ETV Bharat / state

जमीन उगल रही राजा भोज से लेकर मराठा काल तक के सिक्के, शिप्रा तीर्थ में इतिहास का खजाना

क्षिप्रा परिक्रमा के 24वें वर्ष में फिर मिले प्राचीन सिक्के, प्रतिमाएं और अवशेष, उज्जैन से राहुल सिंह राठौड़ की रिपोर्ट.

UJJAIN KSHIPRA PILGRIMAGE
शिप्रा तीर्थ में इतिहास का खजाना (Etv Bharat)
author img

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : May 27, 2026 at 9:22 PM IST

4 Min Read
Choose ETV Bharat

उज्जैन : मध्य प्रदेश की क्षिप्रा नदी एक ऐसी नदी है जो तीर्थ और पुण्य फल देने के साथ हर साल अपने गर्भ में छिपे इतिहास को दुनिया के सामने ला रही है. हर साल आयोजित होने वाली दो दिवसीय क्षिप्रा तीर्थ परिक्रमा केवल आस्था का केंद्र नहीं बनती, बल्कि इतिहास और पुरातत्व की अनमोल खोजों की साक्षी भी बनती है. परिक्रमा के दौरान पुराविदों और वैज्ञानिकों की टीम लगातार प्राचीन धरोहरों की खोज में जुटी रहती हैं. इस यात्रा के बाद दो दिवसीय खोज की रिपोर्ट मध्यप्रदेश शासन को सौंपी जाती है. इस वर्ष भी क्षिप्रा परिक्रमा के साथ दो दिवसीय खोज की शुरुआत हुई, जिसकी रिपोर्ट फिर इतिहास के पन्ने खोलेगी.

ancient statues, and coins from khsipra
2100 वर्ष पुराने इतिहास की झलक (Etv Bharat)

राजा भोज और मराठा काल के सिक्के मिले

बीते साल 2025 में लगभग 150 प्राचीन मूर्तिया मिलने से इतिहास प्रेमियों में क्षिप्रा परिक्रमा को लेकर उत्साह बढ़ गया है. वहीं, इस बार वर्ष 2026 में यात्रा के दौरान हुई खोजों ने सबको चौंका दिया है.

क्षिप्रा परिक्रमा के 24वें वर्ष में फिर मिले प्राचीन सिक्के, प्रतिमाएं और अवशेष (Etv Bharat)
पुराविद डॉ. रमण सोलंकी ने बताया, '' क्षिप्रा तीर्थ परिक्रमा को 23 साल पूरे हो चुके हैं. ये 24वां साल है, जिसमें हमारी टीम ने क्षिप्रा नदी के श्रीरामघाट से 54 किलोमीटर की यात्रा कर दो दिन में श्रीरामघाट पर ही यात्रा को सम्पन्न किया. इस बीच मार्ग में पहले दिन हमें मराठा काल और परमार काल के सिक्के मिले. दूसरे दिन 1000 साल से लेकर 2100 वर्ष तक के यानी अशोक मौर्य से लेकर सम्राट विक्रमादित्य तक के समय के पुराने मंदिर के भग्नावशेष, अति प्राचीन सूर्य की लघु मूर्ति, उमा, महेश, विष्णु, गणेश और शिवलिंग की परमार कालीन प्रतिमाएं मिलीं.''
Ujjain Kshipra pilgrimage
क्षिप्रा तीर्थ परिक्रमा में निकला इतिहास का खजाना (Etv Bharat)

उन्होंने आगे कहा, '' जो सिक्के क्षिप्रा नदी पर प्राप्त हुए हैं वह नरसिंह घाट के करीब मिले हैं. जब सिक्कों को साफ किया गया तो बाद में पता लगा कि एक सिक्का राजा भोज के समय का सिक्का है और दूसरा सिक्का मराठा काल का है. दोनों सिक्के अश्विनी शोध संस्थान के डॉ. आर.सी ठाकुर को सौंप दिए गए हैं, ताकि मुद्रा संग्रहालय में सुरक्षित हो सकें.''

Parmar temple Kshipra teerth
अनोखे शिवलिंग आए नजर (Etv Bharat)

2100 वर्ष पुराने इतिहास की झलक

पुराविद डॉ. रमण सोलंकी ने अधिक जानकारी देते हुए कहा, '' रणजीत हनुमान क्षेत्र में हमें सूर्य की लघु मूर्ति मिली, जिनके दोनों हाथ में कमल दल, पैर में उपाना व सीने पर कवच पहने हुए सूर्य की दुर्लभ प्रतिमा दिखाई दी जो कि 1000 साल पुरानी थी. साथ में उमा-महेश्वर की तीन प्रतिमाएं और आठ अलग-अलग शिवलिंग जो कि विचित्र प्रकार के शिवलिंग मिले.एक ही आकार में लिंगाकार, ऊपर से गोलाकार शिवलिंग हमें दिखाई दिए. इस दौरान घाट निर्माण के दौरान निकले अवशेष भी दिखाई दिए, जिससे स्पष्ट हुआ कि रणजीत हनुमान मन्दिर का यह क्षेत्र अति प्राचीन है. यहीं हमें पास में बौद्ध स्तूप का एक टीला दिखाई दिया, जहां बौद्ध अनुयायी आकर साधना किया करते थे. जो भी अवशेष यहां मिल रहे हैं सब 1000 वर्ष से लेकर 2100 वर्ष पूर्व के सम्राट विक्रमादित्य के काल तक के अवशेष हमें यहां पर देखने को मिलते हैं.''

remains of a Parmar temple
राजा भोज और मराठा काल के सिक्के मिले (Etv Bharat)

राजा-मंत्रियों के महल, आवास

डॉ. रमण सोलंकी ने यह भी बताया, '' अधिकतर अवशेषों पर ब्राह्मी लिपि के अक्षरांकित, संस्कृत भाषा के लेख मिले हैं. दूसरा जब हम मत्स्येंद्रनाथ की समाधि पर गए, जहां देखा कि समाधि के पीछे की ओर जो टीले हैं, वह बयां करते हैं कि कभी यहां राजाओं के महल हुआ करते थे, कभी यहां मंत्रियों और सैनिकों के अपने आवास हुआ करते थे, वह अब छिन्न-भिन्न हो गए हैं. उनके ऊपर खेती हो रही है किंतु एक टीला हमें आधा दिखाई दिया, जिसपर स्तर-विन्यास (layer) स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी. उस लेयर से हमें झांकते हुए प्राचीन पात्र के साक्ष्य दिखाई दिए, जो कि बयां कर रहे थे कि हम कभी यहां पर विशाल भवन के रूप में रहे हैं. उसी मार्ग पर आगे बढ़ते हुए हम मंगलनाथ होते हुए, संदीपनी आश्रम होते हुए पुनः रामघाट की ओर प्रवेश कर गए.

Ancient coins from Kshipra
इस यात्रा में मिलीं कई प्राचीन मूर्तियां (Etv Bharat)

यह भी पढ़ें- उज्जैन में वंदे भारत ट्रेन पर पथराव, उत्पातियों ने फोड़े 4 कोच के कांच, तस्वीरें आईं सामने

कौन-कौन टीम में?

पुरातात्विक व वैज्ञानिकों के दल में डॉ. रमण सोलंकी, डॉ. शेखर मेदमवार, डॉ. अजय शर्मा, डॉ. हेमंत लोधवाल, डॉ. सर्वेश्वर शर्मा, इंजीनियर हेमंत शर्मा मौजूद थे. वहीं, वैज्ञानिको में भोपाल से आई टीम मौजूद थीं.