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महाकाल की नगरी उज्जैन में चंद्र ग्रहण हो या सूर्य ग्रहण, नहीं डालते कोई असर

महाकाल की नगरी उज्जैन में होली सेलिब्रेशन की तैयारियां पूरी. महाकाल मंदिर चौराहे पर गूंजेंगे लखबीर सिंह लक्खा के भजन.

Ujjain holi celebration
महाकाल की नगरी उज्जैन में होली सेलिब्रेशन की तैयारियां (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : March 2, 2026 at 5:24 PM IST

4 Min Read
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रिपोर्ट : राहुल सिंह राठौर

उज्जैन : होली पर्व देश में सबसे पहले महाकाल की नगरी उज्जैन में शुरू होगा. श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रांगण में होलिका दहन के साथ प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा देर शाम प्रस्तुति देंगे. खास बात यह महाकाल मंदिर के साथ ही पूरे उज्जैन शहर में चंद्र ग्रहण के बावजूद होली पर्व 3 मार्च को ही मनाया जाएगा. पुजारियों का कहना है "उज्जैन में लगने वाले ग्रहण का महाकाल की ऊर्जा के कारण कोई असर नहीं होगा. 3 मार्च को लगने वाला ग्रहण अल्पघड़ी का है. इसलिए उसकी इतनी मान्यता नहीं है."

उज्जैन में चंद्र ग्रहण हो या सूर्य ग्रहण, नहीं डालते कोई असर (ETV BHARAT)

महाकाल के आंगन में होलिका दहन

श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया "2 मार्च को भगवान श्री महाकाल के आंगन में संध्या आरती के बाद लगभग 07:30 बजे करीब वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पुजारी परिवार होलिका दहन करेंगे. होलिका में कंडे, लकड़ियों और ध्वज का उपयोग किया जाता है. होलिका का विधिवत पूजन होता है, जिसके बाद दहन ये परंपरा सिर्फ महाकाल मंदिर मे ही सबसे पहले निभाई जाती है. इसी प्रकार अगले दिन भस्म आरती में भगवान को हर्बल गुलाल लगाकर होली पर्व की शुरुआत की जाती है."

उज्जैन में होली पर्व 3 मार्च को ही मनेगा

2 मार्च को होलिका दहन होना है और 3 मार्च को होली पर्व मनाया जाना है लेकिन 3 मार्च को चंद्र ग्रहण होने से 4 मार्च को ये पर्व मनाए जाने की चर्चा जोरों पर है. उज्जैन में ज्योतिषों का भी मानना है "महाकाल के आगे कोई भी ग्रहण असरहीन होता है. होली पर्व 3 मार्च को ही मंदिर व शहर में मनाया जाएगा. होली तो 3 मार्च को ही मनाई जाएगी, जहां गैर निकलना है तो निकलेंगी."

Ujjain holi celebration
उज्जैन में होली पर्व 3 मार्च को ही मनेगा (ETV BHARAT)

सभी आरतियों के लिए हर्बल गुलाल उपलब्ध

श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अनुसार "मंदिर मे 2 साल पूर्व गर्भगृह में होली पर्व पर भस्मार्ती के दौरान आगजनी की घटना होने के कारण श्रद्धलुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस बार निर्णय लिया गया है कोई भी भक्त होलिका के पास नहीं रहे. वे भगवान के दर्शन कर रवाना हो जाएं. मंदिर में भगवान को सभी आरतियों में 1-1 किलो हर्बल गुलाल मंदिर समिति पुजारी परिवार को उपलब्ध करवाएगी. बाहर से रंग लाने में प्रतिबंध रहेगा, जिसकी मॉनिटरिंग की जा रही है."

भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा का कार्यक्रम

श्री महाकाल मंदिर चौराहे पर प्रत्येक वर्ष होलिका दहन किया जाता है. मंदिर के डमरू वादक ऋषभ बाबू यादव बीते कई सालों से इस आयोजन को करवा रहे हैं. ऋषभ बाबू यादव ने बताया "मंदिर में संध्या आरती के बाद मंदिर के चौराहे पर लखबीर सिंह लक्खा भजन प्रस्तुति देंगे." वहीं, शहर के सिंह पूरी क्षेत्र में पर्यावरण को बचाने का खास संदेश देती होलिका को लेकर पंडित अमर डब्बेवाला ने बताया "ब्रह्म मुहूर्त में होलिका के दहन की परंपरा है."

सिंह पूरी क्षेत्र की होली क्यों है खास

उज्जैन के सिंह पूरी क्षेत्र की होली पर्यावरण को संदेश देने वाली होली है. यहां होलिका में प्रत्येक वर्ष 5100 गाय के गोबर से बने कंडों का उपयोग किया जाता है. खास बात यह है यहां चकमक पत्थर बेसॉल्ट स्टोन से होलिका को दहन किया जाता है. लकड़ी का कहीं भी उपयोग नहीं होता. सिंह पूरी क्षेत्र के महेंद्र शर्मा बताते हैं "यह वही स्थान है जहां सम्राट विक्रमादित्य और राजा भर्तहरि चकमक पत्थरों से होलिका जलाते थे. किसी तरह के ज्वलनशील पदार्थ का उपयोग नहीं किया जाता."