जमीन पर नहीं हवा में झूल रहे पुल के पिलर, आते-जाते डरते हैं लोग
मुंगेर में महाने नदी पर बना एक पुल हादसों को दावत दे रहा. दो पिलर हवा में झूल रहे हैं. प्रिंस दिलखुश की ग्राउंड रिपोर्ट

Published : April 20, 2026 at 7:43 PM IST
मुंगेर: राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के गृह जिले मुंगेर के तारापुर विधानसभा क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जहां दो दर्जन से अधिक गांवो को जोड़ने वाले एक पुल के दो पिलर हवा में झूलते नजर आ रहे हैं. इसको लेकर ग्रामीणों में भय का मौहाल साफ देखा जा रहा है. लोग अपनी जान को जोखिम में डालकर पुल को पार करते हैं. वहीं इस पुल की जगह नए पुल के निर्माण को हरी झंडी मिल चुकी है, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ है.
खतरनाक है पुल की हालत: फिलहाल लोगों को इसी जर्जर पुल का सहारा है. इस पुल की हालत ऐसी है कि यह पुल कभी भी गिर सकता है,लेकिन इसके बावजूद हर दिन हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इस पुल से गुजर रहे हैं. यह मामला बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के गृह जिला मुंगेर और उनके विधानसभा क्षेत्र तारापुर का है. पुल का इस्तेमाल करने वाले लोग जल्द से जल्द इसे दुरुस्त करने की मांग कर रहे हैं.

पुल के नीचे खौफनाक मंजर: मुंगेर जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर एक तरफ टेटिया बंबर प्रखंड के कटियारी पंचायत में स्थित महाने नदी और दूसरी तरफ संग्रामपुर प्रखंड क्षेत्र के पतघाघर गांव को जोड़ने वाला यह पुल इन दिनों बड़ी दुर्घटनाओं का संकेत दे रहा है. आठ पिलरों पर खड़े इस पुल के दो पिलर हवा में झूल रहे हैं. ऐसे में ग्रामीणों के बीच भय का माहौल बना हुआ है.
सीएम सम्राट चौधरी को है पुल की जानकारी: ग्रामीण सुमन कुमार झा कहते हैं कि अगर यह पुल टूट जाता है तो लगभग 5 लाख की आबादी प्रभावित होगी. साथ ही 10-12 किलोमीटर की दूरी तय कर इस पार से उस पार जाना आना पड़ेगा. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस पुल को लेकर पूर्व में चिंता व्यक्त किए थे.अब स्थानीय विधायक सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री हैं. उनके संज्ञान में भी इस पुल की जानकारी दी गई है.अब देखना है कि कबतक इस क्षतिग्रस्त पुल का निर्माण किया जाता हैं.

"पुल काफी पुराना और जर्जर हो चुका है. पिछले कई महीनों से इसकी स्थिति खराब बनी हुई है.कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इसकी सूचना दी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है."- सुमन कुमार झा, ग्रामीण
हवा में लटके 8 में से 2 पिलर: ऊपर से देखने पर पुल की सड़क पूरी तरह सही-सलामत नजर आती है, लेकिन नीचे का दृश्य बेहद डरावना है. 8 पिलरों में से पुल के दो पिलरों के नीचे की मिट्टी और बालू नदी के तेज बहाव में बह चुकी है, जिससे पिलर का बड़ा हिस्सा हवा में लटका हुआ है.स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि पूरे पुल का भार अब इन कमजोर पिलरों पर टिका हुआ है.

हो चुके हैं कई हादसे: ग्रामीण सुखदेव यादव बताते हैं कि पुल की स्थिति बहुत खराब है. गाड़ियां सीधे नदी में उतर जाती हैं. बड़ा हादसा होता रहता है. सरकार खुद यहां आकर देखें, इस पुल की स्थिति कितनी जर्जर है. हमलोगों के कहने से कोई नहीं मानेगा. हमलोग यही चाहते हैं कि यह पुल कल बने सो आज बन जाए. अब तो हमारे यहां का मुख्यमंत्री बन गया है.
"पुल की स्थिति बहुत ही खराब है. पुल की हालत बहुत जर्जर हो चुकी है. पुल का दो पिलर (पाया) साफ दिख रहा है कि हवा में झूल रहा है. पुल को बने लगभग 30 साल हो चुके हैं. इस बीच आजतक इस पुल का कोई मेंटेनेन्स नहीं किया गया."- सुखदेव यादव, ग्रामीण

दो दर्जन गांवों की लाइफलाइन: स्थानीय लोग,पुल से गुजरने वाले दो पहिया,तीन पहिया,चार पहिया वाहन सहित अन्य वाहन चालको का कहना है कि अगर जल्द से जल्द इस पुल की मरम्मत नहीं की गई तो पुल किसी भी समय ध्वस्त हो सकता है. यह पुल पतघाघर गांव और जमुआ गांव को जाने वाली एक बड़ी आबादी को मुख्य मार्ग से जोड़ता है और करीब दो दर्जन से अधिक गांवों की जीवनरेखा बना हुआ है.
"बरसात और बाढ़ के समय हमलोगों सबसे ज्यादा डर रहता है क्योंकि बाढ़ के समय पानी पुल के ऊपर से बहने लगता है, जिस कारण पुल की सड़क का पता नहीं चल पाता है. वहीं इस पुल पर कोई रेलिंग नहीं होने के कारण दर्ज़नों दुर्घटनाएं घट चुकी हैं,जिसमे कइयों की जान तक चली गई है."- सुरेन यादव,स्थानीय निवासी
इन गांवों पर पड़ेगा असर : क्षतिग्रस्त होने के बावजूद भी रोजाना सैकड़ों वाहन और हजारों लोग इस पुल से गुजरते हैं.अगर यह पुल टूटता है तो पतघाघर, खपड़ा, पौड़िया, सुपोल, जमुआ, गोनय, सराय, चांदपुर, झुंझुनिया सहित दर्जनों गांवों का संपर्क पूरी तरह से टूट जाएगा. ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुल ध्वस्त हुआ तो हमलोगों को 10 से 15 किलोमीटर घूमकर जाना आना पड़ेगा.

सेफ गार्ड पिलर भी टूटा: स्थानीय छबिलाल यादव ने बताया कि पुल डैमेज है. दो पाया टूटा हुआ है. पुल के ऊपर सड़क के दोनों किनारे का सेफ गार्ड पिलर भी टूटा हुआ है.डर लगता है.
"यह एक मात्र रास्ता है जो तारापुर मुख्य बाजार को जोड़ता है, जबकि पतघाघर गांव से खपड़ा को जोड़ने वाला यह एकमात्र पुल है. दर्जनों गांव की बड़ी आबादी डर के साये में रोजाना इस पुल को पार करती है."- छबिलाल यादव,स्थानीय निवासी
टोटो चालक की रोजी-रोटी का सवाल: टोटो चालक अनूप साव ने कहा कि जितनी बार टोटो से पैसेंजर लेकर जाते हैं, मन में डर बना रहता है. पुल बहुत पुराना है. पुल 2020 के बाढ़ में बहुत ज्यादा क्षतिग्रस्त हो गया है. बाढ़ में पुल के दो पिलर पूरी तरह टूट चुकी है. लेकिन रोजी-रोटी के लिए जान हथेली पर रखकर यहां से गुजरना पड़ता है.

"कभी भी पुल गिर सकता है.अगर पुल बंद हो गया तो 10 से 15 किलोमीटर घूमकर जाना आना पड़ेगा.सरकार को होना चाहिए कि पुल को नया बनाया जाए. बड़े-बड़े बालू लदे ट्रक इस पुल से गुजरते हैं. कभी भी पुल धंस सकता है."- अनूप साव,टोटो चालक
30 साल पुराना पुल: स्थानीय निवासी पिंटू मांझी ने कहा कि महाने नदी पर बना यह पुल 30 साल पुराना है. पुल का दो पिलर नीचे से टूट गया है.कभी भी पुल गिर सकता है.रोजाना बड़ी-छोटी सभी तरह की गाड़ियां इस पुल से गुजरती रहती हैं. अगर यह पुल गिर जाता है तो यहां के गांव वालों को संग्रामपुर मुख्य बाजार जाने में 10 से 15 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ेगा.
"हमारी सरकार से मांग है कि जल्द से जल्द इस पुल को बनाया जाए, जिससे हमलोगों को आने जाने में दिक्कत नहीं हो. हो सकता है आने वाले बरसात और बाढ़ के कारण यह पुल टूट कर बह जाए."-पिंटू मांझी,स्थानीय निवासी
जिला प्रशासन क्या कर रहा है?: वहीं दूसरी ओर मुंगेर जिलाधिकारी निखिल धनराज से हमने फोन पर बात की तो उन्होंने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है और वीडियो भी देखा गया है. ग्रामीण कार्य विभाग को निर्देश दिया गया है कि जल्द ही इस स्थान पर नए पुल का निर्माण कराया जाए.
"मुंगेर जिले के एक तरफ संग्रामपुर प्रखंड क्षेत्र के पतघाघर गांव और दूसरी तरफ टेटिया बंबर प्रखंड क्षेत्र के खपड़ा गांव को जोड़ने वाले महाने नदी पर बने पुल का मामला संज्ञान में आया है,जिसका वीडियो भी मैंने देखा है. कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग को निर्देशित किया है. जल्द ही लोगों को नए पुल की सौगात मिलेगी. इसको लेकर पत्र भी जारी कर दिया गया है."- निखिल धनराज, मुंगेर जिलाधिकारी
पुराना पुल होगा ध्वस्त..: अब इस स्थान पर राज्य योजना के तहत नाबार्ड मद से नए पुल का निर्माण स्वीकृत किया गया है. संग्रामपुर में महाने नदी पर 68.48 मीटर लंबा RCC ब्रिज बनेगा और पुराना पुल किया ध्वस्त किया जाएगा. ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल खड़गपुर-तारापुर के अंतर्गत संग्रामपुर प्रखंड क्षेत्र में स्थित क्षतिग्रस्त पुलिया को हटाकर अब एक नए उच्च स्तरीय आरसीसी पुल (HL RCC Bridge) का निर्माण कराया जाएगा.

बनेगा 68.48 मीटर लंबा नया पुल: बताया गया कि उक्त स्थान पर मौजूद पुलिया का निर्माण लगभग 20 से 30 वर्ष पूर्व जिला या स्थानीय योजना के तहत कराया गया था. यह पुलिया 5 मीटर का कंटीन्यूस स्लैब कल्वर्ट (Continuous Slab Culvert) है, जो वर्तमान में पूरी तरह जर्जर और क्षतिग्रस्त हो चुका है. इसकी स्थिति को देखते हुए विभाग ने इसे तोड़कर नए पुल के निर्माण का निर्णय लिया है.
2027 तक पूरा होगा कार्य: राज्य योजना एवं नाबार्ड (NABARD) मद से स्वीकृत इस परियोजना के तहत पीएमजीएसवाई रोड एल 053 दुर्गापुर से खपरा 13 मुसहरी में सीएच 1500 पर महाने नदी पर एचएल आरसीसी पुल का निर्माण निर्माण किया जाएगा. 68.48 मीटर लंबे पुल में 4 स्पैन (प्रत्येक 16.57 मीटर) शामिल हैं. इस परियोजना का एग्रीमेंट 29 नवंबर 2025 को किया गया है.निर्माण कार्य की शुरुआत भी इसी दिन से मानी गई है, जबकि इसे पूरा करने की निर्धारित तिथि 28 नवंबर 2027 तय की गई है.
विभाग के अनुसार, पहले पुराने जर्जर पुलिया को पूरी तरह डिस्मेंटल (Dismantle) किया जाएगा. उसके बाद नए आधुनिक और मजबूत पुल का निर्माण किया जाएगा.इस पुल के बन जाने से क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा और स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलेगी.खासकर बरसात के मौसम में लोगों को बड़ी राहत मिलेगी.
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