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Udaipur MB Hospital : सिकल सेल कॉम्पिटेंस सेंटर आदिवासी अंचल के लिए बना 'जीवनदायिनी'

Sickle Cell Disease- उदयपुर का एमबी अस्पताल दे रहा नया जीवन. सिकल सेल मरीजों के लिए कर रहा ये खास काम. यहां जानिए...

Udaipur Maharana Bhupal Hospital
महाराणा भूपाल अस्पताल सिकल सेल (ETV Bharat Udaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 7, 2026 at 4:01 PM IST

3 Min Read
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उदयपुर: दक्षिणी राजस्थान का सबसे बड़ा अस्पताल महाराणा भूपाल अस्पताल अब आदिवासी अंचल के लिए जीवनदायिनी साबित हो रहा है. उदयपुर एवं आसपास के आदिवासी अंचल के लिए सिकल सेल कॉम्पिटेंस सेंटर एक वरदान के रूप में उभर कर सामने आया है.

भारत सरकार के ट्राइबल अफेयर्स डिपार्टमेंट द्वारा दिसंबर 2024 में शुरू किया गया यह सेंटर भारत का दूसरा सिकल सेल कॉम्पिटेंस सेंटर है, जो सिकल सेल रोग (SCD) से पीड़ित मरीजों को एक ही छत के नीचे समग्र सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है. यहां मरीजों की स्क्रीनिंग, बीमारी की शुरुआती पहचान, आवश्यकता अनुसार भर्ती कर इलाज, टीकाकरण तथा नियमित फॉलो-अप की सुविधाएं दी जा रही हैं.

एमबी अस्पताल के अधीक्षक ने क्या कहा, सुनिए... (ETV Bharat Udaipur)

अलग-अलग राज्यों से पहुंच रहे मरीज : एमबी अस्पताल की अधीक्षक आरएल सुमन ने बताया कि राजस्थान सरकार द्वारा अप्रैल 2025 से सभी आयु वर्ग के मरीजों को भर्ती करने के दिशा-निर्देश जारी किए गए. इसके तहत प्रारंभिक चरण में बाल चिकित्सालय में पांच बेड से इसकी शुरुआत की गई. वर्ष के अंत तक इस केंद्र में कुल 197 मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें 137 मरीज 18 वर्ष से कम आयु के तथा 60 मरीज 18 वर्ष से अधिक आयु के रहे. भर्ती मरीजों में सबसे अधिक 99 मरीज उदयपुर जिले से थे, जबकि बांसवाड़ा से 48, प्रतापगढ़ से 14, डूंगरपुर से 10 और सिरोही, पाली सहित अन्य जिलों से भी मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचे. इस सेंटर पर मध्य प्रदेश और गुजरात से भी मरीज आते हैं.

इस वर्ष 168 नए सिकल सेल मरीजों की पहचान की गई. वहीं, वर्ष 2022 से शुरू हुए इस केंद्र में अब तक कुल 572 मरीज इलाज एवं फॉलो-अप के तहत नियमित रूप से देखरेख में हैं. कई मरीज अत्यंत गंभीर अवस्था में यहां पहुंचे, लेकिन समय पर उपचार से उन्हें नया जीवन मिला. अधीक्षक डॉ. आरएल सुमन एवं नोडल ऑफिसर के अनुसार, बलराम नामक मरीज गंभीर सांस की तकलीफ के साथ भर्ती हुआ था, जिसे सिकल सेल चेस्ट सिंड्रोम डायग्नोज किया गया. उसे 10 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया और छह बार रक्त चढ़ाने के बाद उसकी जान बचाई जा सकी. आज वह नियमित फॉलो-अप में है. इसी प्रकार ऋषभदेव से आए महेश कटारा केवल 2 ग्राम हीमोग्लोबिन के साथ गंभीर अवस्था में भर्ती हुए, जिन्हें सिकल सेल हिमोलिटिक क्राइसिस था. कई बार रक्त चढ़ाने के बाद अब उनकी स्थिति स्थिर है.

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डॉ. सुमन ने बताया कि सिकल सेल एक अनुवांशिक बीमारी है, जिसमें हीमोग्लोबिन की संरचना में म्यूटेशन के कारण लाल रक्त कणिकाएं हंसिया के आकार की हो जाती हैं, जिससे रक्त नलिकाओं में रुकावट पैदा होती है. भारत सरकार का सिकल सेल उन्मूलन कार्यक्रम 2047 तक इस बीमारी की रोकथाम के लक्ष्य पर कार्य कर रहा है, जिसका उद्देश्य नए सिकल सेल जन्म को रोकना और वर्तमान मरीजों को समय पर इलाज देना है.

इस दिशा में केंद्र द्वारा वर्ष भर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिनमें अब तक 10 जिलों के 600 से अधिक नर्सिंग स्टाफ और 300 डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया गया. भविष्य में यह सेंटर न केवल उदयपुर संभाग, बल्कि पूरे राजस्थान के सिकल सेल मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित होगा.