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उदयपुर: अब घर बैठे होगा किडनी डायलिसिस, आरएनटी मेडिकल कॉलेज में CAPD तकनीक शुरू

उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज में CAPD डायलिसिस की नई सुविधा से मरीज अब घर बैठे इलाज करा सकेंगे.

CAPD डायलिसिस
आरएनटी मेडिकल कॉलेज में CAPD डायलिसिस की सुविधा शुरू (ETV Bharat Udaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : May 27, 2026 at 7:27 PM IST

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उदयपुर: झीलों की नगरी उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज के नेफ्रोलॉजी विभाग ने किडनी रोगियों के उपचार में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. विभाग ने पहली बार कॉन्टिनुअस एम्बुलेटरी पेरिटोनियल डायलिसिस (सीएपीडी) तकनीक को सफलतापूर्वक लागू किया है. इस नई सुविधा से गंभीर किडनी मरीजों को बार-बार अस्पताल आने, लंबी प्रतीक्षा और भारी खर्च की परेशानी से मुक्ति मिलेगी, अब मरीज घर पर स्वयं या परिवार की मदद से डायलिसिस कर सकेंगे.

मरीज के पेट में विशेष कैथेटर: नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. पंकज बेनीवाल ने बताया कि सीएपीडी एक आधुनिक डायलिसिस पद्धति है. इसमें मरीज के पेट में विशेष कैथेटर लगाया जाता है, जिसके जरिए डायलिसिस द्रव शरीर में पहुंचाया जाता है. यह द्रव विषैले तत्वों और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालता है. उचित प्रशिक्षण के बाद मरीज इसे घर पर सुरक्षित रूप से कर सकता है. यह तकनीक खासतौर पर उन मरीजों के लिए फायदेमंद है जिनका हेमोडायलिसिस के दौरान ब्लड प्रेशर बार-बार गिर जाता है, नसों में डायलिसिस एक्सेस बनाना मुश्किल होता है या जो गंभीर हृदय रोग से पीड़ित हैं. दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों और बच्चों के लिए भी यह सुविधा बेहद उपयोगी साबित होगी.

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घर पर ही डायलिसिस: विभाग में यह प्रक्रिया 21 वर्षीय क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित एक युवती पर सफलतापूर्वक की गई. मरीज पिछले तीन महीने से हेमोडायलिसिस पर थी, लेकिन बार-बार ब्लड प्रेशर अस्थिर होने और एक्सेस संबंधी समस्याओं के कारण चिकित्सकों ने सीएपीडी अपनाया. अब वह घर पर ही डायलिसिस कर सकेगी. खास बात यह है कि यह सुविधा मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है.

क्रिटिकल मरीजों के लिए फायदा: कॉलेज प्राचार्य डॉ. राहुल जैन ने इसे संभाग के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के मरीजों के लिए बड़ी राहत बताया. वहीं सुपर स्पेशलिटी अस्पताल अधीक्षक डॉ. विपिन माथुर ने कहा कि यह तकनीक क्रिटिकल मरीजों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी. इस उपलब्धि में डॉ. हर्षा मखीजा, डॉ. जयदीप राज डामोर सहित पूरी विशेषज्ञ टीम और स्टाफ ने अहम भूमिका निभाई.

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