगा पुलिस थाना, स्कूल, भवन, मल्टी भी निर्माण की जद में आएंगे. इसके अलावा परियोजना में सिविल वर्क, यूटिलिटी, शिफ्टिंग, जमीन अधिग्रहण भी शामिल है.

रेलवे लाइन के नीचे बनेगा सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा
टीम ने बताया, टनल का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा रेलवे लाइन के नीचे आने वाला क्षेत्र होगा. रेलवे लाइन के नीचे प्रस्तावित अंडरपास का निर्माण रेलवे द्वारा ही किया जाएगा. इसके लिए राज्य शासन की ओर से 31 करोड़ रेलवे को दिए गए हैं, यह राशि परियोजना की कुल राशि में शामिल है. रेलवे ट्रैक के नीचे काम में ट्रैक की सुरक्षा, ट्रेन संचालन और जमीन की स्थिरता जैसे विषय महत्वपूर्ण होंगे.
15 महीने की डेडलाइन, अप्रैल 2027 तक पूरा करना है काम
कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने कहा, ''15 महीने का समय निर्धारित है. अनुबंध के अनुसार, काम अप्रैल 2027 तक पूरा किया जाना है. अगर समय पर काम पूरा होता है तो सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन के पास महाकाल क्षेत्र की ओर आने जाने के लिए एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त कनेक्शन उपलब्ध होगा.''

पहले से हो रहा एक टनल का उपयोग
श्री महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया, ''मंदिर में भगवान के दर्शन तक श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए एंट्री और एग्जिट टनल पहले से उपयोग में हैं. श्रद्धालुओं को कई कतारों में प्रवेश कराया जाता है और टनल के जरिए उनका आवागमन व्यवस्थित किया जाता है. इसी व्यवस्था ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने पर क्राउड मैनेजमेंट में मदद की है. एक दिन में 13 लाख तक श्रद्धालुओं के दर्शन करने का रिकॉर्ड है, जबकि सामान्य दिनों में औसतन करीब 2 लाख श्रद्धालु हर रोज पहुंचते हैं. फिलहाल एंट्री और एग्जिट टनल श्रद्धालुओं की आवाजाही का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो श्री महाकाल लोक से गणेश मण्डपं को जोड़ती है. ये मंदिर के अंदर ही अंदर है.''

हैरिटेज होटल से शहनाई द्वार तक एक और टनल
श्री महाकाल मंदिर क्षेत्र में एक और टनल का निर्माण भी चल रहा है. यह सम्राट विक्रमादित्य हैरिटेज होटल से शहनाई द्वार न्यू वेटिंग हॉल तक बनाई जा रही है. इसकी चौड़ाई करीब 6 मीटर है. यह करीब 24 मीटर की सड़क को क्रॉस करते हुए मंदिर क्षेत्र से जुड़ेगी. इसका उद्देश्य हरसिद्धि शक्तिपीठ मंदिर, चौबिस खम्बा माता मंदिर की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में सुविधा देना है. इस तरह मंदिर क्षेत्र में अलग अलग दिशाओं से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भूमिगत कनेक्टिविटी का नेटवर्क तैयार हो रहा है. लेकिन हरिफाटक चोराहे से आ रही टनल अपने आप मे अलग है जो समय आने पर यातायात को भी डाइवर्ट करेगी.

