हरियाणा के कॉलेजों से छात्रों का मोहभंग! 2.30 लाख यूजी सीटों में 53 प्रतिशत खाली, शिक्षा विभाग के सामने लक्ष्य पूरा करने का संकट
हरियाणा के कॉलेजों की कुल 2.30 लाख उपलब्ध सीटों में से 24 अगस्त तक 1.08 सीटों पर दाखिला हुआ. पंचकूला से अविनाश शर्मा की रिपोर्ट

Published : September 2, 2026 at 2:52 PM IST
पंचकूला: हरियाणा के कॉलेजों में यूजी में दाखिलों की रफ्तार थम सी गई है. सूबे के सरकारी, सहायता प्राप्त और स्व वित्तपोषित कॉलेजों की करीब 53 फीसदी यूजी सीटें खाली हैं. कुल 2.30 लाख उपलब्ध सीटों में से 24 अगस्त तक मजह 1.08 सीटों पर ही दाखिला हो पाया है, यानी 1.22 लाख सीटें अभी भी खाली हैं. अब उच्च शिक्षा विभाग के लिए प्रदेश के कॉलेजों में यूजी में दाखिलों की संख्या बढ़ाना एक बड़ी चुनौती है. फिलहाल शिक्षा मंत्री के निर्देश पर दाखिले की अंतिम तिथि को बढ़ाना पड़ा है. दाखिले की अंतिम तारीख 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है.
हरियाणा के कॉलेजों में कम हुई यूजी में दाखिलों की संख्या: उच्च शिक्षा विभाग ने इस सत्र में कम से कम 1.50 लाख सीटों पर यूजी दाखिलों का लक्ष्य रखा है. इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए करीब 42 हजार और दाखिलों की जरूरत है. कई कॉलेज तो ऐसे हैं, जहां सीट आवंटित होने के बावजूद छात्रों ने दाखिला ही नहीं लिया. आवंटन के बाद खाली सीटों को भरना कॉलेजों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है.

यूजी में दाखिलों की दर्ज रजिस्ट्रेशन संख्या: सरकारी कॉलेजों में दाखिले के इच्छुक छात्रों की संख्या का आंकड़ा 1,68,887 है. जबकि प्रदेश के सरकारी, सहायता प्राप्त और स्व वित्तपोषित कॉलेजों में करीब 2.30 लाख सीट उपलब्ध हैं. हैरानी की बात यह है कि अंतिम तिथि बढ़ाए जाने से पहले बीती 24 अगस्त तक केवल 1.08 लाख छात्रों ने ही यूजी में दाखिला लिया. नतीजतन 53 प्रतिशत के साथ 1.22 लाख सीटें रिक्त हैं.
14 दिनों में 42 हजार दाखिलों का लक्ष्य: उच्च शिक्षा विभाग, हरियाणा ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 1.50 लाख यूजी दाखिलों का लक्ष्य निर्धारित किया है. विभाग द्वारा 1 अगस्त की शाम को बढ़ाई गई दाखिले की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 है, यानिकी अगले 14 दिनों में विभाग को लक्ष्य की पूर्ति के लिए सरकारी कॉलेज के प्रबंधकों के सहयोग से और 42 हजार दाखिले करने हैं.
पहली और दूसरी मेरिट सूची में दाखिले बढ़े: प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में यूजी में छात्रों द्वारा दाखिला नहीं लेने से उच्च शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. इस संबंध में आईटी सेल का कामकाज संभाल रहे असिस्टेंट डायरेक्टर दीपक ने बताया कि "सत्र 2025-26 की मेरिट सूची की तुलना में सत्र 2026-27 में दाखिलों की संख्या कुछ हजार जरूर बढ़ी है. पहली मेरिट सूची के अनुसार 7824 और दूसरी मेरिट सूची के अनुसार 1341 अधिक छात्रों ने दाखिला लिया है, लेकिन यह आंकड़ा भी निर्धारित लक्ष्य से काफी दूर है."

तीसरे चरण पर लड़खड़ाई दाखिला प्रक्रिया: प्रदेश के सरकारी कॉलेज में यूजी में दाखिला प्रक्रिया पर गौर करें तो पहली और दूसरी मेरिट सूची के बाद दाखिला प्रक्रिया तीसरे चरण पर पूरी तरह लड़खड़ाती दिखी है. आईटी सेल द्वारा 1,68,887 छात्रों का रजिस्ट्रेशन किया गया, लेकिन इतने छात्रों ने दाखिला लेने में दिलचस्पी नहीं दिखाई या कॉलेज अपने स्तर पर दाखिले नहीं कर सका. फिजिकल ओपन काउंसलिंग के दौरान हुए दाखिलों पर गौर करें तो जहां सत्र 2025-26 में कुल 61891 छात्रों ने दाखिला लिया था, वहीं सत्र 2026-27 में यह संख्या घटकर 38,356 रह गई है, यानी कि 23,535 दाखिले कम हुए हैं. नतीजतन तीसरे चरण पर दाखिलों में 38.03% की गिरावट दर्ज की गई है.
काउंसलिंग का समय कम होने का असर: उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार सरकारी कॉलेज में यूजी में कम दाखिले होने के सभी संभावित कारणों में से एक कारण कुछ महाविद्यालयों द्वारा काउंसलिंग का समय दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक रखना भी रहा. इससे छात्रों को प्रवेश के लिए पूरा समय और अवसर नहीं मिल सका, लेकिन यह विषय संज्ञान में आने पर विभाग द्वारा सभी महाविद्यालयों को ओपन काउंसलिंग की प्रक्रिया शाम 4 बजे तक जारी रखने के निर्देश जारी किए गए थे.
फिजिकल काउंसलिंग में शून्य पर कॉलेज: जिलावार स्थिति पर गौर करें तो करनाल, सोनीपत, महेंद्रगढ़, सिरसा, फरीदाबाद, हिसार, रोहतक और गुरुग्राम समेत अन्य जिलों में कई ऐसे कॉलेज हैं, जहां तीसरे चरण में भौतिक ओपन काउंसलिंग (फिजिकल काउंसलिंग) के दौरान एक भी दाखिला नहीं किया गया. नतीजतन, इन कॉलेजों को रेड जोन की श्रेणी में रखा गया है. मौजूदा स्थिति के अनुसार प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में उपलब्ध सीटों को भरना विभाग के लिए एक चुनौती है. इस कारण दाखिला की समयावधि को 15 सितंबर तक बढ़ाना पड़ा है.
निजी विश्वविद्यालय व विदेश का रूझान: शिक्षाविद प्रोफेसर अविनाश पाठक के अनुसार हरियाणा में यूजी दाखिलों में कमी आने के प्रमुख कारण छात्रों में अन्य राज्यों और निजी विश्वविद्यालयों की ओर रूझान बढ़ना, रोजगारपरक व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के प्रति आकर्षण और विदेशों में जाकर पढ़ाई करने के चलन का बढ़ना भी है. इसके विपरीत हरियाणा में कई सरकारी कॉलेजों में सुविधाओं और पाठ्यक्रमों की कमी भी प्रभावित करती है.

क्या है कम दाखिले के कारण? प्रोफेसर अविनाश पाठक ने बताया कि "सरकारी कॉलेजों की सीटें नहीं भरने का कारण राज्य में जरूरत से अधिक कॉलेजों का खुलना है. इनमें सरकारी, निजी, सेल्फ फाइनेंसिंग व अन्य हैं. इसके अलावा युवाओं का रूझान भी स्किल एजुकेशन की तरफ बढ़ा है, क्योंकि कोई काम सीखता है, कोई आईटीआई में टेक्निकल फील्ड की ओर जाता है तो कोई पॉलोटेक्निक व इंजीनियरिंग में चला जाता है, बीई करना, स्किल कोर्स करना, काम-धंधे संबंधी कोर्स करना उचित समझते हैं. किसी बड़े शहर जाकर या विदेश जाकर काम कौशल संबंधी पढ़ाई की ओर रूझान बढ़ा है. उन्होंने कहा कि कॉलेजों में एडमिशन के मुकाबले कक्षाओं में हाजिरी ओर भी कम है."

