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2023 का वो खूनी दिन, ढाई साल बाद हुआ इंसाफ.. पत्रकार विमल हत्याकांड में दो दोषियों को उम्रकैद

अररिया में पत्रकार विमल कुमार हत्याकांड में कोर्ट ने दो दोषियों को उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई है. पढ़ें पूरी खबर-

JOURNALIST VIMAL KUMAR MURDER CASE
पत्रकार विमल यादव हत्याकांड (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 27, 2026 at 8:09 AM IST

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अररिया: बिहार के अररिया जिले में रानीगंज के पत्रकार विमल कुमार उर्फ पप्पू हत्याकांड में गुरुवार को कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. एडीजे चतुर्थ रवि कुमार की अदालत ने दो आरोपियों को धारा 302/34 आईपीसी के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. यह फैसला घटना के ढाई साल बाद आया है, जिसने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी थी. पत्रकार की हत्या उनके भाई की हत्या के चश्मदीद गवाह होने और गवाही से मुकरने से इनकार करने के प्रतिशोध में की गई थी.

2023 में हुई थी पत्रकार की हत्या: 18 अगस्त, 2023 की सुबह सवा पांच बजे प्रेमनगर साधु आश्रम मुहल्ले स्थित अपने घर के दरवाजे पर विमल कुमार को बाइक सवार अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. विमल एक दैनिक अखबार के पत्रकार थे और उनके छोटे भाई कुमार शशिभूषण उर्फ गब्बू की कुछ साल पहले हत्या हुई थी. विमल उस हत्याकांड के प्रमुख चश्मदीद गवाह थे और भाई के हत्यारों के ट्रायल में गवाही देने के दबाव में थे. गवाही से नहीं झुकने के कारण ही उनका प्रतिशोध लिया गया.

पत्रकार विमल यादव हत्याकांड (ETV Bharat)

कोर्ट का फैसला: अदालत ने रानीगंज थाना क्षेत्र के कोशकापुर उत्तर वार्ड के 23 वर्षीय माधव कुमार उर्फ लाट साहब (पिता उमेश कुमार यादव) और भरना मनुल्लाहपट्टी वार्ड के 30 वर्षीय विपिन यादव (पिता श्रीलाल यादव) को दोषी करार दिया. धारा 302/34 भादवि में दोनों को उम्रकैद के साथ 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है. इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 27 में तीन वर्ष की सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया गया. जुर्माना न चुकाने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान भी किया गया है. माधव कुमार 23 अगस्त 2023 से ही जेल में बंद हैं.

मुकदमे की कार्यवाही: मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक प्रभा कुमारी ने मजबूत दलीलें पेश कीं, जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अपनी दलीलें रखी. सभी पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया. रानीगंज थाना कांड संख्या 338/2023 और सत्रवाद संख्या 230/24 में यह फैसला आया है. कोर्ट ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को आधार बनाकर दोष सिद्ध किया. यह फैसला पत्रकार समुदाय और पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

"दो आरोपी को आजीवन कारावास की सजा हुई है, जबकि 27 आर्म्स एक्ट में तीन वर्ष की सश्रम कारावास और 10 हजार रूपये की जुर्माने की सजा सुनाई गई. ढाई साल बाद गुरुवार को पत्रकार विमल कुमार हत्याकांड मामले में कोर्ट का फैसला आया."-प्रभा कुमारी, एपीपी

परिवार की प्रतिक्रिया: फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय की जीत बताई है. पूरे बिहार में घटना के समय हड़कंप मच गया था और पत्रकार संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए थे. यह मामला पत्रकारों के खिलाफ बढ़ते खतरे को उजागर करता है, खासकर जब वे संवेदनशील मामलों में गवाही देते हैं. परिवार का कहना है कि यह सजा अन्य आरोपियों के लिए भी सबक बनेगी.

शेष आरोपियों की स्थिति: मामले में कुल नौ आरोपी हैं, जिनमें माधव कुमार और विपिन यादव के अलावा शैशव कुमार, उमेश यादव, क्रांति कुमार यादव, संतोष कुमार भारती उर्फ संतोष राम, रूपेश यादव, आशीष कुमार यादव और अर्जुन शर्मा शामिल हैं. शेष आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी है और उनके ट्रायल का इंतजार है. पुलिस ने शुरुआती जांच में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था, लेकिन कुछ अब भी फरार या अलग मामलों में जेल में हैं.

पत्रकार सुरक्षा पर सवाल: यह हत्याकांड बिहार में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है. विमल कुमार की हत्या उनके पेशेवर दायित्व और गवाही के कारण हुई, जो राज्य में अपराध और न्याय व्यवस्था के बीच टकराव को दर्शाता है. फैसले से उम्मीद है कि ऐसे मामलों में तेज सुनवाई और सख्त सजा सुनिश्चित होगी, ताकि पत्रकार बिना डर के काम कर सकें.

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