यूडीएच मंत्री खर्रा कोटा में बोले- कांग्रेस शासन में नगरीय निकायों की परिसंपत्ति की फ्री बंदरबांट से बिगड़ी स्थिति
मंत्री खर्रा ने कहा कि यदि विपक्षी दल बिना ओबीसी आरक्षण के निकाय चुनाव करवाने पर अपनी लिखित सहमति जता दें तो सरकार तैयार है.

Published : July 7, 2026 at 1:32 PM IST
कोटा: यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कांग्रेस पर नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति बिगाड़ने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार में निकायों ने बिना आय के 8 गुना खर्च किया और परिसंपत्तियों की बंदरबांट की गई. इसका भुगतान अब सरकार कर रही है. मंगलवार कोटा पहुंचे खर्रा ने केडीए और नगर निगम के शहरी सेवा शिविर में भाग लिया और पट्टे वितरित किए. उन्होंने कहा कि सरकार ने 113 नए निकायों का विस्तार-परिसीमन किया है ताकि वे नई कॉलोनियां बनाकर आय बढ़ाएं. खर्रा ने कोटा में भूखंड बिक्री के लिए सेल परमिशन की अनिवार्यता पर जांच के आदेश दिए. उन्होंने कहा कि लीगल राय लेकर इसे खत्म किया जाएगा. नगरीय निकायों की फाइलें ऑनलाइन और समयबद्ध करने की योजना भी बताई. कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि बिना आरक्षण चुनाव को लिखित सहमति दें तो सरकार तैयार है.
मंत्री खर्रा ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार में आर्थिक कुप्रबंधन कर दिया था. इसी को अभी तक सुधार रहे हैं. जिन नगरीय निकायों की स्थिति 1 रुपए खर्च करने की नहीं थी, उन्होंने 8 रुपए तक खर्च कर दिए हैं. जिनके भुगतान अभी तक हम कर रहे हैं. यहां तक कि नगरीय निकायों की परिसंपत्तियों को कांग्रेस ने अपने लोगों में बंदरबांट की. इसी के चलते स्थिति बिगड़ गई है. अब नए 113 नगरीय निकायों का विस्तार और परिसीमन किया गया है, जिससे कि वे नई कॉलोनियां विकसित कर आय अर्जित कर सकें. सुबह लाडपुरा विधायक कल्पना देवी के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया.
कोटा की सेल परमिशन पर भी चर्चा: कोटा के संबंध में केडीए कमिश्नर बचनेश अग्रवाल ने उनसे कहा कि यहां पर सेल परमिशन लेनी पड़ती है, जबकि अन्य जगहों पर व्यक्ति सीधा भूखंड सेल कर सकता है. इस पर मंत्री ने कहा कि पूरे प्रकरण का पत्र भेजें और क्या कारण रहा है, इसकी जांच करवाई जाएगी. क्यों यहां पर सेल परमिशन पर रोक लगाई गई थी, लीगल राय लेकर इसे वापस खोला जाएगा ताकि लोगों को सेल परमिशन लेने के लिए अनुमति नहीं लेनी पड़े. उन्होंने कहा कि ढाई साल में सरकार ने काफी काम किया है. सरकार पूरी तरह से नगरीय निकायों की पत्रावलियों को ऑनलाइन करना चाहती हैं, ताकि व्यक्ति यह देख सके कि उसकी फाइल कहां पर है. पत्रावली निस्तारण की समय सीमा भी तय करेंगे, ताकि आम आदमी को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके और बिना कारण पत्रावलियां लंबित न हों.

कांग्रेस पर भ्रमित करने का आरोप: नगरीय निकाय और पंचायतीराज के चुनाव के संबंध में मंत्री खर्रा ने कहा कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित है. सरकार ने पूरी कार्रवाई चुनाव के लिए मार्च में ही कर दी थी. कोर्ट में मामला भी अब निस्तारित हो गया है. ऐसे में सरकार चुनाव के लिए तैयार है. कांग्रेस के आरोपों पर उन्होंने कहा कि विधानसभा में भी कहा था कि कांग्रेस और विपक्षी दल लिखकर दे दें कि वे बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव करना चाहते हैं, तो सरकार तैयार है, लेकिन अभी तक उनका कोई जवाब या पत्र नहीं मिला है. वे केवल जनता को भ्रमित करने में जुटे हुए हैं. केडीए में शामिल हुए नए गांव के लोगों के विरोध के सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांग जायज है तो सरकार कदम उठाएगी, लेकिन यदि कोई केवल राजनीति करना चाहेगा तो उस पर कुछ नहीं कहा जा सकता. इससे पहले कोटा पहुंचने पर सर्किट हाउस में जाट समाज कोटा की तरफ से उनका स्वागत किया गया. इस दौरान जिलाध्यक्ष रवि चौधरी व हरीश चौधरी सहित कई जाट समाज के लोग पहुंचे. उन्होंने जाट समाज कोटा को आवंटित भूमि के संबंध में बातचीत की. मंत्री खर्रा ने उचित आश्वासन भी दिया.

बारां में लगे खराब सड़कों के पोस्टर: यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के बारां दौरे से पहले शहर की खराब सड़कों की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए विभिन्न स्थानों और महाराणा प्रताप चौक पर पोस्टर लगाए गए. पोस्टरों में लिखा है 'मंत्रीजी का बारां की सड़कों पर स्वागत है' और 'बदहाल सड़कों से कब मिलेगी निजात'. साथ ही जर्जर सड़कों की तस्वीरें भी चस्पा की गई हैं. स्थानीय लोगों का कहना था कि बारां की कई प्रमुख सड़कें लंबे समय से गड्ढों से भरी हैं. बरसात में आवागमन ठप हो जाता है और हादसों का खतरा बढ़ जाता है. कई बार मांग के बावजूद सुधार नहीं हुआ.

