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समाज में बराबरी का हक पाने 150 साल से संघर्ष जारी, अंग्रेजों के दिए जख्म अभी भी ताजा

उज्जैन में देशभर से जुटे आदिम समुदाय महासंघ के पदाधिकारी. जमीन, आवास, आरक्षण, रोजगार जैसे मुद्दों पर मंथन. राहुल सिंह राठौर की रिपोर्ट.

Ujjain sammelan Aadim Samuday Mahasangh
उज्जैन में देशभर से जुटे आदिम समुदाय महासंघ के पदाधिकारी (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : August 31, 2026 at 5:25 PM IST

3 Min Read
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उज्जैन : शुरू से ही सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे घुमंतु, अर्धघुमन्तु, विमुक्त संबंधित आदिम समुदायों को एक मंच पर लाने के लिए उज्जैन में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ. 30 व 31 अगस्त को आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के 71 समुदायों के राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर के पदाधिकारी शामिल हुए. सम्मेलन में समुदायों की एकता, संवैधानिक अधिकार और भविष्य की रणनीति को लेकर मंथन चला. सम्मेलन में जल, जगंल, जमीन, आवास, आरक्षण, जाति प्रमाण पत्र, शिक्षा, रोजगार, धर्मांतरण, पलायन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए.

बिखरे समाज को एक साथ लाने की मुहिम

अखिल भारतीय आदिम महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रूप सिंह भरभड़िया ने कहा "संगठन का प्रयास देशभर में बिखरे 70 से अधिक समुदायों को एकजुट कर उन्हें अधिकारों के प्रति जागरूक करना है. इन समुदायों का एक बड़ा वर्ग आज भी स्थायी आवास, जमीन, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा है. संगठन पूरे देश मे समाज को जोड़ने और जागरूक करने का अभियान चला रहा है, ताकि शिक्षा, सरकारी नौकरी और सत्ता में भागीदारी के साथ संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का वास्तविक लाभ समुदायों तक पहुंच सकें."

अखिल भारतीय आदिम महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रूप सिंह भरभड़िया (ETV BHARAT)

देशव्यापी संगठन खड़ा करना उद्देश्य

रूप सिंह भड़भड़िया ने कहा "समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिखराव है. अलग-अलग राज्यों और प्रशासनिक श्रेणियों में बंटे समुदायों को एक मंच पर लाकर उनकी समस्याओं को साझा मुद्दे के रूप में सरकार के सामने रखना जरूरी है. हमारा उद्देश्य समाज को फिर से एकजुट करना, लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और शिक्षा, रोजगार, सत्ता में भागीदारी दिलाना है.

आदिम समुदाय के लिए 31 अगस्त खास दिन

महासंघ के पदादिकारियों ने कहा "ब्रिटिश शासन के दौरान वर्ष 1871 में क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट लागू कर दिया गया था. इस कारण कई समुदायों को अपराधी के रूप में चिह्नित किया गया. 31 अगस्त 1952 को इस व्यवस्था से विमुक्ति मिलने की स्मृति में समुदाय इस दिन को विमुक्ति दिवस के रूप में मनाता है." महासंघ के अनुसार आदिम जातियां अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित हैं. इसलिए उन्हें उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण और सरकारी योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिला.

Ujjain sammelan Aadim Samuday Mahasangh
बिखरे समाज को एक साथ लाने की मुहिम (ETV BHARAT)

मुख्यमंत्री को 12 सूत्रीय ज्ञापन

मुख्यमंत्री के नाम 12 सूत्रीय ज्ञापन में मांग की गई कि भूमिहीन परिवारों का पुनर्वास हो, बंजर भूमि पर बसावट हो, पात्र परिवारों को भूमि आवंटित हो. एससी एसटी, विमुक्त, घुमंतु, अर्धघुमन्तु वर्ग के छात्र-छात्राओं के जाति प्रमाण पत्र से क्षेत्रीय बंधन समाप्त हो. सीहोर सहित अन्य जिलों में सालों से रह रहे पारधी, शिकारी समुदाय के परिवारों को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल किया जाए. विमुक्त, घुमंतु, अर्धघुमन्तु विभाग, अनुसूचित जनजाति की योजनाओं का लाभ मूल जाति के आधार पर दिया जाए, वरना 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए. इसके अलावा और भी कई मांगें हैं.