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उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर में सवा करोड़ का गुप्तदान, 41 किलो चांदी के दान से गर्भगृह जगमग

सवा करोड़ के दान से चिंतामन गणेश मंदिर का गर्भगृह तैयार, 41 किलो चांदी का हुआ इस्तेमाल. चमचमा उठा गर्भगृह. मंयक गुर्जर की रिपोर्ट.

UJJAIN CHINTAMAN GANESH TEMPLE
उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर में सवा करोड़ का गुप्तदान (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : July 3, 2026 at 9:20 PM IST

3 Min Read
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उज्जैन: प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन स्थित प्रसिद्ध चिंतामन गणेश मंदिर का गर्भगृह अब चांदी की भव्य आभा से दमक उठा है. मंदिर के एक गुप्त दानदाता ने लगभग सवा करोड़ रुपए दान किया है. इसमें 95 लाख रुपये मूल्य की करीब 41 किलो चांदी का दान शामिल है.

जिससे गर्भगृह की दीवारों पर आकर्षक नक्काशीदार चांदी का वर्क तैयार कर स्थापित किया गया है. इस भव्य कार्य के पूरा होने के बाद मंदिर का आंतरिक स्वरूप पहले से अधिक दिव्य और आकर्षक दिखाई देने लगा है.

41 किलो चांदी के दान से गर्भगृह जगमग (ETV Bharat)

'सवा करोड़ के दान से चिंतामन गणेश मंदिर का गर्भगृह तैयार'

महाकालेश्वर मंदिर से करीब 6 किलोमीटर दूर जवास्या क्षेत्र में स्थित प्राचीन चिंतामन गणेश मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र है. हर दिन गणेश मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

चिंतामन गणेश मंदिर के पुजारी राहुल बताते हैं, "यहां भगवान गणेश के 3 स्वरूप चिंतामण, इच्छामन और सिद्धिविनायक के रूप में विराजमान हैं. यहां भगवान के एक भक्त ने सवा करोड़ का गुप्तदान किया है. भक्त ने पूरा गर्भगृह चांदी से तैयार करवाया है. इस पर रिद्धि-सिद्धि सहित कई प्रकार की नक्काशी की गई है."

'गर्भगृह तैयार करने में लगी 41 किलो चांदी'

मंदिर प्रशासक अभिषेक शर्मा ने बताया, "गुप्त दानदाता द्वारा दी गई करीब 41 किलो चांदी से विशेष डिजाइन का चांदी का वर्क तैयार कराया गया. इसके बाद गर्भगृह की दीवारों पर इसे स्थापित किया गया. लगभग 15 दिनों में यह पूरा कार्य संपन्न हुआ. गुप्त दानदाता ने यह भी वादा किया है कि आगे भी वह इसी प्रकार मंदिर में मदद करते रहेंगे. नई सजावट के बाद गर्भगृह की भव्यता और आध्यात्मिक आभा पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है, जिससे श्रद्धालु भी अभिभूत हो रहे हैं."

चिंतामन गणेश मंदिर की है विशेष मान्यता

चिंतामन गणेश मंदिर उज्जैन के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में से एक माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां विराजित भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्वयंभू हैं. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि चिंतामन स्वरूप भक्तों की चिंताओं का निवारण करते हैं. इच्छामन सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं, जबकि सिद्धिविनायक भक्तों को सफलता और सिद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं. यहीं कारण है कि वर्ष भर देशभर से हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.