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मंत्री खर्रा बोले-अगस्त से पहले निकाय चुनाव नामुमकिन, यूडीएच मंत्री ने एसआईआर पर भी उठाए सवाल

सरकार ने हाईकोर्ट में आवेदन दाखिल कर 309 नगरीय निकायों में चुनाव करवाने के लिए न्यूनतम तीन महीने का अतिरिक्त समय मांगा है.

Jhabar Singh Kharra, UDH Minister
झाबर सिंह खर्रा , यूडीएच मंत्री (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : April 14, 2026 at 8:17 PM IST

3 Min Read
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जयपुर: यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने विशेष गहन पुनरीक्षण(Special Intensive Revision) की वैधानिकता पर सवाल उठाए हैं. प्रदेश के 309 नगरीय निकायों में चुनाव कराने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट की समय सीमा के बीच अब राज्य सरकार ने राहत की मांग की है. सरकार ने हाईकोर्ट में आवेदन दाखिल कर चुनाव करवाने के लिए न्यूनतम तीन महीने का अतिरिक्त समय मांगा है. उन्होंने आवेदन के साथ एक तरफ ओबीसी आरक्षण की अधूरी प्रक्रिया, साथ ही एसआईआर के बाद राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से तैयार कराई गई नई मतदाता सूची से उपजे विवाद का हवाला दिया है. हाईकोर्ट ने नगरीय निकाय चुनाव के लिए 15 अप्रैल 2026 तक की डेडलाइन तय की थी, लेकिन इस अवधि में चुनाव कराना सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित हुआ. मंत्री खर्रा ने बताया कि सरकार ने अपने आवेदन में दो बड़ी बाधाओं का जिक्र किया है, जिनकी वजह से चुनाव प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो पा रही है.

ओबीसी आरक्षण पर अधूरी प्रक्रिया :यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के मुताबिक नगरीय निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण लागू करने से पहले 'ट्रिपल टेस्ट' प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है. इसके तहत राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को सटीक आंकड़े पेश करने थे, लेकिन आयोग अब तक ये प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाया है. ऐसे में बिना आंकड़ों के ओबीसी को राजनीतिक आरक्षण देना संभव नहीं है, जो चुनाव में बड़ी कानूनी अड़चन है.

यूडीएच मंत्री खर्रा बोले... (ETV Bharat Jaipur)

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मतदाता सूची पर विवाद: खर्रा ने बताया कि मतदाता सूची को लेकर भी समस्या सामने आई है. राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तैयारी के तहत पुरानी मतदाता सूची के आधार पर नई सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी. इससे पहले SIR के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए थे. बाद में तैयार नई सूची में मृतकों को छोड़कर अधिकांश नाम फिर से जोड़ दिए गए. इससे अब दो बड़े सवाल खड़े हो गए हैं. एक एसआईआर की वैधानिकता क्या रही? दूसरा नई मतदाता सूची, जिसमें नाम फिर से जोड़े गए हैं, उसकी कानूनी स्थिति क्या होगी?

हाईकोर्ट में सरकार का पक्ष :यूडीएच मंत्री खर्रा ने कहा कि इन दोनों मुद्दों को आधार बनाकर राज्य के महाधिवक्ता ने हाईकोर्ट में सरकार का पक्ष रख स्पष्ट किया है कि बिना ओबीसी आंकड़ों के चुनाव कराना सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होगा. मतदाता सूची में असमंजस के चलते चुनाव की पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है. इसी आधार पर सरकार ने चुनाव कराने के लिए कम से कम तीन महीने का अतिरिक्त समय मांगा है.

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अगस्त से पहले चुनाव मुश्किल :खर्रा ने साफ किया है कि वो हाईकोर्ट के अंतिम फैसले का पूरी तरह पालन करेंगे, लेकिन अगस्त से पहले किसी भी हाल में चुनाव संभव नहीं है. बहरहाल, सरकार ने कोर्ट में आवेदन दाखिल करते हुए कम से कम तीन महीने मांगे हैं. ऐसे में हाईकोर्ट सरकार की मांग स्वीकार करता है तो प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव अगस्त 2026 से पहले होना नामुमकिन है.

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