बाबा महाकाल की राजसी सवारी में पहली बार गूंजा 'कैलाश वाद्यम', सवारी मार्ग बना आस्था का भव्य कॉरिडोर
उज्जैन में जय श्री महाकाल के जयघोष के बीच भाद्रपद मास के दूसरे सोमवार को बाबा महाकाल की भव्य राजसी महासवारी निकली. केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी हुए शामिल. राहुल सिंह राठौड़ की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : September 7, 2026 at 11:11 PM IST
उज्जैन: बाबा महाकाल की नगरी में सोमवार को निकली राजसी सवारी ने उज्जैन की धार्मिक परंपरा को भव्य सांस्कृतिक उत्सव में बदल दिया. महाकाल जब अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकले तो पूरा उज्जैन शिवमय हो उठा. साल 2026 की भाद्रपद मास की अंतिम और प्रमुख राजसी महासवारी में बाबा ने भक्तों को छह स्वरूपों में दर्शन दिए. बाबा की महासवारी में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल हुए और महाकाल के दर्शन किए.
1 लाख वर्गफीट से अधिक क्षेत्र में विशाल रंगोली बनाई गई
मंदिर के सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया ने बताया, सवारी में पहली बार ईशा फाउंडेशन का कैलाश वाद्यम गुंजा, सिंहस्थ महाकुंभ की थीम पर आधारित भव्य सवारी का आयोजन किया गया. 1 लाख वर्गफीट से अधिक क्षेत्र में विशाल रंगोली बनाई गई. लाइव चित्रकला के माध्यम से आकर्षक एवं भव्य दृश्य प्रस्तुति दी गई. वहीं 5 बैंड समूहों की सहभागिता रही जिसमें हर एक दल में 250 से अधिक सदस्य शामिल हुए.
सवारी मार्ग में 15 ड्रोन के माध्यम से पुष्पवर्षा की गई. युवा दल द्वारा सवारी मार्ग पर विशेष सांस्कृतिक एवं युवा-केंद्रित प्रस्तुतियां दी गईं. साथ ही सवारी मार्ग पर लाइव ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति के माध्यम से सावन माह के प्रमुख चलचित्र एवं डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया.

लाखों भक्त इस दौरान प्रमुख थीम के आकर्षण के साक्षी बने और बाबा की एक झलक पाने को लालायित नजर आए. बाबा की राजसी सवारी में मध्य प्रदेश के मंत्री गौतम टेटवाल, मंत्री प्रहलाद पटेल, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, नर्मदा परिक्रमा करने वाले दादागुरु व अन्य नेता मंत्रियों व साधु संतों की भी मौजूदगी रही.

पुलिस जवानों द्वारा दिया जाता गया गॉड ऑफ ऑनर
पुजारी आशीष गुरु ने बताया, भगवान महाकाल की सवारी महाकाल मंदिर से शाम 4 बजे नगर भ्रमण के लिए निकली. इससे पहले 3 से 4 बजे तक मंदिर के शासकीय पुजारी द्वारा भगवान का मंदिर के सभामंडप में पूजन आरती की गई. भगवान 4 बजे जैसे ही मुख्य द्वार पर आए पुलिस जवानों द्वारा उन्हें गॉड ऑफ ऑनर(सलामी) दिया गया. सलामी मिलते ही भगवान के आगे आगे घुड़सवार, तोप, परेड करते जवान संकेत देते हुए निकले कि बाबा महाकाल आ रहे हैं.

वहीं सवारी मार्ग में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, बैंड की धुन, ढोल, डमरू, देव, दानवों की वेषभूषा में मनुष्य लाखों भक्तों के आकर्षण और आस्था का केंद्र रहे. भक्त भगवान की एक झलक पाने को घंटों हाथों में फूल माला लिए स्वागत व दर्शन को आतुर दिखे.

इन मार्ग से होकर गुजरी बाबा की महासवारी
सवारी महाकाल मंदिर से शुरू होकर महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी, रामघाट, रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती समाज मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती समाज मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, मिर्जा नईम बैग, तेलीवाड़ा, कंठाल, सतीगेट होते हुए छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी बाजार से महाकाल चौराहा होती हुई मंदिर लौटी.

